भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी © Getty Images
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी © Getty Images

दिल्ली में शर्दियों ने दस्तक दे दी थी। भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आइरिश डॉक्यूमेंट्री के लिए पीटर यूसीनोव को साक्षातकार के 1 सफदरजंग रोड से निकली ही थीं। इंदिरा गांधी का अपनी सुरक्षा में तैनात जवान सतवंत सिंह और बेअंत सिंह पर कोई ध्यान नहीं था और वह गेट को पार कर रह थीं। जैसे ही इंदिरा ने गेट पार किया वैसे ही बेअंत सिह ने इंदिरा गांधी पर 3 राउंड फायरिंग कर दी इसके फौरन बाद सतवंत सिंह ने भी इंदिरा पर 30 राउंड फायर किए, उस समय घड़ी में सुई सुबह 9.20 का समय दिखा रही थीं।

इंदिरा गांधी को ठीक 10 मिनट बाद यानी 9.30 बजे फौरन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के लगभग पांच घंटे के लगातार प्रयास के बाद डॉक्टरों ने इस बात की घोषणा की ‘अपने सबसे अच्छे प्रयास के बावजूद हम उन्हें नहीं बचा सके।’ जैसे ही इंदिरा गांधी की हत्या की खबर फैली वैसे ही भारत भर में सिखों के खिलाफ दंगे शुरू हो गए। रिपोर्ट के अनुसार इन दंगों में देशभर में 8000 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें 3000 हत्याएं सिर्फ दिल्ली में ही हुई थीं। ये भी पढ़ें: इंग्लैंड के खिलाफ क्या होगी टीम इंडिया की रणनीति?

क्रिकेट भी इससे अछूता नहीं रहा, भारत की क्रिकेट टीम उस दिन पाकिस्तान के सियालकोट में खेल रही थी, और टीम उस समय भी खेल रही थी जब भारतीय समयअनुसार दोपहर 2.20 बजे खबर फैल चुकी थी। Also Read: 1984 India tour of Pakistan called off midway following Indira Gandhi’s assassination

भारत का पाकिस्तान दौरा:

भारत को पाकिस्तान में 3 टेस्ट और 3 वनडे मैच खेलने थे। भारत का दौरा क्वेटा से शुरू हुआ जहां भारत ने पाकिस्तान को 40 ओवरों में 199/7 के स्कोर पर रोक दिया लेकिन जवाब में भारत सिर्फ 153 रन ही बना सकी और मैच 31 रनों से हार गई। पहले वनडे से लेकर पहले टेस्ट से मिलने वाले पैसों को रावलपिंडी में दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए लगाया गया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 39 ओवरों में 260/2 का स्कोर खड़ा किया, भारत की तरफ से अनशुमन गायकवाड, दिलीप वेंगसरकर और संदीप पाटिल अर्धशतक लगाने में कामयाब रहे। जवाब में पाकिस्कतान की टीम मात्र 203 ही रन बना सकी, भारत की तरफ से मनिंदर सिंह ने 4 विकेट झटके।

लाहौर में खेले गए पहले टेस्ट में पाकिस्तान ने कप्तान जहीर अब्बास के 168 रनों की मदद से 9 विकेट पर 428 रन बना डाले, जवाब में अजीम हाफिज की जबर्दस्त गेंदबाजी की दम पर पाकिस्तान ने भारत को 94/1 से 156 रनों पर ढेर कर दिया। सलमी जोड़ी द्वारा पहले विकेट के लिए जोड़े गए 85 रन औप बाद में मोहिंदर सिंह के नाबाद शतक की दम पर भारत टेस्ट बचाने में कामयाब रहा। भारत के कप्तान सुनील गावस्कार ने पहले मैच के बाद पाकिस्तानी अंपायर पर टूट पड़े और कहा, ‘पाकिस्तानी अंपायर के बहुत प्रयास करने के बाद और घरेलू टीम के समर्थन के बावजूद हम टेस्ट बचाने में सफल रहे और यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। पाकिस्तान दौरे पर आने से पहले हमें करीब फैसलों की उम्मीद थी, लोकिन लाहौर में जो कुछ भी हुआ वो पूर्व नियोजित और पहले से निर्धारित था।’ हालांकि सुनील गावस्कर के कथन को लोगों ने सही नहीं कहा।

