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शमार जोसफ- सिक्योरिटी गार्ड से चमकता सितारा- किसी परीकथा सी है इस पेसर की जिंदगी
इस सीरीज से पहले इस पेसर का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा. लेकिन अपने खेल से इसने दुनिया की सबसे मजबूत टीम को पस्त किया है.
Published On Jan 28, 2024, 11:38 PM IST
Last UpdatedJan 28, 2024, 11:38 PM IST
who is shamar joseph (Photo-X)
साल 2018 में उसके गांव बाराकारा (Baracara) में इंटरनेट आया था. और आज वह इंटरनेट पर सनसनी मचा रहा है. उसके गांव से सबसे नजदीकी शहर 225 किलोमीटर है. कैरेबियाई द्वीप गयाना के न्यू एम्सटर्डम से वहां पहुंचने के लिए नाव लेनी पड़ती है. क्रिकेट में वह इतना नया है कि एक साल पहले तक उसने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट भी नहीं खेला था. और तो और कप्तान क्रेग ब्रैथवेट की भी इस दौरे से पहले उससे मुलाकात नहीं हुई थी. लेकिन अब उसका नाम (Who is Shamar Joseph) दुनिया जानती है. और जाने भी क्यों न… आखिर उसने वह कर दिखाया जो 27 साल में नहीं हुआ. वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच हराया. पहली बार ऑस्ट्रेलिया पिंक बॉल टेस्ट मैच हारा. और इस ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी 24 साल के शमार जोसफ ने.
फिर ढहा गाबा का किला
कभी तेज गेंदबाजों की फौज रखने वाले वेस्टइंडीज का यह नया सेनापति है. और इसके आक्रमण से ऑस्ट्रेलिया का किला कहा जाने वाला गाबा ढह गया. तीन साल में दूसरी बार. पिछली बार वहां भारत का तिरंगा लहराया था. और इस बार मरून पताका हवा में झूम रही है.
चोट से चलना हो गया था मुश्किल
एक दिन पहले यानी 27 जनवरी को मिशेल स्टार्क की गेंद जोसफ के बाएं पांव के पंजे पर लगी. चोट इतनी भयानक थी उन्हें सहारा लेकर मैदान से बाहर जाना पड़ा. लगा मैच उनके लिए खत्म हो गया. स्कैन में फ्रैक्चर आया. अब तो न खेलना लगभग तय हो गया. लेकिन जोसफ ने अपने कप्तान से चौथे दिन के खेल से पहले कुछ शब्द कहे थे. और इसे निभाने के लिए उन्होंने जान लगा दी.
‘मैं आखिरी विकेट गिरने तक गेंद नहीं छोडूंगा.’ शमार जोसफ ने गाबा टेस्ट के चौथे दिन अपने कप्तान क्रेग ब्रेथवेट से ये शब्द कहे थे. और उन्होंने इस वादे को पूरी तरह निभाया.
वह मैदान पर पहुंचे तो अपनी जर्सी भी लेकर नहीं आए. टीम की हालत बिगड़ती देखी तो Zachary McCaskie की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरे. नियमानुसार जर्सी पर लिखे नाम को उन्होंने टेप से ढंका और आ गए खेलने. बाद में उनकी भी जर्सी मंगवाई गई. जोसफ ने तय कर लिया था कि ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ना है सो उन्होंने ऐसा किया.
सिक्योरिटी गार्ड से नैशनल टीम तक
साल 1999 की 31 अगस्त को पैदा हुए जोसफ में क्रिकेट का जूनून था. टैलंट भी था. क्षमता भी. और मेहनत का जज्बा भी. और जब इतना सब हो तो आगे बढ़ने से भला कौन रोक सकता है. जोसफ भी नहीं (Who is Shamar Joseph) रुके. परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी. तो आर्थिक रुकावट आई. इसे दूर करने के लिए जोसफ ने शहर आकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. खर्च चलाया. लेकिन दिल में तो क्रिकेट था. सो, जोसफ ने नौकरी और क्रिकेट के बीच संतुलन बनाने की भी कोशिश की. पर आखिर में प्यार हालात पर जीत गया. नौकरी छोड़कर जोसफ ने पूरा ध्यान क्रिकेट पर लगाया. रास्ता मुश्किल था लेकिन जोसफ ने उसे तय करने की ठान ली थी.
फर्स्ट क्लास से सीपीएल तक
मेहनत के दम पर जोसफ को गयाना के फर्स्ट क्लास टीम में जगह मिली. रास्ता खुलने लगा था. इसके बाद कैरेबियन प्रीमियर लीग में वह नेट बॉलर बन गए. लेकिन जैसाकि अकसर होता है. मेहनत को किस्मत का साथ (Who is Shamar Joseph) मिला. टीम का एक खिलाड़ी चोटिल हो गया. नेट्स पर जोसफ का खेल पहचाना जा चुका था. नतीजा उन्हें गयाना अमेजन वॉरियर्स, जो सीपीएल में गयाना की टीम है, से बुलावा आ गया. यहां उनकी रफ्तार ने सभी को चौंका दिया. फिट एथलीट और लगातार रफ्तार. इसने जल्द ही अपनी जगह बना ली. उनकी टीम चैंपियन बनी. और जोसफ की इसमें अहम भूमिका रही.
नई टीम को नहीं मिली तवज्जो
वेस्टइंडीज की टीम जब दो टेस्ट मैच खेलने ऑस्ट्रेलिया पहुंची तो इसे किसी ने तवज्जो नहीं दी. एक तो वेस्टइंडीज क्रिकेट का बहुत हद तक पतन हो चुका है. इसमें न रफ्तार से डराने वाले पेसर हैं. और न ही ब्रायन लारा, शिवनारायण चंद्रपॉल और कार्ल हूपर जैसे खिलाड़ी. ऊपर से यह टीम में बहुत नई थी. तो कोई भी दो मैचों की इस सीरीज के नतीजे को लेकर संशय में नहीं था.
इसी सीरीज के पहले मैच में जोसफ को टेस्ट डेब्यू करने का मौका (Who is Shamar Joseph) मिला. करियर की पहली ही गेंद पर उन्होंने स्टीव स्मिथ को स्लिप में कैच करवाया. इसके बाद भी उनका प्रदर्शन जारी रहा. पारी में उन्होंने पांच विकेट लिए. हालांकि वेस्टइंडीज वह मैच हार गई पर जोसफ के प्रदर्शन को सराहा गया. और अब गाबा में उन्होंने जो किया वह इतिहास में दर्ज हो गया.
यह जीत कितनी बड़ी है इसे समझना है तो महान बल्लेबाज ब्रायन लारा की आंखों को पढ़कर समझिए. उन आंखों में आंसू थे. खुशी के आंसू. उनका बयान था – ‘यह 27 साल बाद हुआ है. यह वेस्टइंडीज क्रिकेट के लिए गर्व का विषय है.’ और बेशक- यह वेस्टइंडीज क्रिकेट के लिए गौरव का पल है. और इस पल के नायक हैं शमार जोसफ. वही जोसफ जिन्होंने चौथे दिन जो वादा किया था- मैं आखिरी विकेट गिरने तक गेंद नहीं छोडूंगा…’
पांच साल पहले तक जिस गांव में इंटरनेट भी नहीं था आज 400 की आबादी वाला वह गांव अपने इस हीरो के बारे में नेट पर पढ़कर खुश तो हो रहा होगा.