अरविंदा डी सिल्वा © Getty Images
अरविंदा डी सिल्वा © Getty Images

जब दो छोटी टीमों की बीच मैच खेले जाते हैं तो दुनिया में उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं मिलती। लेकिन कभी- कभार इन टीमों के बीच ऐसे मैच देखने को मिलते हैं जो क्रिकेट इतिहास में एक सुनहरी याद के तौर पर दर्ज हो जाते हैं। साल 1992 में ऑस्ट्रेलिया- न्यूजीलैंड में पहली बार विश्व कप का आयोजन किया गया। श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच न्यू प्लाईमाउथ में मैच खेला जाना था। श्रीलंका को कुछ दिन पहले ही टेस्ट दर्जा प्राप्त हुआ था वहीं जिम्बाब्वे को टेस्ट दर्जा मिलना अभी बाकी था। मैच देखने के लिए ज्यादा दर्शक नहीं आए और अगर मोटे तौर पर देखा जाए तो करीब 3,100 दर्शक पूरे मैदान में मौजूद थे। मैदान की बाउंड्री छोटी थीं। पिच पूरी तरह से पाटा थी, मैदान में घास का नामोनिशान नहीं था। श्रीलंका की मजबूत और विस्फोटक बल्लेबाजी पर भरोसा जताते हुए अरविंदा डी सिल्वा ने जिम्बाब्वे को बल्लेबाजी करने का न्यौता दे दिया।

पहला मैच खेलने उतरे एंडी फ्लावर: इस मैच के साथ डैब्यू कर रहे एंडी फ्लावर और वायने जेम्स ने जिम्बाब्वे टीम को ठोस शुरुआत दी। जेम्स ने कपिला विजिगुनवर्डेन के खिलाफ पहले तो पुल शॉट के सहारे चौका जड़ा तो बाद में लॉफ्टेड ड्राइव खेलना शुरू किए। इसे देखकर डी सिल्वा ने गेंदबाजी में परिवर्तन किया और प्रमोदया विक्रमसिंघे को गेंदबाजी आक्रमण पर लाए। ये गेंदबाजी परिवर्तन रंग लाया और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। जेम्स ने कट खेलना चाहा, लेकिन वह कामयाब नहीं हुए और विकेट के पीछे हशन तिलकरत्न को कैच दे बैठे। इस तरह जेम्स 21 गेंदों में 17 रन बनाकर चलते बने। इसी बीच फ्लावर ने असांका गुरुसिंहा की गेंद पर चौका जड़ते ही अपने करियर की पहली बाउंड्री लगाई। लेकिन दूसरे छोर पर एंडी पेक्रॉफ्ट रन बनाने से जूझते नजर आए। अंततः उन्होंने डीप मिड ऑन पर सीधे फील्डर चंपाक रामानायके को कैच थमा दिया। पेक्रॉफ्ट 22 गेंदों में 5 रन बनाकर हुए और अब जिम्बाब्वे का स्कोर 57/2 हो चुका था।

लेकिन बड़ा विकेट गिरना अभी बाकी था। डेव हॉटन ने गुरुसिंहा की गेंद को स्टीयर करने का प्रयास किया , लेकिन तिलकरत्ने तेजी से अपने दाहिने ओर गए और एक बेहतरीन कैच को मुकम्मल कर लिया। इस तरह जिम्बाब्वे का स्कोर 20वें ओवर तक 83/3 हो चुका था। ऐसे में लग रहा था कि जिम्बाब्वे टीम जल्दी ही अपने हथियार डाल देगी।

केविन एरनोट की एंडी प्लावर के साथ साझेदारी: यही वो समय था जब केविन एरनोट ने बागडोर संभाली और एंडी फ्लवार का साथ देना शुरू किया। इसी बीच सनथ जयसूर्या गेंदबाजी के लिए आए। जयसूर्या पर दोनों ही बल्लेबाजों ने धावा बोल दिया। पहले तो फ्लावर ने इतना खूबसूरत लेग ग्लांस मारा कि फील्डर गेंद को दर्शकों की भांति देखते ही रहे और गेंद सीमा रेखा पार कर गई। वहीं दूसरी ओर से एरनोट ने रुवान कालपेज की गेंद को खूबसूरती से कट करते हुए चार रनों के लिए पहुंचाया। इसी बीच फ्लावर ने सन हैट मंगवाई और शॉर्ट कवर की ओर गेंद को धकेल कर रन लिया और अपना अर्धशतक पूरा किया।

