Bharat Malhotra
Bharat Malhotra अभी cricketcountry.com की हिंदी टीम का हिस्सा हैं. भारत के पास डिजिटल मीडिया में करीब 17 साल का अनुभव है. साल 2008 में आ ...Read More
Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - January 26, 2026 7:53 PM IST

नई दिल्ली: संजू सैमसन की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है. लेकिन बीते एक दशक से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में निरंतरता की कमी देखी गई है. और इसी वजह से वह अकसर टीम से अंदर-बाहर होते रहे हैं.
न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज में भारत ने 3-0 की बढ़त बनाई हुई है. लेकिन संजू का प्रदर्शन इन तीन मैचों में बहुत अच्छा नहीं रहा है. उन्होंने सिर्फ एक बार दहाई का आंकड़ा पार किया है. संजू ने तीन मैचों में 10, 6 और शून्य का स्कोर बनाया है. और यह खराब स्कोर दिखाता है कि वह वाकई रंग में नहीं हैं. ऐसे में जब ईशान किशन रन बना रहे हैं तो संजू पर दबाव काफी बढ़ गया है. क्रिकेट में आंकड़ों और ‘डेटा’ के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है, जिसे अक्सर लोग एक ही मान लेते हैं. जहां आंकड़े एक सपाट तस्वीर पेश करते हैं, वहीं ‘डेटा’ उन्हीं आंकड़ों का गहराई ये विश्लेषण करने की कोशिश करता है.
सैमसन ने 11 वर्षों में खेले गए 55 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 147 से अधिक की स्ट्राइक रेट से 1048 रन बनाए हैं (आधुनिक टी20 क्रिकेट में औसत को अपेक्षाकृत कम महत्व दिया जाता है). इस दौरान उनके नाम तीन अर्धशतक और तीन शतक हैं, जिनमें से दो 2024 के अंत में दक्षिण अफ्रीका की धरती पर आए.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी स्ट्राइक रेट 131, इंग्लैंड के खिलाफ 118 और न्यूजीलैंड के खिलाफ घटकर 113 रह जाती है.
सैमसन ने 2025 के बाद जब भी पारी की शुरुआत की है, कुछ स्पष्ट रुझान सामने आए हैं. पिछले वर्ष की शुरुआत में इंग्लैंड ने लगातार पांच मैचों में शरीर की ओर तेज और शॉट गेंदें डालकर उन्हें परेशानी में डाला, जिससे वे बिना ताकत और टाइमिंग के जल्दबाजी में पुल शॉट खेलने को मजबूर हुए.
मैट हेनरी (दो बार) और काइल जैमीसन (130 के आस-पास की गति से गेंदबाजी करने वाले) ने इस साल (2026) सीधी लाइन में या लेग-मिडिल की दिशा में गेंदें डालीं, जिससे सैमसन को ऑफ-साइड पर खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला.
उनकी बल्लेबाजी में आ रही दिक्कतों को समझने के लिए ने भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज डब्ल्यूवी रमन और राजस्थान रॉयल्स के ‘हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर’ जुबिन भरूचा से बातचीत की. भरूचा ने लंबे समय तक सैमसन के साथ करीब से काम किया है.
रमन के अनुसार, ‘संजू को तकनीक और मानसिक दोनों मोर्चों पर थोड़ी समस्या है. उनकी अलग-अलग गति के गेंदबाजों के खिलाफ शॉट खेलते समय उनके बल्ले की गति लगभग समान रहती है. यह उन्हें 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले गेंदबाजों के खिलाफ सफलता दिला सकती है. लेकिन 130 से अधिक या कम गति और उसमें बदलाव होने पर दिक्कत आती है. समाधान यह है कि गेंद की गति के अनुसार बल्ले की गति को समायोजित किया जाए. ऐसा होते ही उनकी बल्लेबाजी सुधर जाएगी.’

मानसिक पहलू पर रमन ने कहा, ‘उन्हें पता है कि सफेद गेंद के क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज की जगह के लिए कड़ा मुकाबला है. शायद यही दबाव डाल रहा है. फिर भी उनमें इस समस्या से उबरने की पूरी क्षमता है. वह एक सक्षम खिलाड़ी हैं और भारत के लिए प्रदर्शन कर सकते हैं.’
रमन यह नहीं मानते कि मिडल-ऑर्डर में बल्लेबाजी करना उनकी लय को बिगाड़ता है. उनके अनुसार, ‘टी20 अंतरराष्ट्रीय में वह शीर्ष तीन के लिए उपयुक्त हैं और वहां उन्हें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. आजकल खिलाड़ी किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी करने की बात करते हैं. जब तक आपको बहुत नीचे नहीं भेजा जाता, दिक्कत नहीं होनी चाहिए.’
सैमसन आत्मविश्वास पर निर्भर रहने वाले खिलाड़ी हैं. कुछ साल पहले एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि एक मैच में जल्दी आउट होने के बाद वह उदास मन से चुपचाप स्टेडियम से निकलकर मरीन ड्राइव पर जाकर बैठ गए थे.
राजस्थान रॉयल्स में सैमसन, यशस्वी जायसवाल और ध्रुव जुरेल जैसे खिलाड़ियों के साथ काम चुके भरूचा मानते हैं कि यह समस्या तकनीक से अधिक मानसिक है.

उन्होंने कहा, ‘तकनीकी रूप से कुछ भी गलत नहीं है. यह सब दिमाग में है. स्पष्टता की कमी के कारण वह कभी शानदार तो कभी औसत दिखते हैं. यह हर खिलाड़ी के साथ होता है. हाल ही में सूर्यकुमार यादव के साथ भी ऐसा हुआ है. बस इसे बेहतर तरीके से संभालना सीखना होता है.’
रविचंद्रन अश्विन ने भी हाल में बताया था कि न्यूजीलैंड ने उन पर सीधी लाइन से गेंदबाजी की जबकि इंग्लैंड ने शरीर की दिशा में शॉर्ट और तेज गेंदबाजी की थी.
भरूचा ने इस पर कहा, ‘ऐसी स्थिति में उन क्षेत्रों में थोड़ा अधिक अभ्यास करना होता है, जिन्हें आप अपनी कमजोरी मानते हैं. सैमसन ऑफ-साइड पर ज्यादा रन बनाना चाहते हैं.’
भरूचा से जब पूछा गया कि सैमसन इस खामी से कैसे उबर सकते हैं तो उन्होंने कहा, ‘उन्हें अभ्यास के दौरान ऐसी गेंदों का अधिक सामना करना चाहिए. थ्रोडाउन विशेषज्ञ को ऑफ स्टंप लाइन से लेग स्टंप लाइन की ओर लगातार बदलते रहना चाहिए.’
एजेंसी- भाषा
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