Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - January 21, 2016 6:41 PM IST


भारतीय टीम एक बार फिर से उस दो-राहे पर आकर खड़ी हो गई है जहां उसे हर नया राहगीर निराश ही कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ केनबरा में खेले गए दूसरे एकदिवसीय की दर्द भरी दास्तान भी यही बयां करती है। भारत नाटकीय ढंग से केनबरा में खेला गया सीरीज का चौथा वनडे हार गया। एक समय जहां भारत का स्कोर 277/1 था। अगले ही पलों में ऐसा भूचाल आया कि भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और 323 रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत ने अपने आखिरी 9 विकेट महज 46 रनों पर गंवा दिए और दो भारतीय दिग्गजों शिखर धवन(126) और विराट कोहली(106) के शतक धूल-धुस्रित हो गए। भारत-बनाम ऑस्ट्रेलिया, चौथा वनडे स्कोरकार्ड देखने के लिए क्लिक करें।
भारत को 349 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे प्राप्त करने के लिए रोहित शर्मा ने शुरू से ही आतिशी अंदाज में बल्लेबाजी की और 25 गेंदों में 41 रन ठोंकते हुए भारतीय टीम को धमाकेदार शुरुआत दी। इसके बाद धवन और कोहली ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की अच्छी बखिया उधेड़ी। ऐसे में भारतीय टीम एक यादगार जीत की ओर बढ़ रही थी और अंततः भारत को एक रन प्रति ओवर के हिसाब से रन बनाने थे। लेकिन जैसे कि ही धवन आउट हुए वैसे ही “तू चल मैं आता हूं” कि तर्ज पर भारतीय बल्लेबाज बल्लेबाजी करने लगे और कुछ ही ओवरों के बाद धोनी और कोहली आउट हो गए। अब जैसे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज चुन-चुनकर शिकार कर रहे थे और भारतीय मध्यक्रम को धवस्त कर रहे थे। कोहली के आउट होने के बाद भी भारत को 65 गेंदों में 71 रनों की जरूरत थी और 6 विकेट अभी भी हाथ में थे। ये भी पढ़ें: डेविड वॉर्नर के बैट को चुराकर ऑनलाइन बेच रहा था यह शख्स!
लेकिन निचले मध्यक्रम में चोटिल अजिंक्य रहाणे की चोट ने उन्हें दगा दिया और हाथ में आठ टांके लगे होने के कारण वह अपनी ख्याति के अनुरूप बल्लेबाजी नहीं कर पाए और जल्दी ही पवेलियन लौट गए। खैर, रहाणे की स्थिति को देखते उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता। जाहिर है अगर रहाणे स्वस्थ होते तो मैच कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा होता। लेकिन निचले मध्यक्रम में गुरकीरत मान और रिषी धवन ने बेहद लचर प्रदर्शन किया और अपने विकेट फेंक कर चले आए। गुरकीरत ने रणजी ट्रॉफी में बढ़िया प्रदर्शन किया था और यही कारण था कि उन्हें टीम इंडिया में जगह दी गई थी। उन्हें टीम इंडिया में बतौर बैटिंग ऑलराउंडर चुना गया था। केनबरा में खेले गए मैच में उन्होंने नाथन ल्योन की गेंद पर एक बेहतरीन चौका लगाया। उस स्थिति में जरूरी था कि वह स्ट्राइक रोटेट करते और मैच को अगले ओवर तक ले जाते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और एक खराब शॉट खेलकर स्कवेयर लेग पर खड़े फील्डर को कैच दे बैठे। ये भी पढ़ें: सुरेश रैना की बेहतरीन बल्लेबाजी, उत्तरप्रदेश बना चैंपियन
वहीं बल्लेबाजी के दौरान रिषी में कोई भी आत्मविश्वास नजर नहीं आया। आता भी कैसे, कप्तान धोनी पहले प्रेस वार्ता में इसके बारे में हिंट भी कर चुके थे कि वह रिषी धवन को बल्लेबाज नहीं मानते। खैर रिषी के पास यह सुनहरा अवसर था कि वह अच्छी पारी खेलते और कप्तान धोनी को गलत साबित करते। गुरकीरत की तरह ही उन्होंने भी एक चौका लगाया और चलते बने। यहीं से भारतीय टीम की परेशानी दुगुनी हो गई और जो मैच अभी तक हाथ में नजर आ रहा था वह फिसल चुका था।
इस दौरान सिर्फ रविंद्र जडेजा धैर्य से बल्लेबाजी करते नजर आए, लेकिन अंतिम ओवरों में उनका रुख किसी भी तरह से स्वीकार करने वाला नहीं था। वह लगातार उमेश यादव को स्ट्राइक पर ला रहे थे जो गेंदों पर बीट हो रहे थे। ऐसे में जडेजा ने खुद जिम्मेदारी क्यों नहीं उठाई? और बड़े शॉट्स क्यों नहीं खेले? जडेजा और निचले मध्यक्रम में भारतीय बल्लेबाजों ने जितना निराश किया अगर इसकी तुलना पिछले कुछ सालों से की जाए तो यह सबसे निराशा वाला निचला मध्यक्रम नजर आता है।
भारतीय टीम अगले कुछ महीनों बाद टी20 विश्व कप में भाग लेगी। ऐसे में निचले मध्यक्रम में ऐसे बल्लेबाजों का होना बेहद जरूरी है जो सधकर खेलते हुए करारे प्रहार कर पाएं। ऐसे में भारतीय टीम में तीन पुराने सितारे निचले मध्यक्रम में मान, रिषी और जडेजा की जगह ले सकते हैं और ये तीनों सितारे हैं युवराज सिंह, सुरेश रैना और इरफान पठान। हाल ही में संपन्न हुई सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी में इरफान ने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल दिखाया है और भारतीय टीम में वापसी के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। वहीं युवराज सिंह भी ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज में अपना जलवा दिखाने के लिए तैयार हैं। वहीं रैना ने मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में जबरदस्त बल्लेबाजी करके अपनी वापसी का सुबूत दे दिया है। ऐसे में ओपनिंग में शिखर धवन, रोहित शर्मा, वन डाउन विराट कोहली, टू डाउन सुरेश रैना, थ्री डाउन युवराज सिंह और धोनी के बाद पठान भारतीय टीम में एक नई जान फूंक सकते हैं। अगर सब ठीक रहा तो एक बार फिर से इन तीनों की तिकड़ी भारतीय टीम में नजर आएगी। तब शायद भारतीय टीम को अंतिम ओवरों में धीमी और गैर-जिम्मेदाराना बल्लेबाजी की शिकायत ना हो।
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