भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में जगह बना ली थी © Getty Images
भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में जगह बना ली थी © Getty Images

साल 2002 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी श्रीलंका में खेली जा रही थी। भारत ने लीग मैचों में शानदार खेल के दम पर सेमीफाइनल में जगह बना ली थी। सेमीफाइनल में भारत के सामने थी दक्षिण अफ्रीका की टीम जिसे हम ‘चोकर्स’ के नाम से भी जानते हैं। भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें सेमीफाइनल में एक-दूसरे से भिड़ने के लिए तैयार थीं। श्रीलंका के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए उस मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। भारत की तरफ से सलामी बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे वीरेंद्र सहवाग और सौरव गांगुली। भारतत ने धमाकेदार शुरुआत की और 5.3 औवरों में ही स्कोरबोर्ड में 42 रन टांग दिए। लेकिन अगली ही गेंद पर मखाया एनटिनी ने गांगुली को पवेलियन भेज दिया।

इसके बाद वीरेंद्र सहवाग ने वीवीएस लक्ष्मण के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया और सहवाग ने अपना अर्धशतक पूरा किया। लेकिन इसी बीच भारत को वीवीएस लक्ष्मण के रूप में दूसरा झटका लग गया। भारत का स्कोर अब 102/2 विकेट हो चुका था। लक्ष्मण के आउट होने के बाद अभी स्कोरबोर्ड में छह रन और जुड़े थे कि सहवाग को भी कैलिस ने पवेलियन वापस भेज दिया। क्रीज पर भारत के दो सबसे बेहतरीन बल्लेबाज थे, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर ने पारी को आगे बढ़ाया ही था कि सचिन रन आउट हो गए और भारत की उम्मीदों को अपने साथ ही पवेलियन ले गए। ये भी पढ़ें: टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के इन पांच रिकॉर्डों को तोड़ सकते हैं ऐलेस्टर कुक

सचिन के आउट होने के बाद युवराज सिंह ने मोर्चा संभाला और राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर टीम के स्कोर को 200 के पार पहुंचा दिया। अभी टीम का स्कोर 205 ही हुआ था कि राहुल द्रविड़ भी 49 रनों के निजी स्कोर पर आउट हो गए। लेकिन युवराज सिंह की बेहतरीन 62 रनों की पारी की बदौलत भारत ने दक्षिण अफ्रीका के सामने 50 ओवरों में 9 विकेट खोकर 261 का स्कोर खड़ा किया। दक्षिण अफ्रीका को जीतने के लिए 262 रन बनाने थे।

दक्षिण अफ्रीका की टीम ने लक्ष्य का पीछा करना शुरू ही किया था कि जहीर खान ने ग्रीम स्मिथ को 4 रनों के निजी योग पर आउट कर भारत को पहली सफलता दिला दी। दक्षिण अफ्रीका का पहला विकेट मात्र 14 रनों पर गिर चुका था। इसके बाद मैदान पर उतरे जैक कैलिस। कैलिन गिब्स के साथ मिलकर दक्षिण अफ्रीका के स्कोर को आगे बढ़ाया। दोनों के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आ रहे थे। दोनों ही बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली। दोनों बल्लेबाजों ने मैदान के चारों तरफ शॉट खेले और हर एक शॉट के साथ ही भारतीय टीम के साथ-साथ भारतीय प्रशंसकों की जीत उम्मीद खत्म होती जा रही थी। इसी बीच गिब्स ने अपना शतक पूरा कर लिया और टीम का स्कोर 37 ओवरों में 192/1 हो गया। अफ्रीका को जीत के लिए यहां से केवल 13 ओवरों में 70 रनों की जरूरत थी। ये भी पढ़ें: इंग्लैंड टीम के ये पांच खिलाड़ी भारत के लिए बन सकते हैं मुसीबत

