टीम इंडिया © Getty
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एमएस धोनी के नेतृत्व में एक बार फिर से भारतीय टीम विश्वकप टी20 जीतने के लिए बेकरार है। हाल ही की सीरीजों और टूर्नामेंट में अगर भारतीय टीम के प्रदर्शन पर निगाह दौड़ाएं तो पता चलता है कि भारतीय टीम आजकल बेहतरीन फॉर्म में है। साथ ही विश्व कप भारतीय सरजमीं पर आयोजित  किया जा  रहा है उससे टीम को एक अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। टीम इंडिया के खिलाड़ी जो आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंटों में अपने धमाकेदार प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं उनके लिए टी20 विश्व कप अब तक कुछ खास नहीं रहा है। 2007 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट  का पहला टूर्नामेंट जीतने के बाद टीम इंडिया 2014  में उप- विजेता रही थी और इस बीच खेले गए तीन टी20 विश्व कप टूर्नामेंट में भारतीय टीम नॉकआउट तक भी नहीं पहुंच पाई थी। लेकिन इस बार भारतीय टीम पहले टूर्नामेंटों में खेलने के लिए गई टीमों के मुकाबले ज्यादा संतुलित नजर आती है। इस टीम में ऑलराउंडरों और बड़े हिटर बल्लेबाजों का अच्छा संतुलन मौजूद है। ऐसे में क्या भारत टीम एक बार फिर से टी20 का ताज अपने नाम कर पाएगी। आइए जानते हैं। ये भी पढ़ें: ट्विटर ने घोषित की टी-20 विश्व कप के लिए अपनी ‘ड्रीम एलेवन’

भारतीय टीम ने अपने पिछले 11 टी20 मैचों में 10 में जीत दर्ज की है जिसमें तीन टी20 सीरीजों में  लगातार फतह भी शामिल है।  लेकिन इसके बावजूद टीम इंडिया को शक्तिशाली दक्षिण अफ्रीका टीम से विश्व कप के वॉर्म अप मैच में हार का सामना करना पड़ा। वहीं इसके अलावा ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका ने इन सीरीजों में अपने मुख्य खिलाड़ी भारतीय टीम के खिलाफ नहीं उतारे थे और भारतीय टीम अपनी बेहतरीन टीम के साथ खेल रही थी।

वहीं तेज गेंदबाजी में विपल्पों को लेकर भी भारतीय टीम आशीष नेहरा और  जसप्रीत बुमराह के बाद घिरी नजर आती है। मोहम्मद शमी की फिटनेस अभी भी भारतीय टीम के लिए चिंता का सबब है। शमी चोटिल होने के पहले सीमित ओवरों की क्रिकेट में भारतीय टीम के मुख्य गेंदबाज थे। यही कारण था कि चोटिल होने के बावजूद उन्हें विश्व कप टी20 स्कवाड में सम्मिलित किया गया और यहां तक की वह वॉर्म अप मैचों में भी खेले, लेकिन टूर्नामेंट में पहुंचने से पहले उन्होंने कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला जो चिंता की बात है। अगर उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतिम एकादश में शामिल किया जाता है और आगे के मैचों में उनकी फिटनेस को लेकर फिर से परेशानी सामने आती है तो भारतीय टीम की रणनीति बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में फिर से बात भारतीय टीम की चौकड़ी(नेहरा, बुमराह, अश्विन और जडेजा) पर अटक जाती है।

हाल ही में भारतीय टीम के द्वारा जीती गईं सीरीजों का सबसे ज्यादा श्रेय भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को जाता है। लेकिन क्या ये चौकड़ी विश्व कप में अपने प्रदर्शन को जारी रख पाएगी? बुमराह ने शुरुआत में उन टीमों को बहुत परेशान किया था जिन्होंने उन्हें पहली बार खेला था, लेकिन अब अमूमन हर टीम उनके गेंदबाजी एक्शन को अच्छी तरह से पढ़ चुकी है और उनकी कमजोरी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वॉर्म अप मैच में साफ तौर पर नजर आई थी जब वह 4 ओवरों में 50 से ज्यादा रन देकर बेहद महंगे साबित हुए थे। ऐसे में बुमराह को अपनी गेंदबाजी को लेकर पहले ज्यादा संजीदा होना होगा। वहीं आशीष नेहरा अपनी लय में गेंदबाजी कर रहे हैं और अगर उन्हें एक बार फिर से शुरुआती ओवरों में अश्विन का साथ मिलता है तो दोनों कमाल कर सकते हैं।

भारतीय टीम की मजबूती पर अगर निगाह दौड़ाए तो पता चलता है कि टीम में इस बार ऑलराउंडरों की भरमार है यही कारण है कि टीम इंडिया इस बार बेहद संतुलित नजर आ रही है। भारतीय टीम के पास 7वें क्रम तक विशेषज्ञ बल्लेबाज हैं जो किसी भी परिस्थिति में मैच को रुख मोड़ने की क्षमता रखते हैं वहीं भारतीय उपमहाद्वीप की परिस्थितियों को देखते हुए गेंदबाजी के विकल्प भी भारतीय टीम में काफी संख्या में मौजूद हैं। वहीं टीम में कमजोरी की बात करें तो एक छोटी सी परेशानी जरूर नजर आती है। पिछले बहुत छोटे से समय में हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह टीम के मुख्य अंग बन गए हैं, लेकिन अगर ये दोनों खिलाड़ी अपना अच्छा प्रदर्शन करने में नाकामयाब होते हैं तो धोनी के पास उनकी जगह कोई विकल्प मौजूद नहीं हैं।

वहीं बल्लेबाजी में एक बार फिर से धोनी का भरोसा टॉप ऑर्डर में रोहित शर्मा और विराट कोहली पर टिका होगा। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली सीरीजों में जितनी बाार इन दोनों ने बढ़िया प्रदर्शन किया भारतीय टीम को फतह ही हासिल हुई है। ऐसे में अगर फिर से न्यूजीलैंड के खिलाफ इनका बल्ला चलता  है तो जाहिर तौर पर भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 क्रिकेट में पहली जीत हासिल कर पाएगी और विश्व कप का आगाज एक बड़ी जीत से कर पाएगी।