Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - February 21, 2017 2:07 PM IST


भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले 67 सालों से लगातार मनमुटाव चला आ रहा है। दोनों देश इस खटास को पाटने के लिए समय-समय पर प्रयास करते रहते हैं, लेकिन यह बात कहीं ना कहीं अटक ही जाती है। दोनों देशों के बीच सिर्फ राजनैतिक गलियारों और बॉर्डर पर ही सरगर्मी का माहौल नहीं रहता बल्कि क्रिकेट भी इससे अछूता नहीं है। क्रिकेट मैदान में दोनों देशों के खिलाड़ी एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। चूंकि बॉर्डर पर पहले से ही दोनों देशों के बीच तनाव है तो मैदान में खिलाड़ियों के बीच उसकी झलक मिल ही जाती है। ऐसे ही कुछ वाकए हम आपके साथ साझा करने जा रहे हैं जब दोनों देशों के खिलाड़ियों ने मैदान में ही आपा खो दिया।
1. 1980 के दशक में भारत पाकिस्तान के बीच एक मैच खेला जा रहा था। इसी बीच जावेद मियांदाद ने मोहिंदर अमरनाथ को कुछ बुरा कहा। उस समय बल्लेबाजी कर रहे अमरनाथ ने सिली प्वाइंट पर फील्डिंग कर रहे मियांदाद को जो जवाब दिया उसने हर भारतीय के दिल को छू लिया। अमरनाथ ने कहा, ‘देख जावेद, मुझे जो कहना है कह, लेकिन मेरे देश को कुछ ना कहना।’ अमरनाथ के तेवर को देखकर फिर कभी जावेद ने उस लहजे में अमरनाथ को स्लेज नहीं किया।
2. यह बात तब की है जब 50 ओवर के मैच सफेद पोशाक में भी खेले जाया करते थे। साहिवाल में खेले गए वनडे मैच में पाकिस्तान ने 40 ओवरों में 7 विकेट पर 205 रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने जल्दी जल्दी अपने विकेट गंवा दिए। लेकिन अंशुमान गायकवाड़ और गुडप्पा विश्वनाथ ने भारत को 37 ओवरों में 183 पर 7 विकेट पर पहुंचा दिया। इसी बीच सरफराज ने गेंद फेंकी जो बल्लेबाज से सिर के ऊपर से गुजर गई। बल्लेबाज ने अंपायर की ओर इस आशा से देखा कि वह इस गेंद को वाइड करार देंगे। लेकिन अंपायर ने वाइड नहीं दी। इसके बाद वाली गेंद भी उसी तरह फेंकी गई जो बल्लेबाज के सिर के ऊपर से गुजर गई। पाकिस्तान टीम अब जीत हासिल करने के लिए नीचता पर उतर आई थी। साथ ही अंपायर भी उनका साथ दे रहे थे। पाकिस्तान के गेंदबाज लगातार सिर के पास गुजरने वाली गेंदें फेंक रहे थे। इसे देख बिशन सिंह बेदी के भीतर गुस्सा उमड़ रहा था। लेकिन कुछ ही देर में वह समझ गए कि इस चीटिंग से वह पार नहीं पा सकते और उन्होंने मैच में अपनी टीम की ओर से हार मान ली। विश्व क्रिकेट के इतिहास में वह पहला मामला था जब किसी टीम के कप्तान ने अपनी टीम की हार मान ली। इसके बाद साहिवाल में फिर कभी भी अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित नहीं किया गया।
3. पेशावर में खेला गया पहला मैच खराब रोशनी के कारण नहीं खेला गया जिसके बाद 20 ओवर के एक्जीबिशन मैच दोनों टीमों के बीच खेला गया। इसी एक्जीबिशन मैच में युवा सचिन तेंदुलकर ने अनुभवी अब्दुल कादिर के ओवर में 4 छक्के जड़कर विश्व को अपनी क्षमताओं से पहली बार रूबरू करवाया। पाकिस्तान ने गुरजनवाला में खेला गया 16-16 ओवरों का वनडे मैच 7 रनों के अंतर से जीत लिया। इसके बाद अगले वनडे मैच के लिए दोनों टीमें कराची पहुंची। भारतीय टीम ने पिच की नजाकत को देखते हुए टीम में तीन तेज गेंदबाजों को जगह दी। मैच की पांचवीं गेंद में मनोज प्रभाकर ने रमीज राजा को लेग बिफोर द विकेट आउट कर दिया। प्रभाकर की अगली ही गेंद पर सलीम मलिक क्लीन बोल्ड हो गए। इस तरह मनोज प्रभाकर के पास हैट-ट्रिक बनाने का मौका भी था। अगले ओवर में गेंदबाजी करने आए प्रभाकर हैट-ट्रिक बनाने से चूक गए , लेकिन कुछ ही देर बाद प्रभाकर ने मियांदाद को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। इस तरह पाकिस्तान ने महज 11 रनों पर अपने 3 विकेट गंवा दिए। चूंकि अभी तो यह शुरुआती बौछार थी। कपिल देव और सलिल अंकोल की गेंदबाजी का सामना पाकिस्तान को अभी करना था। पाकिस्तान 14.3 ओवरों में 28/3 के स्कोर पर बेहद संघर्ष की स्थिति में था। क्रीज में शोएब मोहम्मद और इमरान खान थे। पाकिस्तानी फैन्स उनकी टीम के प्रदर्शन से काफी क्षुब्ध नजर आ रहे थे। इसी बीच मैदान में ही लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिए। हालांकि मैदान पर मौजूद सुरक्षागार्डों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं रुके। यहां तक की स्थानीय हीरो मियांदाद ने दर्शकों से शांत रहने की अपील की लेकिन वह मानने वाले नहीं थे। जब परिस्थिति हाथ से निकलती दिखी तो मैच को रद्द घोषित कर दिया गया।
