रणजी ट्रॉफी में विदर्भ और महाराष्ट्र के बीच मैच खेला जा रहा है © Getty Images
रणजी ट्रॉफी में विदर्भ और महाराष्ट्र के बीच मैच खेला जा रहा है © Getty Images

भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक ऐसा तेज गेंदबाज तैयार हो रहा है जो आने वाले समय में टीम इंडिया में स्थान बनाने को लेकर दावेदारी प्रस्तुत करने को तैयार है। ललित यादव एक तेज गेंदबाज हैं और उनके हाई आर्म एक्शन से उन्हें पिच से उछाल लेने में मदद मिलती है। जब वह गेंद डालते हैं तो वह पहले पैर का घुटना सीधा रखते हैं जिसके कारण उन्हें गेंद को और भी तेजी से फेंकने में मदद मिलती है। 21 साल के ललित कैसे क्रिकेट के प्यार में पड़ गए इसकी कहानी काफी दिलचस्प है। वह विदर्भ के तेज गेंदबाज उमेश यादव की तरह ही सबसे तेज रफ्तार से गेंदें फेकना चाहते हैं।

इस सीजन में वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया है। उन्होंने इस सीजन की शानदार शुरुआत की है और बल्लेबाजों को खूब छका रहे हैं। हाल ही में उन्होंने महाराष्ट्र के खिलाफ मैच में 23 ओवरों की गेंदबाजी में 5/81 के साथ धमाका मचा दिया। यह एक सुस्त पिच थी। इसके बावजूद उनकी स्पीड 137 किमी/घंटा के आसपास रही। ललित के कोच पारस महाम्ब्रे का कहना है कि वह जल्दी ही 140किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेगा। ललित कभी भाला फेंक खिलाड़ी हुआ करते थे। वह कहते हैं कि उनके गठीले शरीर का राज उनके द्वारा भाला फेंकना है। उन्होंने एज- ग्रुप में स्टेट एथलेटिक्स में भाला फेंक के लिए पनवेल की ओर से खेला था। वह कहते हैं, “मैंने जिला स्तर ट्रायल पर अच्छा प्रदर्शन किया था। मैं विदर्भ की ओर से भी जूनियर स्टेट बैडमिंटन चैंपियनशिप में खेला। मैं एक क्रिकेट अकादमी में नागपुर में खेला करता था लेकिन कभी नहीं सोचा था कि मैं क्रिकेटर बनूंगा।” [ये भी पढ़ें: एलिस्टेयर कुक का चक्रव्यूह टीम इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती]

ललित ने हंसराज जोनल टूर्नामेंट में बैडमिंटन सिगल्स में स्वर्ण पदक जीता था। ललित को इस दौरान प्राइज स्वर्गीय हेमंत करकरे ने दिया था। हेमंत करकरे मुंबई एंटी- टेररिस्ट स्क्वाड(एटीएस) के पूर्व चीफ थे। वह 2008 मुंबई हमलों के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। अगर आज वह जिंदा होते तो वह ललित की क्रिकेट में उपलब्धियों को देखकर खुश होते।

कुछ इंटर क्लब कंपटीशनों ने ललित के करियर को पूरी तरह से मोड़ दिया। वह मजे के लिए गेंदबाजी किया करते थे, लेकिन उन्होंने इस दौरान इतना अच्छा प्रदर्शन जरूर किया कि उनका चयन विदर्भ अंडर-16 टीम के लिए हो गया। इसके बाद उन्हें सीधे स्टेट क्रिकेट अकादमी में सम्मिलित कर लिया गया। ललित की उम्र उस समय 15 साल थी। ललित कहते हैं, “जबसे मैं क्रिकेट में आया तबसे मैं हमेशा सबसे तेज गेंदबाजी करना चाहता था। किसी का प्रभाव नहीं था। मैंने मजे के लिए तेज गेंदबाजी करनी शुरू की।

मैंने अकादमी में सुब्रतो बनर्जी के अंडर में अकादमी में बेसिक्स सीखे और अब पारस सर मुझे तेज गेंदबाज के रूप में तैयार कर रहे हैं। कभी कभार उमेश भाई अकादमी में आते हैं और मदद करने के साथ सुझाव भी देते हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अनुशासन बहुत जरूरी है। मैं चीजों को सीख रहा हूं।” ललित मुख्य रूप से आउटस्विंग गेंदबाज हैं लेकिन जब गेंद पुरानी हो जाती है तो वह रिवर्स स्विंग भी कराने में माहिर हैं। ललित कहते हैं, “मैं नई गेंद के साथ आउटस्विंग फेंकता हूं। यह मेरी स्टॉक बॉल है। अगर मुझे कटर फेंकनी है तो मैं उसे सीम पर फेंकता हूं।” जाहिर है कि अगर अगले समय में ललित और भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो उनकी टीम इंडिया में जगह बन जाए तो इसमें कोई दो राय नहीं है।