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1 रुपये की कंपनी से Team India संग 579 करोड़ के कॉन्ट्रेक्ट तक, अपोलो टायर्स की हैरतंगेज कहानी
अपोलो टायर्स को टीम जर्सी स्पॉन्सर के तौर पर जोड़ने की घोषणा बीसीसीआई ने की है, जो ड्रीम 11 से करीब 200 करोड़ रुपये ज्यादा देगी.
Published On Sep 16, 2025, 11:04 PM IST
Last UpdatedSep 16, 2025, 11:04 PM IST
सफलता के पंख लगाकर उड़ रहा टीम इंडिया का विमान अब अपोलो टायर पर टेकऑफ करेगा. बीसीसीआई (BCCI) ने मंगलवार को Dream11 की जगह अपोलो टायर्स (Apollo Tyres) को टीम इंडिया का नया जर्सी स्पॉन्सर बनाने की घोषणा कर दी है. टीम इंडिया फिलहाल यूएई में चल रहे एशिया कप 2025 में बिना किसी प्रायोजक के नाम वाली जर्सी में खेल रही है. अपोलो टायर्स के साथ भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने 3 साल का कॉन्ट्रेक्ट किया है, जिसके बदले अपोलो टायर्स उसे 579 करोड़ रुपये की मोटी रकम देगी. अपोलो टायर्स की सक्सेस स्टोरी (Apollo Tyres Success Story) बहुत अनूठी है. शायद आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि अपोलो टायर्स की हालत एकसमय इतनी खराब थी कि उसके मालिक महज 1 रुपये में कंपनी बेचने के लिए तैयार थे. हालांकि कंपनी उन हालात से उबरी और आज मार्केट में करीब 31 हजार करोड़ रुपये की हैसियत रखती है. चलिए बताते हैं आपको इस कंपनी की कहानी.
‘शरणार्थी’ ने बनाई हजारों करोड़ की कंपनी
अपोलो टायर्स के फाउंडर सरदार रौनक सिंह थे, जिन्हें आजादी के समय हुए बंटवारे के कारण सियालकोट में अपना सबकुछ छोड़कर शरणार्थी की हैसियत में भारत आना पड़ा था. सियालकोट अब पाकिस्तान में है. रौनक सिंह ने भारत आकर नए सिरे से शुरुआत की. उन्होंने पाइप का बिजनेस शुरू किया. इसके अलावा भी कई बिजनेस किए. साल 1972 में उन्होंने टायर निर्माण के सेक्टर में उतरने की तैयारी की और अपोलो टायर्स की नींव रखी गई. आज अपोलो टायर्स की नेटवर्थ करीब 31,099 करोड़ रुपये आंकी जाती है.
नेशनलाइजेशन में फंस गई कंपनी
अपोलो टायर्स की शुरुआत के फौरन बाद रौनक सिंह तब संकट में फंस गए, जब केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों, बैंकों का नेशनलाइजेशन शुरू किया यानी सरकार ने उन्हें टेकओवर करना शुरू कर दिया. इसके चलते देश में Coca Cola और IBM जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों को भी अपना बिस्तर समेटकर वापस भागना पड़ा. अपोलो टायर्स की कर्मचारी यूनियन ने भी कंपनी को सरकार के हवाले कराने के लिए आंदोलन शुरू करा दिया.
कंपनी तो मिली, लेकिन गरीबी के साथ
रौनक सिंह कंपनी का राष्ट्रीयकरण किए जाने के खिलाफ कोर्ट में गए और वहां से मुकदमा जीतकर अपोलो टायर्स का मालिक बने रहने का हक हासिल किया. हालांकि उन्हें कंपनी तो वापस मिल गई, लेकिन वे भारी ‘कंगाली’ में फंस गए. दरअसल लंबे समय तक चली यूनियन की हड़ताल के कारण कंपनी भारी घाटे में चली गई. कंपनी की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्होंने इसे महज 1 रुपये में बेचने का फैसला कर लिया. हालांकि इस सदमे से उबरकर उन्होंने दोबारा कंपनी की हालत को मजबूत किया और आज यह हजारों करोड़ की हैसियत रखती है.
बीसीसीआई को मिलेगी पहले से ज्यादा रकम
बीसीसीआई की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, अपोलो टायर्स का टीम इंडिया के साथ कॉन्ट्रेक्ट ड्रीम11 के मुकाबले करीब 200 करोड़ रुपये ज्यादा रकम में हुआ है. ड्रीम11 ने 2.5 साल के लिए बीसीसीआई से 358 करोड़ रुपये में सौदा किया था, लेकिन इसके बाद से टीम इंडिया ने जहां टी20 वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी में खिताब जीते हैं, वहीं वनडे वर्ल्ड कप के भी फाइनल तक पहु्ंची है. इसके चलते टीम की फैन फॉलोइंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. यही कारण है कि अपोलो टायर्स को मार्च 2028 तक की इस डील के लिए करीब 579 करोड़ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं.
हर मैच के कितने रुपये देगी अपोलो टायर्स
- 4.5 करोड़ रुपये टीम इंडिया के हर मैच के लिए बीसीसीआई को देगी अपोलो टायर्स
- 4 करोड़ रुपये की रकम दे रही थी ड्रीम 11 इससे पहले हर मैच के लिए
- 121 द्विपक्षीय मैच और 21 आईसीस टूर्नामेंट के मैच खेले जाएंगे इस दौरान
- 1+1 के ऑफर के तहत महिला टीम की जर्सी पर भी लगेगा अपोलो टायर्स का लोगो
- 3.5 करोड़ रुपये द्विपक्षीय मैच और 1.5 करोड़ रुपये का बेस प्राइस ICC टूर्नामेंट मैच के लिए रखा था BCCI ने