Akhilesh Tripathi
पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2013 मेंआर्यन टीवी (पटना) से हुई, फिर ईनाडु डिजीटल (ईटीवी हैदराबाद) में लगभग ...Read More
Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - November 25, 2025 3:40 PM IST

टी-20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद राहुल द्रविड़ ने टीम इंडिया के हेड कोच से इस्तीफा दिया, उसके बाद काफी मंथन के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर को भारतीय टीम का नया हेड कोच बनाया गया. गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद यह माना जा रहा था कि उनका आक्रामक रवैया और जीतने की मानसिकता से टीम को नई दिशा मिलेगी, मगर पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-3 से हार, फिर ऑस्ट्रेलिया में 1-3 से शर्मनाक हार और अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू मैदान पर हार ने उनके प्रदर्शन ने कई सवाल खड़े किए हैं. भारतीय टीम हर विभाग में नाकाम रही है, घर में टेस्ट मैच जीतने में टीम इंडिया के पसीने छुट रहे हैं. सात प्रमुख कारण जो गंभीर की कोचिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
बल्लेबाजी हमेशा से टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत रही है. इस सेंचुरी की शुरुआत में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, रोहित शर्मा, विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे जैसे बल्लेबाज टीम की रीढ़ रहे थे, मगर इन बल्लेबाजों के संन्यास के बाद अब शीर्ष क्रम भी लगातार असफल रहा है, इसके अलावा मिडिल ऑर्डर भी दबाव में टूट रहा है, हालात यह है कि फ्लैट पिचों पर भी रन बनाना मुश्किल होता दिख रहा है, यह तकनीकी कमजोरियों के साथ-साथ मानसिकता की कमी को भी उजागर करता है. इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स टेस्ट में टीम इंडिया 193 रन का टारगेट हासिल नहीं कर पाई. साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में भारतीय टीम 124 रन के स्कोर का पीछा करते हुए 93 पर सिमट गई थी.
गौतम गंभीर की कोचिंग के शुरुआती दौर में तेज और स्पिन दोनों विभाग अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे. शुरुआती ओवरों में विकेट न मिलना, इसके अलावा गेंदबाजों का एकजुट प्रदर्शन नहीं करना टीम की हार का बड़ा कारण बन चुका है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अकेले जसप्रीत बुमराह पर पूरी टीम निर्भर दिखी. इंग्लैंड दौरे पर हालांकि सिराज और आकाश दीप ने प्रभावित किया, जिससे टीम ने सीरीज को 2-2 की बराबरी पर खत्म किया. इसके अलावा हमारे स्पिनर्स में भी वह धार नजर नहीं आ रही है, जो पिछले कुछ दशक में हमारी सबसे बड़ी ताकत रहे थे.
गंभीर की रणनीति में बैटिंग ऑर्डर में लगातार बदलाव सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. हर मैच में अलग प्लेइंग इलेवन और नए कॉम्बिनेशन ट्राय करना टीम के तालमेल को बिगाड़ रहा है. चेतेश्वर पुजारा के नंबर तीन से हटने के बाद इस नंबर पर कई नए बल्लेबाजों को मौका दिया गया है. इंग्लैंड सीरीज में साई सुदर्शन को मौका दिया गया, मगर वह प्रभाव नहीं छोड़ सके. कोलकाता टेस्ट में वाशिंगटन सुंदर को नंबर तीन पर आजमाया गया, अब एक बार फिर सुदर्शन को गुवाहाटी में नंबर तीन पर मौका दिया गया है. इसके अलावा कोलकाता टेस्ट में टीम ने चार स्पिनर्स को मौका दिया, जो टीम इंडिया के लिए भारी पड़ा. लगातार बदलाव के बाद खिलाड़ी अपनी भूमिका को लेकर कंफ्यूज दिखाई देते हैं, और यह असुरक्षा उनके प्रदर्शन में झलकती है और यह बदलाव अब टीम पर भारी पड़ने लगा है.
टीम इंडिया के प्रदर्शन की सबसे बड़ी चिंता खिलाड़ियों का एटीट्यूड है. खिलाड़ियों का बॉडी लैंग्वेज भी बदला नजर आता है. विराट कोहली जैसे खिलाड़ी टीम मे ऊर्जा लाते हैं, वैसी ऊर्जा और जुनून टीम में नहीं दिख रहा, जो पहले हर मैच में झलकता था. खिलाड़ियों का गलत शॉट सेलेक्शन, बार-बार एक ही गलती दोहराना और फील्डिंग में हो रही मिस्टेक यह बताती है कि प्लेयर्स में मानसिक तैयारी और खेल के प्रति प्रतिबद्धता में कमी आ रही है.
टीम इंडिया के एक और बड़ा पहलू यह है कि भारतीय टीम ट्रांजिशन फेज में है. रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन ने संन्यास ले लिया है और कुछ दिग्गज खिलाड़ी अपने करियर के अंतिम चरण में हैं. वहीं युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं. हालांकि इस बदलाव को संतुलित तरीके से मैनेज करने की जिम्मेदारी कोचिंग स्टाफ की है, जो सही से होता प्रतीत नहीं हो रहा है. सही प्लानिंग और स्थिरता की कमी टीम को प्रभावित कर रही है.
गौतम गंभीर के साथ आए नए कोचिंग स्टाफ के फैसलों पर भी सवाल उठने लगे हैं. टीम की तैयारी, नेट सेशन की योजना, प्लेइंग इलेवन के चयन और रणनीति में कई खामियां सामने आई हैं. बल्लेबाजी कोच पर भी सवाल उठ रहे हैं. अभिषेक नायर को बल्लेबाजी कोच से हटाने के बाद सितांशु कोटक को यह जिम्मेदारी दी गई थी, मगर वह भी असर नहीं छोड़ पाए हैं. बल्लेबाजी हाल के दिनों में हमारी हार की बड़ी वजह से में से एक है. कोलकाता टेस्ट में साउथ अफ्रीका के खिलाफ या गुवाहाटी टेस्ट की पहली पारी में भी हमारी बल्लेबाजी फ्लॉप रही. इसके दौरान मैच के दौरान गलत फैसलों ने कोचिंग स्टाफ की क्षमता पर सवाल करती है.
गौतम गंभीर की छवि एक सख्त और आक्रामक कोच की रही है. क्रिकेट एक्सपर्ट का मानना है कि उनका यह एटीट्यूड टीम पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, लेकिन कई लोगों की राय है कि युवा खिलाड़ी उनके रवैये के दबाव में खेल रहे हैं. इसके अलावा हार के बाद भी जिम्मेदारी से पलड़ा झाड़ना भी गंभीर की अब आदत बनती जा रही है. गंभीर की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर नजर आ रहा है. पिछले साल न्यूजीलैंड सीरीज से पहले चेन्नई में गंभीर ने कहा था कि हम एक ऐसी टीम चाहते हैं जो एक दिन में 400 रन बनाए तथा दो दिन तक बल्लेबाजी करके मैच ड्रॉ करा सके. यह कहीं से भी प्रतीत नहीं हो रहा है. कोलकाता में जहां पिच की भारी आलोचना हुई, वहां उन्होंने पिच का बचाव किया.
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