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मोहाली टेस्ट के लिए रिद्धिमान साहा की जगह पार्थिव पटेल टीम में शामिल।

रणजी ट्रॉफी ने हर साल कुछ नए और प्रतिभावन खिलाड़ी देखने को मिलते हैं जो अपने प्रदर्शन के भारतीय टीम में दस्तक देते हैं। अभी रणजी ट्रॉफी 2016-17 का सातवां राउंड चल रहा है और इस साल भी ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिनका प्रदर्शन उम्दा रहा है। लेकिन इसमें से एक नाम है जो बार बार सुनने को मिल रहा है, यह नाम है दिल्ली के विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत का। रिषभ रणजी में दिल्ली की तरफ से पांच मैच खेल चुके हैं जिसमें उन्होंने 799 रन बनाए हैं। वहीं राउंड सात में राजस्थान के खिलाफ खेले जा रहे मैच की पहली पारी में शिखर धवन, गौतम गंभीर और उन्मुक्त चंद के आउट होने के बाद रिषभ ने  75 रनों की अहम पारी खेली और टीम का स्कोर 307 तक पहुंचाया। इतने अच्छे प्रदर्शने के बाद भी चयन कर्ताओं की नज़र शायद अब तक रिषभ पर नहीं पड़ी इसलिए रिद्धिमान साहा के चोटिल होने के बाद पार्थिव पटेल को मोहाली टेस्ट के लिए टीम में शामिल किया गया है। कई फैन्स ने सोशल मीडिया पर चयन समिति के इस फैसले का विरोध भी किया है। अब हम यहां जानने कि कोशिश करेंगे कि आखिर क्यों रिषभ पंत को भारतीय टीम में नहीं शामिल किया गया। ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड, टेस्ट सीरीज: मोहाली टेस्ट के लिए रिद्दिमान साहा की जगह पार्थिव पटेल टीम में शामिल

सबसे पहले हम पार्थिव पटेल के बारें में बात करेंगे, पार्थिव पटेल ने अपना टेस्ट डेब्यू 2002 में भारत के इंग्लैंड दौरे पर खेले गए दूसरे टेस्ट में किया था। पार्थिव इस मैच में शून्य पर आउट हो गए थे। उस समय भारतीय टीम में कई विकेटकीपर थे मगर कोई भी फुलटाइम कीपर की जिम्मदारी नहीं संभाल पा रहा था। इस दौरे पर भी पार्थिव के साथ अजय रात्रा भी थे और चार मैचों की इस सीरीज में दोनों ने दो दो मैचों में भारत के लिए कीपरिंग की थी। इस दौरे के बाद पार्थिव और दिनेश कार्तिक को कीपर की भूमिका दी गई। पटेल ने 2004 से 2008 तक कार्तिक के साथ मिलकर कई मैचों में भारत के लिए कीपरिंग की। वहीं 2005 में महेंद्र सिंह धोनी के टेस्ट डेब्यू के बाद भारतीय टीम की फुलटाइम विकेटकीपर की तलाश खत्म हो गई। धोनी ने टेस्ट में विकेट के पीछे और आगे दोनों ही जिम्मेदारियां बखूबी संभाली। वहीं 2014 में अचानक धोनी के संन्यास लेने के बाद विकेटकीपर का स्थान फिर से खाली हो गया लेकिन पार्थिव को इसके लिए नहीं चुना गया। उनकी जगह एक युवा खिलाड़ी रिद्धिमान साहा को मौका दिया गया। पार्थिव ने 2008 में भारतीय टेस्ट टीम की तरफ से अपना आखिरी टेस्ट मैच श्रीलंका दौरे पर खेला था। इसके बाद से पार्थिव पटेल ने कभी भारतीय टेस्ट टीम के लिए कीपरिंग नहीं की। अब अचानक आखिर क्यों आठ साल बाद चयनकर्ताओं को उनकी याद आई। ये भी पढ़ें: भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने खोला अपनी फिटनेस का राज

पहले हम आपको यह बताते हैं कि इन आठ सालों में पटेल ने किया क्या। पटेल ने भारतीय टीम से बाहर होने के बाद घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा। दिलीप ट्रॉफी में इंडिया ग्रीन की तरफ से खेलते हुए पटेल ने दो मैचों में 109 रन बनाए और चार कैच पकड़े, वहीं उनका सर्वाधिक स्कोर 55 था। इस साल रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 403 रन के साथ 12 कैच भी लिए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पार्थिव का औसत 43.91 का है जो टेस्ट में घटकर 29.67 हो जाता है। अगर हम इसकी तुलना रिषभ से करें तो उन्होंने रणजी में 90.70 की औसत से पांच मैचों में 799 रन बनाए हैं और 12 कैच भी लिए हैं। रिषभ रन और औसत दोनों के मामले में पटेल से कहीं आगे हैं अगर वह किसी बात में उनसे पीछे हैं तो वह है अनुभव। ये भी पढ़ें: पांच टेस्ट मैच जब 250 से भी ज्यादा रनों से जीती टीम इंडिया

पटेल अब तक दस टेस्ट मैच खेल चुके हैं वहीं रिषभ ने अभी टेस्ट में डेब्यू भी नहीं किया है लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने भी दस मैच खेले हैं। पटेल को टेस्ट टीम में शामिल करने का एक ही कारण है वह है अनुभव, लेकिन यहां पर यह सवाल उठता है कि पार्थिव को जब टेस्ट टीम में मौका दिया गया था तब वह भी 17 वर्ष के युवा खिलाड़ी थे तो 19 वर्षीय पंत को मौका देने से सिलेक्टर्स क्यों चूक गए। हालांकि कारण एक यह भी है कि कीपर बदलने का फैसला काफी जल्दबाजी में लिया हुआ लगता है क्योंकि कल जब टीम की घोषणा की गई थी तब साहा के चोटिल होने की कोई बात सामने नहीं आई थी। आज सुबह ही इस बात की घोषणा की गई है कि साहा की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण वह टीम से दूर रहेंगे और पटेल उनकी जगह लेंगे। वहीं मेरी नज़र में इसका एक कारण यह भी है कि चयनकर्ता किसी भी रिस्की फैसले को लेने से पीछे हट गए। लेकिन इस बात की क्या संभावना है कि आठ साल बाद टीम में वापसी कर रहे पार्थिव अच्छा प्रदर्शन करेंगे। वहीं अगर साहा की परेशानी ज्यादा बढ़ गई तो क्या उन्हें आगे के मैचों के लिए भी टीम में जगह दे दी जाएगीू। खैर अभी हम सिर्फ अंदाजा ही लगा सकते हैं बाकी नतीजे को 26 नवंबर के बाद ही पता चलेंगे। लेकिन मुझे कोहली से इतनी तो उम्मीद थी कि वह युवा खिलाड़ियों पर भरोसा करेंगे।