जब ड्रेसिंग रूम में विराट कोहली छूने लगे सचिन के पैर, पढ़ें ड्रेसिंग रूम के रोचक किस्से
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जब युवराज धोनी का करते थे अपमान: वर्तमान वनडे टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के शुरुआती दिन भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में बढ़िया नहीं गुजरे, क्योंकि उन्हें ज्यादातर टीम के अन्य खिलाड़ियों से तिरस्कार झेलना पड़ता था। इस समय टीम के दूसरे खिलाड़ी उन्हें ‘बिहारी’ कह कर उनका मज़ाक उड़ाया करते थे। युवराज भी उनमें से एक थे जो धोनी को चिढ़ाते थे। युवराज नए खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में कहा करते थे, ‘छक्का और चौका मारना कोई बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात है तो मैच जिताने वाली पारी खेलना।’

लेकिन जब धोनी एक बॉस की तरह खेले और मैच- दर- मैच जीते। इसके बाद युवराज ने टेस्ट मैच पर निशाना साधा और कहा टेस्ट मैच में ही खिलाड़ी की असली परख होती है। युवराज की रोज-रोज की इन बातों से आखिरकार धोनी एक दिन तंग आ गए और खीझ कर युवराज से पूछ बैठे, ‘वो तो सब ठीक है, लेकिन एक बात बताओ तुम हमेशा मुझसे गुस्सा क्यों रहते हो।’ धोनी की इस बात ने युवराज को उनकी गलती का एहसास करा दिया और यह पल दोनों की जिंदगी के लिए यादगार बन गया और तब से वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए।

कोहली जब सचिन के पैर छूने को आगे बढ़े: भारतीय टेस्ट टीम के वर्तमान कप्तान विराट कोहली शायद ही ड्रेसिंग रूम का अपना पहला दिन भूल पाएं जब टीम के अन्य खिलाड़ियों ने उनका अजीब तरीके से मजाक बनाया। यह बात विराट कोहली ने खुद ‘कॉमेडी नाइट विथ कपिल’ में बताई थी। जब कोहली ड्रेसिंग रूम मेंपहली बार गए तो टीम के अन्य खिलाड़ियों ने उनका मजाक बनाने का सोचा।

फोटो साभार: babakathullu.com
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कोहली के आते ही उन्होंने कहा जो भी क्रिकेटर टीम में नया आता है उसे सचिन तेंदुलकर के पैर छूकर आर्शीवाद लेना होता है। कोहली अपना सिर हां में हिलाते हुए आगे बढ़ गए। जैसे ही उन्हें सचिन दिखे तो वह उनके पैर छूने के लिए आगे बढ़े। सचिन इसे देखकर चौंके और पूछा, ‘तुम्हें क्या चाहिए?’ इसके बाद कोहली ने पूरा माजरा सचिन को बताया। सचिन इसे सुनकर सुनकर जोर-जोर से हंसने लगे और टीम के दूसरे खिलाड़ी भी बाहर निकलकर हंसने लगे। सचिन ने कोहली से कहा टीम इंडिया में स्वागत है दोस्त।

गांगुली के फरमान ने युवराज को रुलाया: अंडर-19 टीम की ओर से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले युवराज सिंह ने साल 2000 में आईसीसी नॉकआउट टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम में पर्दापण किया। भारतीय टीम में नए-नवेले युवराज सिंह को प्रयोग के तौर पर गांगुली खिलाना चाहते थे। इसके बारे में उन्होंने अपनी मंशा पहले ही सबके सामने जाहिर कर दी थी। टूर्नामेंट में भारतीय टीम को अगला मैच केन्या के विरुद्ध खेलना था। मैच के एक दिन पहले टीम के कप्तान सौरव गांगुली युवराज सिंह के पास आए और बोले, ‘क्यूं ओपनिंग करेगा?’

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सौरव गांगुली का यह सवाल सुनकर युवराज सिंह कुछ देर के लिए आवाक रह गए। लेकिन अब कप्तान ने कहा था तो हां तो कहना था, युवराज सिंह ने अनमने ढंग से हां कह दी। लेकिन युवराज सिंह गहरे सोच में पड़ गए। अब उन्हें रात में इस सोच की वजह से नींद भी नहीं आ रही थी। इसलिए उन्हें उस रात सोने के लिए नींद की गोली लेनी पड़ी और वे सो गए। अगली सुबह जब वह उठे तो वही बात उनके ज़ेहन में घूम रही थी। इसी बीच गांगुली उनके पास आए और पूछा और कैसे हो। गांगुली युवराज की टेंशन को भांप गए और उन्होंने उससे कहा मैं बस तुम्हारी टांग खींच रहा था। इसके बाद युवराज की जान में जान आई और युवराज सिंह से गांगुली ने ओपनिंग नहीं करवाई। बल्कि उस मैच में युवराज की बैटिंग भी नहीं आई। भारत ने स्कोर को चेज करते हुए दो विकेट गंवाकर केन्या के द्वारा दिया गया 209 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया।

