पिछले एक साल में शिखर धवन के बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला है © AFP
पिछले एक साल में शिखर धवन के बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला है © AFP

टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाजी भारत के लिए हमेशा चुनौती रही है। वेस्टइंडीज दौरे पर भी भारतीय टीम के सामने ये चुनौती एक बार फिर से सामने आई। मुरली विजय चोटिल हुए तो शिखर धवन रन बनाने के लिए जूझते दिखे। वो तो भला हो लोकेश राहुल का जिन्होंने सलामी बल्लेबाज के रूप में रन बनाने के अपने सिलसिले को जारी रखा है, लेकिन उनके रन बना लेने से धवन की ओपनर के रूप में असफलता छिप गई है। असफल रहने के बावजूद भी शिखर धवन को तीसरे टेस्ट में स्थान दिया गया, जबकि विजय पूरी तरह फिट थे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों धवन में इतना भरोसा जताया जा रहा है। आइए नजर डालते हैं धवन के पिछले कुछ समय के आंकड़ों पर और जानने की कोशिश करते हैं कि क्या वो सच में इस टीम में जगह पाने के हकदार हैं।

अगर सलामी बल्लेबाज के तौर धवन के आंकड़ों पर नजर डाले तो उन्होंने 22 टेस्ट मैचों में कुल 1446 रन बनाए हैं उनका औसत 40.16 है। इन 22 टेस्ट मैचों में उन्होंने 4 शतक जमाए हैं। ये उनके पूरे टेस्ट करियर का आंकड़ा है, जो उनको एक सफल ओपनर साबित करता है, लेकिन क्या वो सच में एक सफल ओपनर हैं? क्या वो एक ओपनर की भूमिका के साथ पूरा न्याय कर पा रहे हैं? आइए जानते हैं।

22 टेस्ट की 37 पारियों में उनके बल्ले से 4 शतक और 3 अर्धशतकीय पारियां धवन के बल्ले से निकली हैं। यानी उन्होंने सिर्फ 7 पारियों में 50 या उससे ज्यादा का स्कोर बनाया। बाकि 30 पारियों में उनका स्कोर 0 से 49 के बीच रहा। इनमें 4 बार वो 0 के स्कोर पर पवेलियन लौटे तो 5 बार दहाई के आंकडे़ को भी छू नहीं सके। यानी लगभग 15 टेस्ट मैचों में उनके बल्ले से कोई भी बड़ी पारी नहीं निकली। फिर भी भारतीय ओपनर के रूप में टीम मैनेजमेंट उन पर लगातार भरोसा दिखाए जा रही है।

लगातार नाकामी के बाद भी शिखर धवन को मौके पर मौका दिया जा रहा है © AFP
लगातार नाकामी के बाद भी शिखर धवन को मौके पर मौका दिया जा रहा है © AFP

पिछले 12 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो धवन ने सिर्फ 1 अर्धशतक बनाया है। वो भी वेस्टइंडीज की कमजोर पेस अटैक के खिलाफ। पिछले 12 महीनों में धवन ने कुल 7 टेस्ट में सिर्फ 288 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 40 से गिरकर 28 तक जा पहुंचा है। यानी पिछले 12 महीनों में धवन बुरी तरह फ्लॉप साबित हुए हैं। धवन ने अपना आखिरी शतक पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट के दौरान लगाया था। पिछले 12 महीनों में सिर्फ 1 अर्धशतकीय पारी उनके हुनर का सही ब्यौरा नहीं देती, लेकिन फिर भी उनको टीम में लगातार मौके मिल रहे हैं और विजय जैसा ओपनर बल्लेबाज उनकी वजह से बेंच की शोभा बढ़ा रहा है।

धवन के अंदर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन वो अपनी प्रतिभा को प्रदर्शन में बदलने में नाकाम साबित हुए हैं। तो भारतीय टीम मैनेजमेंट को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है साथ ही ओपनर के रूप में नाकाम साबित हो रहे धवन की जगह कुछ और विकल्प तलाशने की जरूरत है।