आपको विश्वास नहीं होगा कि कैसे महेंद्र सिंह धोनी एक बढ़िया विकेटकीपर बने
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बचपन से महेंद्र सिंह धोनी ने कभी भी क्रिकेटर बनने के बारे में नहीं सोचा था। यहां तक की वह टीवी में भी क्रिकेट बहुत कम ही देखते थे। ना ही वह अपने साथ रात को बैट लेकर सोए और ना ही किसी क्रिकेटर की नकल की। क्रिकेट बस उनके जेहन में उतर गया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वर्तमान में विश्व के चुनिंदा विकेटकीपरों में से एक महेंद्र सिंह धोनी ने विकेटकीपर बनने के लिए कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया। बहुत से लोग जानते हैं कि वह बचपन में फुटबॉल खेलते थे और वह उस खेल में गोल कीपर की भूमिका निभाते थे। लेकिन आपको बता दें कि इसका इस बात से कोई लेना- देना नहीं है कि वह कैसे क्रिकेट के एक बेहतरीन विकेटकीपर बने। बल्कि, उन्होंने कैसे क्रिकेट विकेटकीपिंग सीखी, आप जानकर भौंचक्के रह जाएंगे।

This is how MS Dhoni become pro at wicket keeping
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एम एस धोनी विकेटकीपर कैसे बने इसके बारे में उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था, उन्होंने कहा था, “मेरे एक सीनियर अपनी बाइक मेरे ठीक पीछे पार्क किया करते थे। वह बाइक खस्ताहाल थी, उस समय मैं 16 साल का था और बाईक को चलाने के लिए मैं बेकरार था। इसलिए सीनियर को प्रभावित करने के लिए मैं अपने यहां से एक भी गेंद को निकलने नहीं देता था ताकि मुझे बाइक चलाने का मौका मिल जाए। मैंने गेंद को रोकने के लिए कई प्रयास किए जिसके बाद से मुझे इसमें दिलचस्पी आने लगी और इस तरह इस विधा में मैं अच्छा बन गया। दो साल के बाद उन्होंने अंततः मुझे बाइक चलाने की अनुमति दी।” 

यह बताता है कि अगर आपमें किसी चीज को पाने की कसक हो तो आपके द्वारा किया गया प्रयास आपको उस चीज के पास ले ही जाता है। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एम एस धोनी की बाईक को लेकर दीवानगी उन्हें टीम इंडिया का एक खिलाड़ी नहीं बल्कि महान कप्तान बना देगी। धोनीअक्सर अपने शुरुआती दिनों में टीम इंडिया की जीत के बाद किसी भी खिलाड़ी को पुरुस्कार में मिलने वाली बाईको को मैदान पर दौड़ाते नजर आते थे। धोनी बाईक्स को लेकर बहुत संजीदा हैं और उनकी संजदगी अक्सर मैदान पर झलकती नजर आ ही जाती है।