सुरेश रैना का नाम जैसे ही जेहन में आता है तो एक ऐसे क्रिकेटर की छवि दिमाग में उभरती है जो मैदान के चारों ओर स्ट्रोक खेलता है। लेकिन आपको शायद पता ना हो कि सुरेश रैना का बचपन किसी महाभारत की लड़ाई की तरह गुजरा है। उनकी बचपन की कहानी को जानकर जरूर आप गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों के बारे में सोचने लगेंगे। बचपन की एक ऐसी ही घटना के बारे में जिक्र करते हुए सुरेश रैना ने अंग्रेजी अखबार को दिए साक्षात्कार में बताया था कि ट्रेन तेज रफ्तार से आगरा की तरफ बढ़ रही थी और रैना ट्रेन की फर्श पर अखबार बिछाकर सो रहे थे। चूंकि सर्दियों का मौसम था इसलिए वो ठंड से बचने के लिए अपने पैड, चेस्ट गार्ड और थाई पैड पहने हुए थे। उनके साथ 12 से 15 लड़के और थे जो उनके साथ आगरा में ही मैच खेलने जा रहे थे। ये भी पढ़ें: जानें, क्यों हवा में बैट उठाकर बल्लेबाजी करते थे माइक हसी?
देर रात रैना ने अपनी छाती पर वजन महसूस किया इसके पहले वह आंखें खोल पाते कि किसी ने उनका हाथ नीचे की ओर दबा दिया। जैसे कि उन्होंने आंखे खोली तो देखा उनकी छाती पर एक बड़ा सा बच्चा बैठा है और वह उन पर ही पेशाब करने लगा। कुछ देर हुई खींचतान के बाद ट्रेन थोड़ी धीमी हुई। इसी बीच उस शरारती लड़के को रैना ने ट्रेन से बाहर कर दिया। रैना बताते हैं, “एक घूंसा मारा और ट्रेन से बाहर भगा दिया।” रैना की उम्र उस वक्त 13 साल थी और वह उस समय लखनऊ के स्पोर्ट्स हॉस्टल में रहने के लिए बेहद जद्दोजहद से जूझ रहे थे। यह ट्रेन वाली हरकत रैना के साथ हॉस्टल में रहने के दौरान हो चुकी बेहद गंभीर हरकतों के बाद हुई थी। जिसकी वजह से रैना बहुत डर गए थे और हॉस्टल छोड़कर घर लौटने का मन बना लिया था। ये भी पढ़ें: क्या पाकिस्तान में क्रिकेट का पतन हो रहा है?
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यहां तक कि हॉस्टल में लड़कों से तंग आकर उन्होंने एक बार आत्महत्या करने तक की सोच ली थी। उन्हें हॉस्टल में दूसरे लड़के निशाना क्यों बना रहे थे इस संबंध में रैना ने बताया कि एथलेटिक्स ब्रांच के कुछ लड़के उनसे जलते थे क्योंकि उनपर क्रिकेट कोच बहुत ध्यान देते हैं और वे सोचते थे कि रैना जिंदगी में आगे बढ़ जाएगा। वे लड़के वहां पर हॉस्टल से सर्टिफिकेट लेने आए थे। ताकि चार साल के बाद सर्टिफिकेट लेकर वे रेलवे या अन्य जगह जहां स्पोर्ट्स कोटा लगता है से नौकरी प्राप्त कर सकें। हॉस्टल में आने के कुछ दिनों बाद परिस्थितियां और भी बुरी हो गईं। रैना कहते हैं, ” वे लोग दूध के बर्तनों में कूड़ा फेंक देते थे और हम दूध को छानने के लिए चुन्नी का इस्तेमाल करते थे। हड्डियां कपा देने वाली ठंडियों में रात के 3 बजे वे हम पर ठंडे पानी से भरी बाल्टी उड़ेल देते थे। मन करता था कि उठकर उनकी पिटाई कर दी जाए, लेकिन अगर आप एक मारते तो आप ज्यादा पिट सकते थे, क्या करें”
शाब्दिक रूप से ही वे लड़के रैना और उनके दोस्तों को परेशान नहीं करते थे बल्कि एक बार सुरेश रैना को हॉकी की स्टिक से भी उन्होंने मारा था। उनके बुरे बर्ताव से उनका एक बैचमेट इतना परेशान हो गया था कि वह लगभग कोमा में जाने वाला था। रैना बताते हैं, ” एक बार मेरा एक दोस्त उन लड़कों के बर्ताव से इतना परेशान हो गया था कि वह उनसे बचने के लिए छात्रावास के फ्लोर से ही कूदने वाला था। मैंने और मेरे दोस्त नीरज ने उसे जैसे तैसे मनाया और कहा, क्या कर रहे हो तुम? सबको मरवाओगे। सब कुछ बंद हो जाएगा। मैं इतना बदमान हो गया था कि पुलिस वहां रात को गश्त लगाती थी। वहां प्रतापगढ़, रायबरेली, गोरखपुर, आजमगढ़ से स्टूडेंट्स आते थे और वे सब रिवॉल्वर लेकर सोते थे। मैं उनके सामने अपना गुस्सा नहीं दिखा सकता था क्योंकि वे मुझे जान से मार सकते थे। और सब खत्म हो जाता” सुरेश रैना भले ही आज भारतीय टीम के बेहतरीन क्रिकेटर हों, लेकिन उन्हें अपने बीते दिन आज भी याद हैं। सुरेश रैना टी20 विश्व कप 2016 के लिए भारतीय टीम के सदस्य हैं।
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