सौरव गांगुली और डोना अपने दोस्तों के साथ Photo Courtesy: Facebook
सौरव गांगुली और डोना अपने दोस्तों के साथ Photo Courtesy: Facebook

भारतीय क्रिकेट के जांबाज कप्तान रहे सौरव गांगुली का जन्म 08 जुलाई, 1975 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता(सिटी ऑफ जॉय) शहर में हुआ था। वह अपने पिता चंडीदास गांगुली और मां निरुपमा गांगुली के दूसरे नंबर के पुत्र हैं। सौरव के पिता कोलकाता के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं। यही कारण था कि उनके घर वालों ने उनको ‘महाराजा’ का निक नाम दिया। सौरव ने भारतीय टीम की ओर से साल 1992 में 19 साल की उम्र में पर्दापण किया। 1996 के इंग्लैंड दौरे में गांगुली ने बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और पूरे इंडिया के चहेते बन गए। इंग्लैंड के दौरे से लौटने के बाद उन्होंने एक नए विवाद को जन्म दिया जब वह अपनी बचपन की दोस्त डोना के साथ भाग गए। डोना सौरव की पड़ोसी थी और वह उनसे मोहब्बत करते थे, लेकिन सौरव के परिवार वालों की डोना के परिवार वालों से नहीं बनती थी जिसके कारण दोनों के रिश्ते का मुकम्मल होना आसान नहीं था। ये भी पढ़ें: मैदान पर क्रिकेट खेलते हुए इन क्रिकेटरों ने गंवाई अपनी जान

23 साल के युवा सौरव ने अपनी जिद को जाहिर करते हुए डोना को अपने साथ भागने के लिए कहा और वह अंततः घर से दूर भाग गए। सौरव को डोना से प्यार तभी हो गया था जब वह स्कूल में थे। सौरव और डोना अलग-अलग स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन सौरव डोना की एक झलक पाने के लिए उनके स्कूल के अक्सर चक्कर लगाया करते थे। सौरव और डोना के परिवार वाले एक समय बिजनेस पार्टनर थे, लेकिन बिजनेस में घाटा लगने की वजह से दोनों परिवारों के संबंधों में खटास आ गई। यही कारण था कि दोनों परिवार एक दूसरे से बात तक नहीं करते थे, लेकिन इन दोनों परिवारों की कहानी में किसी फिल्मी स्टोरी जैसा मोड़ आया जब सौरव को डोना से प्यार हो गया। ये भी पढ़ें: जानिए भारतीय क्रिकेटरों के बिजनेस वेंचर

सौरव ने घर से भागने के पहले बंगाल के सर्वाधिक सम्मानीय क्रिकेटर मॉलोय मुखर्जी से बातचीत की थी। उन्होंने जब उन्हें अपनी पूरी योजना बताई तो वह कुछ देर के लिए चौंक गए थे। मॉलोय मुखर्जी सौरव के करीबी मित्रों में से एक हैं। घर से भागने के बाद गांगुली ने डोना के साथ कोर्ट में शादी करने की योजना बनाई। लेकिन यह बात मीडिया में लीक हो गई जिसकी वजह से उन्होंने तत्काल में बनाई गई योजना को रद्द कर दिया।

बाद में उन्होंने मीडिया से बचाव करते हुए कोर्ट मैरिज कर ली। जब इस बात का पता सौरव के परिवार को चला तो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि वह किसी गैर-ब्राम्हण लड़की के साथ अपने बेटे की शादी नहीं होने देंगे। मैरिज रजिस्टार जिसने सौरव और डोना की शादी करवाई थी उसने बताया कि शादी के बाद डोना बहुत खुश लग रही थीं, लेकिन सौरव अपने परिवार की प्रतिक्रिया के बारे में सोचकर डर रहे थे।

बाद में उनके परिवार ने उनकी शादी को स्वीकार कर लिया। इसके कुछ दिन बाद दोनों परिवारों की सहमति से फॉर्मल वेडिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया और 21 फरवरी 1997 को दोनों ने बंगाली रीति-रिवाज से शादी की। डोना के लिए सौरव आज भी पड़ोसी, बेस्ट फ्रेंड हैं जिनके साथ उन्हें प्यार हो गया था। वह कहती हैं कि उन्हें एक व्यक्ति से प्यार हुआ था किसी क्रिकेटर से नहीं।