महेंद्र सिंह धोनी ने सीमित ओवरों की कप्तानी से इस्तीफा दिया  © AFP (File Photo)
महेंद्र सिंह धोनी ने सीमित ओवरों की कप्तानी से इस्तीफा दिया © AFP (File Photo)

टीम इंडिया के सीमित ओवरों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सभी को चैंकाते हुए कप्तानी से इस्तीफा दे दिया है। धोनी ने ये इस्तीफा इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे सीरीज से ठीक पहले दिया है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या धोनी कप्तानी से इस्तीफा देने के लिए सीरीज खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते थे। आखिर क्या वजह रही कि धोनी ने सीरीज शुरू होने से पहले ही धोनी ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। क्या धोनी पर कप्तानी छोड़ने का दबाव था। क्या धोनी पर कप्तानी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। क्या कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया के बेहतरीन प्रदर्शन से धोनी को डर सताने लगा था। धोनी ने टेस्ट सीरीज की कप्तानी भी बीच ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ही छोड़ दी थी और विराट कोहली को टीम की कमान सौंपी गई थी। आइए इन्हीं सवालों के जवाबों को तलाशने की कोशिश करते हैं।

क्या धोनी पर कप्तानी छोड़ने का दबाव बन रहा था: विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय जिस तरह से खेल दिखा रही थी उसके बाद समय-समय पर धोनी और कोहली की कप्तानी की तुलना की जाने लगी थी। रह रहकर ये कहा जाने लगा था कि अब धोनी को कप्तानी से इस्तीफा दे देना चाहिए और विराट कोहली को भारतीय टीम के हर फॉर्मेट की कमान अपने हाथ में ले लेनी चाहिए। कोहली ने जब से टेस्ट कप्तानी संभाली थी तब से ही भारतीय टीम के खेल में निखार आ गया और टीम ने कोहली की कप्तानी में एक भी सीरीज नहीं गंवाई। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ काफी अर्से बाद जब धोनी ने टीम की कमान संभाली तो भारत ने मुश्किल से कीवी टीम को 3-2 के अंतर से सीरीज हराई। साफ है धोनी की कप्तानी को लेकर सवाल और तल्ख हो चले थे और कई पूर्व कप्तानों ने भी धोनी की जगह कोहली को कप्तानी की वकालत कर दी थी। ये भी पढ़ें: एमएस धोनी ने वनडे और टी20I की कप्तानी से दिया इस्तीफा

आईसीसी ने भी अपनी टीम का कप्तान कोहली को बनाया था: वहीं हर साल की तरह जब आईसीसी ने साल 2016 की अपनी टीम घोषित की तो उसका कप्तान कोहली को बनाया गया और धोनी को टीम में शामिल तक नहीं किया गया। साफ है आईसीसी भी इस तरफ इशारा कर चुका था कि अब धोनी का दौर खत्म हो चुका है और कोहली के युग की शुरुआत हो चुकी है। आईसीसी की 2016 की टीम में धोनी को जगह ना मिल पाना और कोहली को कप्तान बनाया जाना इस बात का साफ संकेत था कि धोनी ने हाल-फिलहाल कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसके कारण उन्हें वरीयता दी जाए।

प्रदर्शन में भी आ रही थी गिरावट: धोनी वैसे तो बहुत धुरंधर बल्लेबाज हैं। लेकिन साल 2016 में उनका बल्ला खामोश ही रहा। टेस्ट को पहले ही अलविदा कह चुके धोनी ने साल 2016 में 13 वनडे मैचों में शिरकत की, इस दौरान उन्होंने 10 पारियों में 27 के बेहद मामूली औसत के साथ महज 278 रन ही बनाए। वहीं धोनी के बल्ले से इस दौरान सिर्फ एक ही अर्धशतक निकला।

वहीं इसके उलट कोहली के बल्ले से लगातार रन निकल रहे थे और वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे। साल 2016 में कोहली के प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने इस साल 10 मैचों की 10 पारियों में 92 की बेहतरीन औसत के साथ 739 रन बनाए। वहीं उनका स्ट्राइक रेट 100 का रहा। कोहली ने इस दौरान 4 अर्धशतक और 3 शतक लगाए। कोहली का सर्वोच्च स्कोर 154 पर नाबाद रहा। साफ है जहां धोनी के बल्ले से रन निकलने बंद हो गए थे तो दूसरी तरफ कोहली का बल्ला आग उगल रहा था।

क्या धोनी को कप्तानी से हटाए जाने का डर सता रहा था: इस बात से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि धोनी को कप्तानी से हटाए जाने का डर नहीं सता रहा था। विछले कुछ सालों में धोनी के फैसलों और उनकी रणनीति संका के गलियारे में रहीं हैं। कभी भारत के लिए किस्मत के धनी माने जाने वाले धोनी भारतीय प्रशंसकों और क्रिकेट पंडितों की आंखों में खटकने लगे थे। जहां टेस्ट में भारतीय टीम पहले पायदान पर काबित हो रही थी तो वनडे में उसकी रैंकिंग ज्यादा अच्छी नहीं थी। ऐसे में किसी भी कप्तान के मन में डर बैठ जाना लाजमी है। जहां एक तरफ कोहली की कप्तानी में टीम नित नए कीर्तिमान रच रही थी तो धोनी की कप्तानी में भारत को बमुश्किल जीत मिल पा रही थी। ऐसे में कोहली की कामयाबी का दबाव धोनी के ऊपर साफ देखा जा सकता था।