फैसलाबाद में खेला गया दूसरा टेस्ट काफी थकाने वाला रहा, मैच की पहली पारी में भारत ने 500 रन ठोक डाले, भारत की तरफ से संदीप पाटिल और रवि शास्त्री ने शतक लगाए। लेकिन पाकिस्तान की टीम एक कदम आगे निकल गई और टीम ने मुदस्सर नजर ने 199, कासिम उमर ने 210 रन बनाए। जैसे ही सलीम मलिक ने शतक लगाया वैसे ही मैच खत्म हो गया। 

सियालकोट मैच:

इसके बादस दोनों टीमें दूसरे वनडे के लिए सियालकोट पहुंचीं। सुनील गावस्कर मुकाबले में नहीं खेल रहे थे और जिसके बाद अपने करियर में पहली बार टीम की कमान संभालने का मौका अमरनाथ को मिला। मैच में पाकिस्तान के कप्तान जहीर ने टॉस जीता और भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। गायकवाड और गुलाम पारकर ने टीम को सधी हुई शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए 35 रन जोड़े। राशिद खान और ताहिर नकाश पाकिस्तान को सफलता दिलाने में नाकाम रहे तो कप्तान जहीर ने मुदस्सर को गेंदबाजी की जिम्मेदारी सौंपी, जिसके बाद मुदस्सर ने भारत के दोनों बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड कर दिया। दोनों खिलाड़ियों के आउट होने के बाद वेंगसरकर और पाटिल क्रीज पर उतरे। वेंगसरकर ने पाकिस्तान टीम की जमकर खबर लेते हुए तेज गति से रन बनाए और पाटिल एक दर्शक की भांति वेंगसरकर की बल्लेबाजी का लुत्फ उठाते नजर आए। वेंगसरकर ने खासकर पाकिस्तान के दो गेंदबाजों (तौसीफ अहमद और नक्काश) को निशाना बनाया और नावेद के पहले ही ओवर में 10 रन ठोक डाले। पाटिल और वेंगसरकर ने मिलकर टीम के लिए 143 रन जोड़े, लेकिन इसी बीच नक्काश ने पाटिल को बोल्ड कर दिया। पाटिल ने 83 गेंदों पर 59 रन बनाए। अमरनाथ ने अपनी जगह रवि शास्त्री को प्रमोट किया, वेंगसरकर दुर्भाग्यवश अपने शतक से चूक गए और 102 गेंदों पर नाबाद 94 रन बनाए। भारत ने अपने कोटे के 40 ओवर खेल चुकी थी।

इसी बीच इंनिंग ब्रेक में इंदिरा की हत्या की खबर सियालकोट पहुंची और मैच को फौरन रोक दिया गया और साथ ही दौरे को भी रद्द कर दिया गया। दौरे में अभी भी तीसरा टेस्ट पेशावर में और तीसरा वनडे कराची में खेला जाना बाकी था। लेकिन इस खबर के बाद भारतीय क्रिकेट टीम भारत वापस लौट आई।

इसके बाद क्या हुआ:

27 नवंबर 1984 को ब्रिटिश उप उच्चायुक्त पर्शी नॉरिश को मुंबई में सुबह 8 बजे गोली मार दी गई और नॉरिश को 8.45 पर मृत घोषित कर दिया गया। इसी हादसे के बाद इंग्लैंड टीम का भारत दौरा लगभग रद्द ही हो गया छा लेकिन बाद में किसी तरह इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर आ ही गई। मुंबई में खेला गया पहला टेस्ट भारत ने अपने नाम किया, लेकिन दिल्ली में खेले गए दूसरे टेस्ट और मद्रास (अब चेन्नई) में खेले गए चौथे टेस्ट को जीतकर इंग्लैंड ने सीरीज जीत ली।