4. साल 1992 के विश्व कप में पहली बार भारत पाकिस्तान की टीमों के मध्य विश्व कप में मैच खेला गया। इसके पहले के चार विश्व कपों में दोनों टीमों के बीच दुर्भाग्य से कोई मैच नहीं खेला गया। धीमी पिच पर भारत ने 216 रन बनाए जिसमें भारत के अजहरुद्दीन और अजय जडेजा का अच्छा योगदान था। अंतिम ओवरों में कपिल और सचिन ने बेहतरीन हिटिंग की थी। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम के दो मुख्य बल्लेबाज इंजमाम-उल-हक और जाहिद फजल जल्दी-जल्दी चल दिए। लेकिन सोहेल व जावेद मियांदाद ने लड़ाई को जारी रखा। इसी बीच सचिन ने मियांदाद को लेग साइड की ओर गेंद फेंकी और बिना बल्ले-गेंद का संपर्क हुए विकेटकीपर किरन मोरे अपील करने लगे। इस बीच मियांदाद ने अगली गेंद पर पुल शॉट खेलते हुए एक रन दौड़ लिया। मियांदाद ने रन दौड़ने के बाद किरन मोरे के द्वारा बार-बार अपील करने की शिकायत अंपायर डेविड शेफर्ड से की। लेकिन शेफर्ड ने उनकी बात अनसुनी कर दी और कोई एक्शन नहीं लिया। इस बीच फिर से मोरे विकेटों के पीछे से उन्हें परेशान करने लगे। इसके बाद अगली गेंद को मियांदाद ने मिड ऑफ की ओर खेला और जब थ्रो आया तब वह क्रीज के भीतर थे। लेकिन उनके क्रीज के अंदर रहने के बावजूद मोरे ने विकटों की बेल्स गिरा दीं। ऐसे देख मियांदाद बेहद गुस्सा गए और क्रिकेट की गरिमा को भूलकर मेढ़क की तरह उछल-उछल कर मोरे को बताने लगे कि वह क्रीज के अंदर आ चुके हैं। मियांदाद की इस हरकत की चर्चा बाद में कई अखबारों में हुई।
5. यह बात साल 1997 के सहारा कप की है। भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए मैच में पाकिस्तान टीम ने पहले बल्लेबाजी की और वह महज 116 रनों पर ऑलआउट हो गई। इसी दौरान जब भारतीय खिलाड़ी क्षेत्ररक्षण कर रहे थे तो दर्शकों में बैठा एक व्यक्ति जिसका नाम थिंड था वह भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के संगीता बिजलानी के साथ अफेयर के बारे में अनाप-शनाप कमेंट मार रहा था। यहां तक की उसने भारतीय गेंदबाज देबाशीष मोहंती को कालिया तक कहा। वह व्यक्ति लगातार खिलाड़ियों को ताने मार रहा था। अब पाकिस्तान टीम फील्डिंग के लिए आई तो उसने पाकिस्तान टीम के खिलाड़ियों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया। इसी बीच इंजमाम जो तीसरी स्लिप पर फील्डिंग कर रहे थे उन्हें थर्ड मेन पर फील्डिंग के लिए भेजा गया। थिंड जो अपने हाथ में मेगाफोन लिए था ने कहा, ‘ओए मोटे, सीधा खड़ा हो। मोटा आलू सड़ा आलू’। कुछ देर तो इंजमाम उसकी बातों को सहते रहे लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने दर्शक दीर्घा में जाकर उस पर हमला बोल दिया। बाद में अफवाह उड़ी की उन्होंने एक अतिरिक्त खिलाड़ी को बैट लेकर बाउंड्री लाइन के बाहर खड़ा होने के लिए कहा था। जैसे की थिंड ने अगली बार वही शब्द बोला वह बैट पकड़कर दर्शकों की भीड़ में उसे मारने के लिए घुस गए। बाद में गार्डियन अखबार ने इस संबध में लिखा, ‘अगर दूसरे दर्शकों और सुरक्षा स्टाफ ने इंजमाम को रोका ना होता तो वह उस थिंड का सिर फोड़ देते। इंजमाम के डील-डौल को देखते हुए थिंड उनके सामने कुछ नहीं था और वह उसे आसानी से पीट सकते थे।’ यहां तक की जब कनाडियन पुलिस इंजमाम को शांत करवाकर मैदान में वापस भेज रही थी तब भी वह थिंड को वापस जाकर पीटने के लिए उतावले थे।
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