जब शुरू होने से पहले खत्म हो सकता था सचिन तेंदुलकर का करियर
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जब कोई इंसान किसी मुकाम को तय कर लेता है तो उसकी सफलता अन्य लोगों को बड़ी आसान दिखाई देती है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल इतर होती है। ऐसी ही कहानी क्रिकेट किवदंती सचिन तेंदुलकर की भी है। सचिन के 1989 से 2013 तक के करियर के बारे में वैसे तो सभी क्रिकेट प्रेमी जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग हैं जो सचिन की 1989 के पहले की जिंदगी को जानते हैं। यही वो दिन थे जब सचिन को कुछ ऐसी तकलीफों का सामना करना पड़ा कि उनका करियर लगभग खत्म होते- होते बचा। लेकिन फिर भी सचिन ने अपने आपको संभाला और आखिरकार 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करते हुए विश्व क्रिकेट को अपनी अद्भुत बल्लेबाजी से रूबरू करवाया।

Sachin Tendulkar's childhood story
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यह बात तब की है जब सचिन तेंदुलकर की उम्र महज 12 साल की रही होगी। सचिन एक दिन शिवाजी पार्क में अपनी टीम की कप्तानी कर रहे थे। इसी बीच उनकी टीम के विकेटकीपर को चोट लग गई। सचिन ने टीम में अन्य खिलाड़ियों को विकेटकीपिंग का दारोमदार लेने के लिए कहा, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। इसलिए कप्तानी की भूमिका को निभाते हुए सचिन ने खुद ही विकेटकीपिंग करना शुरू कर दी। इसी बीच एक गेंद को वह पकड़ने में नाकामयाब रहे और गेंद सीधे उनके माथे पर लगी और वह बुरी तरह से घायल हो गए। गनीमत रही कि वह गेंद उनकी आंख पर नहीं लगी बल्कि आंख के इंच भर बगल से लगी। सोचिए अगर ये गेंद उनकी आंख पर लग जाती तो क्या होता? उनके माथे पर एक कट लग गया और खून बहने लगा।

Sachin Tendulkar's childhood story
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सचिन के पास उस वक्त इतने पैसे नहीं थे ताकि वह टैक्सी पकड़कर घर जा पाते और इस हालत में वह ट्रेन से घर जाने लायक नहीं थे। इस बीच सचिन ने अपने दोस्तों से उन्हें साइकल पर घर छोड़ने के लिए कहा। वापस लौटने में सचिन अपने साथ भारी- भरकम क्रिकेट बैट्स लिए हुए थे। इसी बीच फ्लाईओवर में इतनी भीड़ थी कि उनके दोस्तों को साइकल में पैडल मारने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए सचिन ने पैदल चलने का निर्णय लिया। चूंकि सचिन का चेहरा और कपड़े खून से सने हुए थे इसलिए राह पर चलने वाले लोग उन्हें घूर- घूर कर देख रहे थे। लेकिन सचिन ने उनकी बिल्कुल भी परवाह नहीं की और अपने घर की ओर बढ़ते चले गए। जब वह घर पहुंचे तो उनकी दादी मां उनके माथे पर हल्दी का लेप लगाया और तब जाकर सचिन की जान में जान आई।