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खराब पिच या घटिया बल्लेबाजी... दो दिन में क्यों खत्म हुआ पर्थ टेस्ट ?

खेल के पहले दिन 19 और दूसरे दिन 13 विकेट गिरे. हालांकि सिर्फ दो दिन में टेस्ट मैच खत्म होने के बाद सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं

user-circle cricketcountry.com Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - November 23, 2025 10:06 AM IST

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैड के बीच पर्थ में खेला गया पहला टेस्ट मैच सिर्फ दो दिन में ही खत्म हो गया. यह मैच 141.1 ओवर यानी 847 गेंदों में खत्म हो गया. क्रिकेट इतिहास का 9वां सबसे छोटा टेस्ट मैच है. पर्थ की पिच दुनिया की सबसे तेज पिचों में से एक है. खेल के पहले दिन 19 और दूसरे दिन 13 विकेट गिरे. हालांकि सिर्फ दो दिन में टेस्ट मैच खत्म होने के बाद सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं. भारत के पूर्व क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन और आकाश चोपड़ा ने र्थ पिच की तारीफ करने वालों पर सवाल उठाए. अश्विन ने एक्स पर लिखा, केवल 19 विकेट गिरे पर्थ में, लेकिन शानदार क्रिकेट, कल गुवाहाटी में ऐसा हो तो? वहीं आकाश चोपड़ा ने इसे हिपोक्रिसी कहा.

इससे पहले जब भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए कोलकाता टेस्ट के दौरान जब दूसरे दिन 15 विकेट गिरे थे, तब ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की तरफ से ‘RIP टेस्ट क्रिकेट’ कहा गया था, मगर पर्थ में जब पहले दिन 19 विकेट गिरे तो उनकी तरफ से गेंदबाजी की सराहना की गई है.

पेस और बाउंस वाली पिच पर गेंदबाजों का दिखा दबदबा

पर्थ की पिच हमेशा से तेज गेंदबाजों के लिए स्पाइसी (पेस और बाउंस वाली) मानी जाती है, लेकिन इस बार यह शुरुआती दिनों में बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई, पहले दिन 19 विकेट गिरने से साफ जाहिर होता है कि पिच पर ग्रास ज्यादा था, जो गेंद को तेजी से उछाल दे रही थी. हालांकि मैच दो दिन खत्म होने के लिए पिच को यहां दोष नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि जिस तरह से ट्रैविस हेड (83 बॉल में 123 रन) और मार्नस लाबुशेन (49 बॉल में नाबाद 51 रन) ने बल्लेबाजी की, वह बताता है कि यहां अगर बल्लेबाज समय बिताते तो वह रन बना सकते थे. ट्रेविस हेड ने 83 गेंदों पर 16 चौके और 4 छक्के जड़कर 123 रन की पारी खेली वहीं मार्नस लाबुशेन ने 49 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए. दोनों बल्लेबाजों ने 28.2 ओवर में 205 रन का टारगेट हासिल कर लिया.

पिच नहीं, बल्लेबाजों ने की गलती

पर्थ की पिच को देखा जाए तो यह पिच ठीक थी, लेकिन बल्लेबाजों ने धैर्य नहीं दिखाया. पहली इनिंग में दोनों देशों के बल्लेबाजों को धैर्य दिखाना था और रूककर बैटिंग करने की जरूरत थी, मगर वहां वह धैर्य नहीं दिखा सके. बल्लेबाजों ने ऑफ स्टंप के बाहर ड्राइव करने की कोशिश की जो पर्थ की बाउंसी पिच पर खतरनाक साबित हुआ, कुल मिलाकर, 20 विकेट 66 ओवरों में गिरना बल्लेबाजी की नाकामी को दिखाता है. पिछले साल भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया पर्थ टेस्ट में पहले दिन 17 विकेट गिरे थे, लेकिन यह मैच पांच दिन तक चला था.

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पर्थ टेस्ट के दूसरे दिन जिस पिच पर इंग्लैंड की टीम को डेढ़ सौ रन बनाने मुश्किल हो गय था, उसी पिच पर ऑस्ट्रेलियाई ओपनर ट्रेविस हेड और मार्नस लाबुशेन ने विस्फोटक पारी खेली. हेड और लाबुशेन ने बताया कि अगर बल्लेबाज सूझबूझ के साथ बल्लेबाजी करते तो वो रन बना सकते थे, इसलिए पिच की गलती कम और गेंदबाजों की खतरनाक गेंदबाजी से यहां ज्यादा विकेट गिरे.