वहीं, एरनोट ने कालपेज की गेंद पर मिडविकेट का छक्का जड़ा और अर्धशतक पूरा किया। लेकिन इसके अगले ही ओवर में उन्होंने विक्रमसिंघे की गेंद को स्टीयर करने की कोशिश की लेकिन हसन ने डाइव लगाते हुए उनका कैच ले लिया और 52 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर वह चलते बने। अब स्कोर 37वें ओवर में 167/4 हो चुका था। 300 तो भूल जाइए यहां से 250 पहुंचना मुश्किल लग रहा था।

एंडी वॉलेर की आतिशी बल्लेबाजी और एंडी फ्लावर का शतक: इसी बीच सिर में बिना बालों वाले खिलाड़ी एंडी वॉलेर ने अपना गार्ड लिया। उसने कवर के ऊपर से झन्नाटेदार चौका जड़ दिया। रामानायके ने उन्हें शॉर्ट गेंद फेंकी, वालेर ने हुक किया और फिर से चार रन बटोरे। अगले ओवरों में फ्लावर ने रामानायके की ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद पर एक रन लिया और अपने पहले वनडे मैच में शतक पूरा किया। वह अपने पहले वनडे मैच में शतक जड़ने वाले दुनिया के तीसरे बल्लेबाज बने थे। इसके अलावा वर्ल्ड कप के डेब्यू मैच में शतक बनाने वाले वह आज भी दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं।

अंततः वॉलेर ने अपना अर्धशतक 31 गेंदों में पूरा किया। इसी बीच जैसे ही गुरुसिंहा ने गेंद को ऊपर पिच कराया। वॉलेर ने गेंद को सीधे स्टैंड में छह रनों के लिए मार दिया और गेंद मैदान के बाहर लगे पेड़ पर जाकर लगी। अंतिम ओवर डी सिल्वा ने विजिगुनवर्डेन को दिया। पहली गेंद फिर से पेड़ पर गिरी। इसी बीच उनका लॉन्ग ऑफ में एक कैच छूटा। अंततः जिम्बाब्वे ने 50 ओवरों मे 4 विकेट पर 312 का स्कोर खड़ा किया। वॉलेर ने तेज तर्रार 45 गेंदों में 83 रन बनाए वहीं फ्लावर 152 गेंदों में 115 रन बनाकर नाबाद रहे।

इस स्कोर को चेज करना उस जमाने में असंभव सा था। करीब दो साल पहले ही न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 298/6 के स्कोर के साथ हराया था। लेकिन वह 55- 55 ओवरों का मैच था। 50 ओवर का रिकॉर्ड भी न्यूजीलैंड के नाम था। जो उसने इंग्लैंड के खिलाफ साल 1982-83 में एडीलेड ओवल में 297/6 के स्कोर के साथ बनाया था। इस तरह से श्रीलंका को ये मैच जीतने के लिए कई वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने थे।

श्रीलंकाई ओपनरों ने दी अच्छी शुरुआत: अनुभवी रोशन महानामा और मोटे- ताजे थुला समशेसकेरा ने श्रीलंका को अच्छी शुरुआत दी। समशेसकेरा ने इड्डो ब्रांडेस की गेंदों पर स्क्वेयर लेग और मैलकॉम जारविस की गेंद पर मिड ऑफ की दिशा में चौके जड़े। वहीं दूसरी ओर से महानामा ने अपनी कलाईयों का जादू दिखाया और रनों का बहाव बरकरार रखा।

इसी बीच हॉटन इसी मैच के साथ पदार्पण करने वाले केविन डुअर्स को लेकर आए। लेकिन समशेसकेरा ने उनकी बखिया उधेड़ दी और उनके पहले ओवर में तीन चौके जड़ दिए। ब्रांडेस को भी नहीं बख्शा गया और उन्होंने अपने 9 ओवरों में 61 रन दे डाले। श्रीलंका देर- सवेरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था। समशेसकेरा जो अब 45 रनों पर खेल रहे थे वह 9 चौके जड़ चुके थे। उनका अर्धशतक अगले ओवर में आया जब उन्होंने डुअर्स की गेंद पर दो चौके लगा दिए। महानामा को उन्हें स्ट्राइक देकर खुशी हो रही थी, लेकिन वह खराब गेंदों को मारने से चूक नहीं रहे थे। हॉटन इसी बीच जॉन ट्राईकोस को लेकर आए और उन्होंने पहला ब्रेकथ्रू दिलवाया। समशेसकेरा को उनकी गेंद पर लॉन्ग ऑफ पर लपका गया। समशेसकेरा ने 61 गेंदों में 75 रन ठोके। जिसमें से 50 रन बाउंड्री से आए। यह उनकी जिंदगी की सबसे बेहतरीन पारी थी। दोनों ओपनरों ने 21 ओवरों में पहले विकेट के लिए 128 रन जोड़े।

