सीमित ओवरों की क्रिकेट में नंबर वाली जर्सी क्यों पहनते हैं क्रिकेटर्स?
चित्र साभार: cricketcountry.com

क्रिकेट वैसे तो 18वीं शताब्दी में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश कर गया था। लेकिन इस खेल में आधुनिकता 19वीं सदी के उत्तरार्ध में ही शुरू हुई। 1980 के दशक में जहां क्रिकेट की जर्सी के साथ प्रयोग किया गया और रंगीन जर्सी का प्रचलन शुरू हुआ। तो 1992 के विश्व कप के बाद से रंगीन जर्सी सीमित ओवरों की क्रिकेट का अभिन्न अंग बन गई। यही नहीं इस विश्व कप में पहली बार क्रिकेटरों की जर्सी में देश का नाम व क्रिकेटरों का नाम नजर आया। लेकिन अभी क्रिकेट की जर्सी में और भी तब्दीलियां होनी बाकी थीं और साल 1995 में सीमित ओवरों की क्रिकेट की इस जर्सी में नंबरों को जोड़ा गया जो बाद में कई क्रिकेटरों की पहचान के साथ जुड़ गए। उदाहरण के तौर पर सचिन तेंदुलकर की जर्सी का नंबर 10 है तो महेंद्र सिंह धोनी की जर्सी का नंबर सात, लेकिन इस बीच सवाल उठता है कि जर्सियों में नंबरों का वितरण किस आधार पर शुरू किया गया। आइए जानते हैं। 

साल 1995-96 में ऑस्ट्रेलिया में खेली गई वर्ल्ड सीरीज कप में पहली बार वनडे क्रिकेट की जर्सी में नंबरों का इस्तेमाल किया गया। इस सीरीज में कई खिलाड़ियों को नंबर दिए गए तो कई खिलाड़ियों ने खुद की पसंद के आधार पर अपनी जर्सियों के लिए नंबर चुने। शेन वॉर्न ने अपनी जर्सी का नंबर 23 इसलिए चुना क्योंकि जब वह एक क्लब के लिए फुटबॉल खेला करते थे तब उनका नंबर यही था। कुछ सालों के बाद दूसरे देशों ने भी वनडे क्रिकेट में नंबरों वाली जर्सी को अपनाना शुरू कर दिया। वहीं विश्व कप में नंबरों वाली जर्सी की बात करें तो इसका इस्तेमाल सबसे पहले 1999 में हुआ। 

इस टूर्नामेंट में टीम का कप्तान एक नंबर की जर्सी पहनता था तो टीम के बाकी खिलााड़ी 2 से 15 नंबरों के बीच वाले नंबरों की जर्सी पहने हुए थे। लेकिन इसमें एक अलग बात भी देखने को मिली। जब दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैन्सी क्रोन्जे ने ओपनर गैरी कर्स्टन से अपने एक नंबर की जर्सी बदल ली और उनकी 5 नंबर की जर्सी पहन ली। आगे के सालों में कुछ खिलाड़ियों ने अपनी जर्सी के नंबरों को बदल भी दिया। ऑस्ट्रेलिया के जैसन गिलेस्पी ने साल 2000 में अंधविश्वास के कारण अपनी 13 नंबर की जर्सी की जगह 4 नंबर की जर्सी पहनना शुरू कर दी। वहीं साल 2004-05 में चैपल- हेडली सीरीज के दौरान डेरेन लेहमन ने अपनी जर्सी नंबर 25 की जगह जर्सी नंबर 10 पहनना शुरू कर दी। यह उन्होंने अपने बचपन के हीरो बेरी रॉबरन की याद में किया।

वहीं अगर टेस्ट क्रिकेट में जर्सी में छोटे अक्षरों की बात करें तो वह क्रिकेटरों के विश्व क्रिकेट में पर्दापण साल से जुड़ा हुआ है। जैसे इंग्लैंड के माइकल वॉन टेस्ट में 600 नंबर की जर्सी पहना करते थे। उनकी जर्सी पर 600 नंबर इसलिए लिखा था, क्योंकि इतिहास के हिसाब से वह इंग्लैंड के 600वें टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी थे।