क्यों पकड़ी थी जॉन राइट ने वीरेंद्र सहवाग की कॉलर?: भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग जो आमतौर पर मैदान पर शांत दिखाई देते हैं उन पर एक बार पूर्व भारतीय कोच जॉनराइट इतने गुस्सा हो गए थे कि उन्होंने सहवाग की कॉलर पकड़कर उन्हें सरेआम बेइज्जत कर दिया था। जॉन राइट के इस व्यवहार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम में भूचाल सा आ गया था। लेकिन जॉन राइट ने सहवाग को सरेआम बेइज्जत क्यों किया? आइए जानते हैं।

फोटो साभार: mastiforum.net
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यह बात 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी की है। इस टूर्नामेंट में इंग्लैंड व श्रीलंका अन्य टीमें थीं। जॉन राइट भारतीय टीम के नए कोच बने थे और वह भारतीय क्रिकेटरों के प्रदर्शन को निखारने की भरपूर कोशिश कर रहे थे और उन्हें अच्छी सफलता भी मिल रही थी। लेकिन जॉन राइट सहवाग के खेल को लेकर थोड़ा निराश थे। हालांकि, सहवाग उस समय अच्छे फॉर्म में थे और अच्छे रन बना रहे थे। लेकिन इसी दौरान वे बेहद बेकार शॉट खेलकर आउट हो जाते थे। राइट ने टूर्नामेंट के दौरान राहुल द्रविड़ से बातचीत की और कहा कि अगर सहवाग एक बार फिर से खराब शॉट खेलकर आउट हुआ तो मैं कुछ कर गुजरूंगा। उनका यह कहना ही था कि सहवाग अपने चिरपरिचित अंदाज में अगले मैच में भी आउट हो गए। जॉन राइट ने वैसा ही किया जैसा कि उन्होंने राहुल से कहा था और उन्होंने आवेश में आकर सहवाग की कॉलर पकड़ ली और भड़क गए।

उस दौरान मीडिया में आई खबरों के मुताबिक राइट के कॉलर पकड़ने के कारण सहवाग बेहद दुखी हो गए थे और वे सुबक-सुबक कर रोने लगे थे। जब गांगुली को इस बात का पता चला तो वे सहवाग के पक्ष में आकर खड़े हो गए और राइट से पूरी टीम के आगे माफी मांगने को लेकर उद्यत हो गए। लेकिन इसी बीच सचिन ने गांगुली को समझाइस देते हुए कहा कि अगर राइट को टीम के खिलाड़ियों के आगे माफी मांगनी पड़ेगी तो इससे उनकी अथॉरिटी में असर पड़ेगा। इसके बाद जाकर यह मामला ठंडा हुआ।

लेकिन 2013 में गांगुली से जब यह बात पूछी गई तो उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज किया था। गांगुली के मुताबिक जब यह घटना हुई उस समय वे वहां उपस्थित ही नहीं थे। इस घटना के बाद सहवाग राइट के संबंधों में तेजी से सुधार हुआ। शायद सहवाग समझ गए थे कि राइट उनके अच्छे प्रदर्शन को लेकर कितने उतावले थे। सहवाग ने एक साक्षात्कार में राइट के बारे में बात करते हुए कहा, ‘वह एक दोस्त की तरह थे। हमारी संस्कृति हमें अपने बड़ों का सम्मान करना सिखाती है, ऐसे में कोच के सामने आपको अपने व्यवहार को लेकर थोड़ा संजीदा रहना पड़ता है।

लेकिन जॉन के साथ संजीदा रहने वाली कोई बात ही नहीं थी, वह एक दोस्त की तरह थे। हम उनके साथ हंसी-मजाक खूब करते थे। लेकिन वे प्रोफेशनलिज्म में कोई कौताही नहीं बरतते थे और अपने काम को लेकर बहुत संजीदा रहते थे। वह खिलाड़ी को देखकर उसकी प्रतिभा को समझ जाते थे। जब लोग मेरी क्षमता को लेकर शंका में थे तब जॉन को मेरी मानसिक मजबूती का पता था और उन्होंने मेरी बल्लेबाजी तकनीकि को बदलने की कभी बात नहीं की। जॉन को कमर की तकलीफ थी और मेरी मां को भी कमर की तकलीफ थी। मैच के दिनों में वे मुझसे पूछा करते थे, कैसे हो तुम? तुम्हारी मां की कमर कैसी है? आज तुम कैसा खेलोगो? एक बात मैं कभी नहीं भूल सकता जो उन्होंने मुझे बताई थी वह है अच्छे खिलाड़ी और महान खिलाड़ी में अंतर। उन्होंने मुझे बताया था कि महान खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करता हैं वहीं अच्छा खिलाड़ी लगातार नहीं बल्कि हर एक दो मैच में अच्छा प्रदर्शन करता है। सहवाग कहते हैं कि जब भी मैं खिलाड़ियों को मैदान में खराब शॉट खेलते देखता हूं तो मुझे जॉन राइट के उस गुस्सैल चेहरे की याद आ जाती है।