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रांची में विराट कोहली की छलांग ने लिखी जोश, जज्बे और जुनून की कहानी

विराट कोहली ने गेंंद ही बाउंड्री पार नहीं पहुंचाई थी बल्कि उन चंद सवालों को भी हाशिए पर कर दिया था जो उन्हें लेकर उठ रहे थे. कोहली भले ही एक फॉर्मेट खेल रहे हैं. लेकिन वनडे क्रिकेट के वह बेताज बादशाह हैं. असली किंग हैं.

user-circle cricketcountry.com Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - December 1, 2025 3:24 PM IST

विराट कोहली ने 99 के स्कोर पर मार्को यानसन की गेंद डीप थर्डमैन की दिशा में टैप किया. और फिर वह हुआ जिसका इंतजार लाखों-करोड़ों आंखें कर रही थीं. कोहली का शतक पूरा हो गया. विराट ने हवा में छलांग लगाई. छलांग जोश, जुनून और संतुष्टि की. कोहली कई बार 100 के पार गए हैं. वनडे में किसी से भी ज्यादा. रविवार को रांची में साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगाई इस सेंचुरी से पहले 51 बार. लेकिन यह रात कुछ अलग थी. इस बार माहौल अलग था. पहले से ज्यादा कोहली की जरूरत पर चर्चा शायद ही हुई हो.

शतक के बाद कोहली ने हवा में मुक्का मारा. यह जुनूनी कोहली का सिग्नेचर है. यही वह कोहली थे जिसे टीम इंडिया काफी वक्त से खोज रही थी. जिसका इंतजार दर्शक कर रहे थे. दो फॉर्मेट छोड़ चुके कोहली लौट रहे थे. अपनी लय में, अपने रंग में, अपने मिजाज में और अपने पुराने जाने-पहचाने अंदाज में. आखिर में कोहली ने हेलमेट उतारकर गले में चेन के साथ बंधी शादी की अपनी अंगूठी को चूमा. जैसा वह हर बार करते हैं. यह कोहली का स्टाइल है. और इसी कोहली का इंतजार दर्शक कर रहे थे.

कोहली के इसी जज्बे का था इंतजार


यह कोहली के बल्ले से निकला 52वां वनडे शतक था. विराट अब क्रिकेट की रोजमर्रा की दौड़ से दूर रहते हैं. अपने ककून में. न वह टेस्ट खेलते हैं और न ही टी20 इंटरनेशनल. साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीत के बाद उन्होंने साफ भी कर दिया कि वह सिर्फ वनडे खेलेंगे. फैंस निराश हुए होंगे. लेकिन 37 साल के कोहली जानते हैं कि उनके लिए क्या बेहतर है. वह कहां 120 फीसदी योगदान दे सकते हैं. वह वहां खेलना चाहते हैं जहां अपना बेस्ट दे सकें. और कोहली अपना बेस्ट दे रहे थे. बल्लेबाजी में और फिर फील्डिंग में. कोहली ने 135 रन की पारी के एक तिहाई से ज्यादा रन दौड़कर बनाए. एक बार तो ऐसा हुआ कि वह तीसरे रन के लिए दौड़ने को तैयार थे तो रोहित शर्मा ने हाथ उठाकर रोका. इस उम्र में भी वह मैदान पर सबसे फिट थे. इसके बाद फील्डिंग में भी बाउंड्री पर दौड़कर गेंद रोकनी हो या क्लोजिंग फील्ड में चपलता दिखानी हो, विराट वहीं थे.

शतरंज की तरह क्रिकेट खेले विराट


विराट जब बल्लेबाजी करने आए तो साउथ अफ्रीका का प्लान साफ रहा. उन्हें स्ट्राइक बदलने से रोको. फील्ड आगे करो और रनों पर लगाम लगाओ. लेकिन वनडे की पारी को कैसे सजाना, संवारना और गढ़ना है इस बात को विराट बेहतर जानते हैं. उन्होंने साउथ अफ्रीका को वक्त दिया. खुद को भी. मौके मिले तो बड़े शॉट लगाए लेकिन गेंद-दर-गेंद पारी को किसी इमारत की तरह तैयार करने में लगे रहे. और शतक पूरा करने के बाद उन्होंने रफ्तार पकड़ी. 102 गेंद पर सेंचुरी पूरी करने के बाद 120 गेंद पर 135 रन बनाए. मौके की नजाकत और पारी की बनावट, विराट के दिमाग में नक्श हो जाती है. वह क्रिकेट को शतरंज की तरह खेलते हैं. और उसी तरह चाल चलते हैं.

कोहली की पारी का टीम इंडिया पर असर

कोहली की पारी एक सबक थी कि वनडे में शतक कैसे बनाया जाता है. वनडे टी20 क्रिकेट नहीं है जहां हर गेंद पर जाते ही आक्रामक होने की जरूरत है. और न ही टेस्ट क्रिकेट जहां बल्लेबाजी में बिलकुल ही रक्षात्मक हुआ जाए. यह संतुलन है. जिसमें रन और पारी दोनों साथ बनाये जाते हैं.

कोहली की इस पारी का टीम इंडिया पर भी बहुत सकारात्मक असर होगा. साउथ अफ्रीका से टेस्ट सीरीज में 0-2 से हारने के बाद टीम आलोचकों के निशाने पर है. मनोबल टूटा हुआ. लेकिन विराट जिस अंदाज में खेलते हैं, जो ऊर्जा लेकर वह टीम में आते हैं वह सभी में जोश भर देती है. खास तौर पर दर्शकों में. कोहली की उस छलांग के वक्त रोहित शर्मा, गौतम गंभीर और साथी खिलाड़ी सभी तालियां बजाकर अभिवादन कर रहे थे. लेकिन करोड़ों लोग, जो उन्हें मैदान पर राज करते देखने के आदी हो चुके हैं, भी जज्बाती थे.

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सभी सवालों के मिले जवाब?

वर्ल्ड कप 2027 को लेकर संशय बना हुआ है. क्या विराट उसमें खेलेंगे? यह बड़ा सवाल है. पर रविवार को जिस तरह से कोहली ने शतक लगाया है वह कमाल है. फिटनेस पर कोई सवाल नहीं. भले ही उनका करियर अब अपने अंतिम चरण में है. लेकिन, इस उम्र के रहे किसी भी अन्य क्रिकेटर से बेहतर हैं. रविवार को उन्होंने उन सभी सवालों- फिटनेस, फॉर्म और एटिट्यूड- के जवाब दिए. और वह ऐसा करते रहें, इसी में टीम इंडिया का हित है. एक फॉर्मेट खेलने के बाद भी कोहली पर दबाव है. लेकिन इन सभी को दरकिनार कर वह जिस तरह से मैदान पर उतरते है, वह कमाल है.