ऐसी स्थिति में हरभजन सिंह अपना आठवां ओवर लेकर आए, गिब्स 119 गेंदों में 116 रन बनाकर अफ्रीका को जीत की तरफ ले जा रहे थे। लेकिन तभी गिब्स को क्रैंप ने घेर लिया और वह बल्लेबाजी करने में असहाय हो गए। गिब्स के दोनों हाथों पर क्रैंप आ गए थे और उनके लिए बल्लेबाजी करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में गिब्स रिटायर हर्ट हो गए। जब ग्बिस रिटायर हुए तो टीम का स्कोर 192 रनों पर एक विकेट था। गिब्स के बाद क्रीज पर आए जॉन्टी रोड्स। इसी बीच हरभजन की गेंद पर जॉन्टी रोड्स ने हवा में शॉट खेला और युवराज सिंह ने बेहतरीन डाइव लगाते हुए गेंद को लपक लिया ऐसा लग रहा था कि युवराज ने गेंद को नहीं मैच को अपने हाथों में कैद कर लिया हो। पूरी टीम युवराज से लिपट गई और दर्शकों की धूमिल पड़ रही उम्मीद फिर से जाग गई। इसके बाद बल्लेबाजी के लिए आए डिपेनर को भी हरभजन ने उसी ओवर में अपना शिकार बना डाला और भारत की झोली में तीसरी सफलता डाल दी। भारत यहां से मैच में आने की कोशिश करने लगा था।

भारत के तेज गेंदबाज बेअसर साबित हो रहे थे और सभी प्रमुख स्पिनरों के ओवर खत्म हो चुके थे। ऐसे में भारत के कप्तान सौरव गांगुली के माथे पर शिकन पड़ चुकी थी। लेकिन गांगुली ने हिम्मत नहीं हारी और गेंद वीरेंद्र सहवाग के हाथों में सौंप दी। सहवाग ने अपने कप्तान के फैसले को जाया नहीं जाने दिया और 43वें ओवर में मार्क बाउचर को आउट कर भारत को एक और कामयाबी दिला दी। मैच काफी रोमांचक होता जा रहा था। 48 ओवरों के बाद अफ्रीका को जीत के लिए 25 रनों की दरकरार थी और उसके कुल 6 विकेट बचे थे। 49वें ओवर में जहीर खान ने टीम के लिए काफी किफायती गेंदबाजी की और ओवर में सिर्फ 5 रन खर्च किए। अब आखिरी ओवर में भारत को जीत के लिए 21 रनों की जरूरत थी।

गेंद थी वीरेंद्र सहवाग के हाथों में। सहवाग ने पहली गेंद फेंकी और कैलिस ने पहली ही गेंद पर बेहतरीन शॉट खेलकर गेंद को बाउंड्री के बाहर छह रनों के लिए भेज दिया। सहवाग पर दबाव आ गया था और टीम के बाकी साथी सहवाग के पास जाकर उन्हें समझाने लगे। सहवाग ने अगली गेंद पर कैलिस को द्रविड़ के हाथों कैच करा भारत को पांचवीं सफलता दिला दी। कैलिस 97 रनों पर आउट होकर वापस लौट गए। अब अफ्रीका को जीत के लिए 3 गेंदों में 15 रनों की आवश्यकता थी। सहवाग की तीसरी गेंद पर क्लूसनर ने दो रन लिए और भारत को जीत की खुशबू आने लगी। दर्शकों की उम्मीदें फिर से जिंदा हो गईं।

सहवाग की चौथी गेंद पर फिर से दो रन बने और भारत ने मुकाबले को जीत लिया था बस औपचारिकता रह गई थीं। पांचवीं गेंद पर सहवाग ने कोई रन नहीं दिया और अंतिम गेंद पर सहवाग ने क्लूसनर को आउट कर दिया। पूरी टीम सहवाग के गले लग गई थी। प्रशंसकों की खुशी का ठिकाना नहीं थी। भारतीय खिलाड़ी एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे। भारतीय टीम ने हारे हुए मैच को दक्षिण अफ्रीका के मुंह से छीनकर जीत में तब्दील कर दिया था। इसी जीत के साथ भारत जहां चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुंच गया था। तो दक्षिण अफ्रीका एक बार फिर चोक कर गई थी। दक्षिण अफ्रीका की इस हार ने एक बार फिर से 1999 विश्वकप में मिली हार के जख्म को ताजा कर दिया था।