वीरेन्द्र सहवाग ने 2008 में एडिलेड टेस्ट के दौरान अपने स्वभाव के विपरीत अंदाज में खेलते हुए शतक बनाया था © Getty Images
वीरेन्द्र सहवाग ने 2008 में एडिलेड टेस्ट के दौरान अपने स्वभाव के विपरीत अंदाज में खेलते हुए शतक बनाया था © Getty Images

वीरेन्द्र सहवाग का नाम सामने आते ही हम सभी के दिमाग में एक आक्रामक बल्लेबाज की छवि सामने आ जाती है और ऐसा हो भी क्यों ना आखिर सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में 82 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हो और उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक जमाने का रिकॉर्ड दर्ज है। सहवाग के बारे में कहा जाता था कि वह किसी भी परिस्थिति में अपना स्वाभाविक खेल( यानी आक्रामक खेल) ही खेलते थे, धीमा खेल उनके स्वभाव के बिल्कुल विपरीत था वह एक- एक रन लेने की बजाय चौके-छक्के की मदद से रन बनाना ज्यादा पसंद करते थे। लेकिन अगर आपको कहा जाए कि सहवाग ने लगभग 30 ओवर विकेट पर रहते हुए एक भी चौका या छक्का नहीं लगाया तो क्या आप यकीन करेंगे? शायद सबका जवाब होगा नहीं। मगर यह सच है सहवाग ऐसा कर चुके हैं, उन्होंने लगभग 30 ओवर की बल्लेबाजी में कोई चौका या छक्का नहीं जमाया। तो आइए जानते हैं कब हुआ ये आश्चर्य और आखिर सहवाग की इस धीमी बल्लेबाजी की वजह क्या थी।

भारतीय टीम ने 2008 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे टेस्ट तक सीरीज में 2-1 की बढ़त ले ली थी और भारतीय टीम एडिलेड में चौथा और अंतिम टेस्ट मैच खेल रही थी। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सचिन तेंदुलकर के शानदार शतक की बदौलत 526 रनों का स्कोर बनाया जवाब में कंगारू टीम ने भी 563 रन बनाकर पहली पारी में बढ़त ले ली। भारतीय टीम ने दूसरी पारी में 1 रन पर ही पहला विकेट गंवा दिया था और मिस्टर भरोसेमंद राहुल द्रविड़ भी रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौट गए थे। भारतीय पारी मैच के पांचवे दिन खेल रही थी। पहले सत्र में सहवाग अपने अंदाज में ही बल्लेबाज करते रहे और अपने 50 रन मात्र 78 गेंदों पर 5 चौके और 1 छक्के की मदद से पूरा किया। इसके बाद द्रविड़ चोट की वजह से रिटायर्ड होकर पवेलियन लौटे गए। [Also Read: टेस्ट में भी हिट होने लगे हैं ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा]

पांचवे दिन ड्रिंक्स तक भारत ने 77 रन बना लिये थे। ड्रिंक्स के बाद सहवाग ने 35वें ओवर में अपना नौवां चौका जमाया। लेकिन जैसे ही सचिन तेंदुलकर आउट हुए सहवाग ने अपने खेल को बिल्कुल बदल दिया। इसके बाद लंच तक सहवाग ने कोई भी बड़ा शाट नहीं खेला और अपना शतक पूरा किया। 41वें ओवर में जब लंच हुआ तो उस समय तक सहवाग 9 चौके और 2 छक्कों की मदद से 103 रन बनाकर खेल रहे थे। लंच के बाद पूरे दूसरे सेशन में सहवाग ने अपने स्वभाव के विपरीत धीमी बल्लेबाजी रखी। सहवाग ने पूरे दूसरे सेशन में कोई चौका या छक्का नहीं लगाया। इस दौरान उन्होंने कई गेंदें शरीर पर भी झेली लेकिन आउट नहीं होने की जिद पर अड़े रहे। [Also Read: इन टीमों के खिलाफ सबसे ज्यादा बार जीती है टीम इंडिया]

जब पांचवे दिन का दूसरा सेशन खत्म हुआ तो टीम का स्कोर था भारतीय टीम 66 ओवरों में 210 रन बना चुकी थी और सहवाग 132 रन बनाकर विकेट पर टिके हुए थे लेकिन उनके चौकों और छक्कों की संख्या में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई थी। अंततः उन्होंने तीसरे सेशन में पारी के 68वें ओवर में जाकर चौका जड़ा। यानी सहवाग ने 35 से 67 ओवरों के 88 गेंदों का सामना किया और इस बीच एक भी चौका नहीं जड़ा। यह सहवाग की बल्लेबाजी ही थी जिसकी वजह से भारत ने यह टेस्ट मैच ड्रॉ कराया। [Also Read: महेन्द्र सिंह धोनी, एडम गिलक्रिस्ट और मार्क बाउचर का अनोखा गेंदबाजी रिकॉर्ड]

सहवाग जब लंच से चायकाल के बीच बिना चौका जड़े वापस ड्रेसिंग रूम में गए तो सभी उनको भौचक्का होकर देख रहे थे क्योंकि मैच बचाने के लिए सहवाग से इतनी धीमी पारी की उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी। सहवाग ने दूसरी पारी में 151 रनों की पारी खेली जिसमें उन्होंने 254 गेंदों का सामना करते हुए 11 चौके और 2 छक्के जमाए। यह पारी सहवाग की सबसे धीमी पारियों में है।