सिर्फ दो गेंदें खेलकर ही क्रिकेट मैच जीत गई ये टीम
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साल 2006 में नेपाल की टीम ने ‘एसीसी कप’ के एक आधिकारिक मैच में सबसे तेज गति से लक्ष्य प्राप्त करके इतिहास रच दिया। उन्होंने विपक्षी टीम के द्वारा दिए गए लक्ष्य को मात्र दो गेंदों में प्राप्त कर लिया। नेपाल ने इस कारनामें को किस तरह अंजाम तक पहुंचाया। आइए जानते हैं। एसीसी कप में नेपाल ने अपने पहले मैच में कुवैत को बड़ी आसानी से हरा दिया। अब उनका अगला मुकाबला म्यांमार से था। म्यांमार टूर्नामेंट में सबसे कम रैंक वाली टीम थी। यहां तक की वह ब्रूनेई, भूटान और मालदीव से भी रैंकिंग में कम थी, जिनका क्रिकेट में अनुभव वैसे भी बहुत कम था। इससे पहले मैच में नेपाल ने कुवैत के विरुद्ध 317 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था और कुवैत को मात्र 36 रनों पर ऑलआउट कर दिया था।

फोटो साभार: Getty Images(cricketcountry.com)
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वहीं दूसरी ओर म्यांमार को भी अपने पहले मैच में टूर्नामेंट की बेहतरीन टीम हांगकांग के हाथों करारी पराजय का सामना करना पड़ा था। उस मैच में हांगकांग ने 442 रन बनाए थे और म्यांमार 20 रनों पर ऑलआउट हो गई थी। अब म्यांमार का मुकाबला नेपाल से होने जा रहा था। मैच में नेपाल ने टॉस जीता और म्यांमार को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। नेपाल की गेंदबाजी की कमान उनके मास्टर तेज गेंदबाज मेहबूब आलम को दी गई और इसके बाद शुरू हुआ एक अनोखा खेल। 

आलम ने म्यांमार की बल्लेबाजी की जड़े हिलाकर रख दीं। म्यांमार के विकेटकीपर बल्लेबाज पारी की पहली गेंद में चलते बने और इसके बाद आलम ने दो और बल्लेबाजों शारजील और रहमान को पवेलियन का रास्ता दिखाया। जिस समय तक कप्तान दास ने अपना दूसरा ओवर खत्म किया। म्यांमार चार रन पर चार विकेट गंवाकर संघर्ष कर रहा था। ये भी पढ़ें:

इसके कुछ देर बाद फिर से मेहबूब म्यांमार के बल्लेबाजों पर कहर बनकर बरसे। इस बीच सबसे लंबी 21 गेंदों की पार्टरनशिप मो तुन और कप्तान टिन ए के बीच हुई जिसे दास ने तोड़ा और अगले कुछ ओवरों में ही म्यांमार की पारी तांस के पत्तों की तरह बिखर गई। म्यांमार की आधी से ज्यादा टीम खाता भी नहीं खोल सकी। म्यांमार 12.1 ओवरों में 10 रनों पर सिमट गया। म्यांमार की ओर से जकारिया ने 20 गेंदों में एक रन बनाया और वह इस तरह से म्यांमार की ओर से सबसे देर तक क्रीज पर रहने वाले बल्लेबाज रहे।

नेपाल ने म्यांमार की पारी को ढहाने के लिए दो गेंदबाजों का इस्तेमाल किया। मेहबूब आलम ने 6.1 ओवरों की गेंदबाजी की और 3 रन देकर 7 विकेट लिए। वहीं दूसरे छोर से उनका साथ निभाते हुए बिनोद दास ने 6 ओवरों में 4 रन देकर 3 विकेट लिए । इसके अलावा 3 रन म्यांमार के बल्लेबाजों ने अतिरिक्त के रूप में बनाए। 11 रनों के स्कोर का पीछा करने उतरी नेपाल की टीम के बल्लेबाज महेश छेत्री ने पहली गेंद को धीरे से खेलकर 3 रन दौड़े। अगली गेंद पर धीरज चंद ने हल्के हाथों से गेंद को खेलकर 3 रन दौड़े। जैसा कि अब ओवर में चार गेंदें बची थी। गेंदबाज ने अगली दो गेंदें वाइड फेंकी। इसके बाद उसने जो गेंद फेंकी वह और भी वाइड थी जिसे कीपर रोक ही नहीं पाया और इस तरह नेपाल ने दो गेंदों में ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। नेपाल ने इस जीत के साथ इतिहास स्वर्णअक्षरों से लिख दिया।

म्यांमार में क्रिकेट की शुरुआत साल 2004 में हुई थी, जब कुछ ऑस्ट्रेलियाईयों ने वहां के लोगों को इस खेल के बारे में बताया था। इस दौरान आईसीसी ने इस देश में कुछ कार्यक्रम भी कराए और साल 2006 तक म्यांमार ने अंतरराष्ट्रीय जमीन पर अपनी पहली टीम भेजी। नेपाल क्रिकेट टीम इस समय अफगानिस्तान से भी मजबूत टीम मानी जाया करती थी।