Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - February 15, 2016 11:46 AM IST


टी20 क्रिकेट के लिहाज से भारतीय टीम के लिए साल 2016 का आगाज अब तक बेहतरीन रहा है। पहले ऑस्ट्रेलिया का उसी की धरती पर 3-0 से सफाया करने के बाद श्रीलंका को 2-1 से हराकर टीम इंडिया के हौसले बुलंद हैं। चूंकि दो बड़े टूर्नामेंट्स अगले कुछ दिनों में ही शुरू होने जा रहे हैं ऐसे में यह आत्मविश्वास भारतीय टीम के लिए मददगार साबित होगा। भारतीय टीम टी20 क्रिकेट में नंबर एक टीम तो है ही साथ में आगामी विश्व कप को लेकर भी भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के दिमाग में रणनीतियों को सही दिशा में ले जाने का दबाव होगा। पिछले दिनों में टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने सभी विभागों में जबरदस्त प्रदर्शन किया है और ऐसे में अंतिम एकादश को लेकर धोनी के सामने एक विकराल सवाल आकर खड़ा हो गया है। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में टीम के मुख्य खिलाड़ी विराट कोहली टीम के हिस्सा नहीं थे ऐसे में जब वह लौटेंगे तो धोनी किस खिलाड़ी को उनकी जगह बाहर बिठाएंगे। यह सवाल अब धोनी के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। ये भी पढ़ें: तीसरे टी20 में भारतीय जीत के 5 कारण
दिल्ली में जब 5 फरवरी को टीम के चयन के लिए संदीप पाटिल और अनुराग ठाकुर ने टीम की घोषणा की थी तो उन्होंने इस बात को साफ कर दिया था कि एशिया कप में किसी भी प्रकार का प्रयोग नहीं किया जाएगा, लेकिन सवाल उठता है कि क्या बिना प्रयोग के बात बनेगी? टीम में अगर एक सरसरी भरी नजर दौड़ाएं तो सिर्फ तीन खिलाड़ी हैं जिनकी जगह विराट कोहली अंतिम एकादश में जगह सकते हैं। वो हैं युवराज सिंह, हार्दिक पांड्या और अजिंक्य रहाणे। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में अगर इन तीनों के प्रदर्शन पर निगाह दौड़ाई जाए तो रहाणे की एक मात्र बल्लेबाज हैं जिन्हें तीनों बार बल्लेबाजी का मौका मिला और उन्होंने एक बार नाबाद रहते हुए क्रमशः 5, 25 और 22* रन बनाए। ये भी पढ़ें: आर. अश्विन ने टी20 क्रिकेट में बनाए कई रिकॉर्डस
वहीं युवराज और हार्दिक को दो-दो बार बल्लेबाजी का मौका मिला। बहरहाल, इस मामले में हार्दिक ने युवराज को पीछे छोड़ दिया और दो पारियों में क्रमशः 2 और 27 रन बनाए चूंकि हार्दिक ने दूसरे मैच में जिस तरह से आतिशी बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश किया था उससे उनके मौके अंतिम एकादश के लिए ज्यादा बन जाते हैं। साथ ही एक अन्य लाभ उनकी मीडियम पेस गेंदबाजी भी है। अब सीधी लड़ाई युवराज और रहाणे के बीच की है। युवराज को श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में ऊपरी क्रम में खेलेने का मौका नहीं मिला जिसकी वजह से वह कुछ खास नहीं कर सके, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने जरूर प्रभावित किया है। दूसरे मैच में उन्होंने किफायती गेंदबाजी की थी। ऐसे में उन्हें बतौर बैटिंग ऑलराऊंडर टीम में मौका दिया जा सकता है। बहरहाल, विश्व कप के पहले एशिया कप खेला जाना है। ऐसे में अंतिम एकादश के लिए रहाणे और युवराज में से एक को अपने प्रदर्शन के आधार पर दावेदारी प्रस्तुत करनी होगी।
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