इसके थोड़ी देर बाद ही ब्रांडेस ने विकेट लेने का सिलसिला शुरू किया। पहले तो उन्होंने महानामा को शॉर्ट कवर में एरनोट के हाथों झिलवाया तो बाद में गुरुसिंहा को रन आउट कर दिया। वैसे गुरुसिंहा को रन आउट करवाने में गलती अरविंदा डी सिल्वा की थी। हालांकि, अरविंदा भी ज्यादा देर तक क्रीज पर टिके नहीं रह सके और हॉटन को मिड- ऑन पर कैच दे बैठे। श्रीलंका का स्कोर 34 ओवरों में 4 विकेट पर 169 रन था। अब उन्हें जीतने के लिए 96 गेंदों में 144 रनों की दरकार थी। [ये भी पढ़ें: आईपीएल मे हैट्रिक लेने वाले शीर्ष गेंदबाज]

अर्जुन रणतुंगा ने संभाली पारी: अर्जुन रणतुंगा ने ट्राईकॉस की गेंद को स्वीप करके चार रन बटोरे और अपने रन बनाने की शुरुआत की। अब उन्हें जयसूर्या ने ज्वाइन किया। उन्होंने आते ही डीप मिड विकेट के ऊपर से गेंद को छह रनों के लिए मारा। इसके बाद अगला छक्का जयसूर्या ने लॉन्ग ऑन की दिशा में मारा।

हताश और परेशान हॉटन खुद को गेंदबाजी आक्रमण पर ले आए। जयसूर्या ने स्लॉग स्वीप लगाने की कोशिश की लेकिन कम तेजी के कारण वह पकड़े गए और स्क्वेयर लेग पर फ्लावर ने दौड़ते हुए उनका शानदार कैच पकड़ा। हालांकि, रणतुंगा नहीं रुके और उन्होंने हॉटन की गेंद पर स्क्वेयर लेग का चौका जड़ा। इसके बाद उन्होंने उसी ओवर में प्वाइंट का चौका जड़ दिया। तिलकरत्ने ने भी इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने जारविस की गेंद पर कवर के ऊपर से लाफ्टेड स्ट्रोक छह रनों के लिए खेला। रणतुंगा ने लेन बटचार्ट की गेंद पर छक्के के साथ शुरुआत की, और गेंद को डीप मिड विकेट पार करा दिया, लेकिन जारविस बदला लेना चाहते थे। उन्होंने गेंद की लंबाई थोड़ी छोटी की और तिलकरत्ने को क्लीन बोल्ड कर दिया। अब श्रीलंका को 5 ओवरों में 40 रनों की दरकार थी। लेकिन अर्जुन को अब एक अच्छे पार्टनर की तलाश थी। लेकिन क्या कालपेज उनका साथ दे पाएंगे? ये सवाल सभी के दिमाग में गूंज रहा था।

मैच का आखिरी पल: रणतुंगा ने हर चीज को अपने पक्ष में जल्दी ही कर लिया। उन्होंने अपने पैरों को बड़ी सफाई से ऑफ साइड की ओर समेटा और बड़ी खूबसूरती से गेंद को लेग ग्लांस करते हुए चार रनों के लिए बाउंड्री लाइन के बाहर पहुंचा दिया। अगली गेंद ऑफ स्टंप के बाहर थी और इस बार रणतुंगा ने लेट कट खेला। ये स्ट्रोक इतना बाहर जरूर खेला गया था कि फ्लावर की पहुंच से बाहर हो और इस तरह यहां पर भी बाउंड्री मिल गई। जब श्रीलंका को 7 गेंदों में 4 रन की दरकार थी तब कालपेज छक्का मारकर जीत दिलाने के प्रयास में प्वाइंट बाउंड्री पर हॉटन के हाथों लपक लिए गए।

ये विकेट उन्हें दिन में बहुत देरी से मिला था। लेकिन अच्छी बात ये थी कि यह विकेट था। अब सवाल था कि अर्जुन को अगर जारविस आउट कर देते हैं तो मैच उनके हाथ में पहुंच जाएगा। लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके और अर्जुन ने गेंद को स्क्वेयर लेग की ओर खेलते हुए अपनी टीम को जीत दिलवा दी। श्रीलंका ने मैच 3 विकेट से अपने नाम कर लिया और श्रीलंकाई खिलाड़ी जोश में डूब गए। रणतुंगा अंत तक 61 गेंदों में 88 रन बनाकर नाबाद रहे। यह उस जमाने में वनडे क्रिकेट में चेज किया गया सबसे बड़ा टोटल है। वर्तमान में वनडे क्रिकेट में चेज किया गया सबसे बड़ा स्कोर 434 है जो साल 2005 में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध चेज किया था।