दिल्ली की धुंध के बीच एक बालक क्रिकेट खेलता हुआ © Getty Images
दिल्ली की धुंध के बीच एक बालक क्रिकेट खेलता हुआ © Getty Images

दिवाली के बाद से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में धुंध छाई हुई है। वैसे इसका असर जनजीवन पर तो पड़ ही रहा है। साथ ही इस धुंध की वजह से राजधानी में 5 नवंबर से आयोजित किए जा रहे दो रणजी मैचों के पहले दिन का खेल पूर्णतः प्रभावित रहा और दिन में एक गेंद भी नहीं फेंकी जा सकी। रणजी ट्रॉफी के पांचवें राउंड में बंगाल को गुजरात के साथ फिरोजशाह कोटला में खेलना है तो त्रिपुरा और हैदराबाद को करनाल सिंह मैदान पर खेलना है। लेकिन खराब रौशनी के कारण आज सुबह ही टीमों के कप्तान देरी से टॉस करवाने के लिए मैदान पर पहुंचे, लेकिन जब धुंध के कारणों आंखें मिचमिचाने लगींतो दोनों मैदानों के मैच रेफरियों ने कप्तानों और अंपायरों से सलाह मशविरा करके टॉस न करने का निर्णय ले लिया।

मनोज तिवारी जो मास्क लगाए नजर आए। अंपायरों ने मैदान के दिन में ये देखने के लिए कई चक्कर लगाए कि धुंध छटी है क्या लेकिन उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी। लगभग 4 बजे शाम को खराब रौशनी और धुंध के कारण बिना टॉस करवाए ही दिन का खेल खत्म करने का निर्णय लिया। करनाल सिंह स्टेडियम में अंपायरों ने पाया कि कुछ समय के लिए रौशनी मैदान में बढ़ी थी लेकिन मैदान के बाहर का माहौल जस का तस रहा इसलिए उन्होंने सोचा कि इससे खेल को ही नुकसान होगा और उन्होंने खेल शुरू नहीं करवाया।

बंगाल के खिलाड़ियों को मैदान में मास्क पहने देखना किसी सदमे से कम नहीं था। वह ड्रेसिंग रूम से मास्क पहने नजर आए और टीम की बस में मास्क पहने ही चले गए। बंगाल के कप्तान मनोज तिवारी ने कहा, “हम पिछले दो दिन से दिल्ली में हैं और प्रेक्टिश कर रहे थे लेकिन इस दौरान हम धुंध नहीं दिखी। लेकिन आज प्रेक्टिश करने के बाद सभी खिलाड़ियों ने आंखों में जलन की शिकायत की। जब पार्थिव पटेल और मैं टॉस के लिए गए तब भी रौशनी बहुत कम थी।” उन्होंने आगे कहा, “यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया कि टॉस न करवाया जाए।” खिलाड़ियों ने सुबह ही टीम मैनेजमेंट से मास्क लाने के लिए कहा था क्योंकि धुंध के कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।

गुजरात- बंगाल मैच के मैच रेफरी पी. रंगनाथन ने कहा कि बीसीसीआई को परिस्थिति के बारे में बता दिया गया है। उन्होंने कहा, “हम कुछ नहीं कर सकते। यह किसी के भी नियंत्रण में नहीं है। हम सिर्फ उम्मीद कर सकते हैं कि यह कल तक साफ हो जाए।” अंततः मनोज तिवारी ने दिवाली के पटाखों के द्वारा प्रदूषण को बढ़ाने को लेकर बात कह ही दी। उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसे ही पटाखे फोड़ते रहेंगे और प्रदूषण बढ़ाते रहेंगे तो हमें तकलीफें झेलनी होंगी। लोगों को इस पर ध्यान देना चाहिए।”

मनोज तिवारी इस कड़ी में पहले क्रिकेटर नहीं हैं जिन्होंने दिवाली के पटाखों को लेकर चिंता व्यक्त की है बल्कि इसके पहले गौतम गंभीर ने भी ट्वीट के माध्यम से दिल्ली के लोगों को झाड़ा था। गंभीर लिखते हैं, “पटाखे फूट रहे हैं, दिल्ली का प्रदूषण रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है, बच्चों और बूढ़ों को तकलीफ हो रही है, फेफड़े रो रहे हैं और हम इसे हैप्पी दिवाली कहते हैं। कठोर और लापरवाह।” इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया, “अधिकारियों पर दोष मढ़ना आसान है लेकिन स्वशासन का क्या? कौन सी विरासत हम छोड़ रहे हैं। प्रदूषित हवा और पानी, मिलावटी खाना।”

दिल्ली में प्रदूषण तेजी से बढ़ने के कारण पूरे दिन 1800 स्कूल बंद रहे। माना जा रहा है कि पूरे दिन प्रदूषण का स्तर सेफ लिमिट से 12 गुना ज्यादा रहा। जो अपने आपमें डराने वाला है। जाहिर है कि लोगों को इस बात को समझने की जरूरत है कि पटाखे फोड़कर वह खुद के व खुद के और पूरी मानव सभ्यता के लिए गड्ढा खोद रहे हैं। जाहिर है कि वातावरण को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों को धर्म से कतई नहीं जोड़ा जाना चाहिए। तभी जाकर हम और आप एक स्वच्छ और साफ जीवन का निर्वहन कर पाएंगे। वरना, अगर ऐसा ही चलता रहा तो हो सकता है कि अगले सालों में स्थिति इतनी विकराल हो जाए कि राष्ट्रीय राजधानी में धुंध के कारण ठंडिया में एक मैच भी न खेले जा सकें। गौर करें कि यह सिर्फ मैच की बात नहीं है बल्कि मानव सभ्यता के सृजन की बात है जिसे हम सबको मिलकर फलना और फुलाना है।