कंगारू तेज गेंदबाज का बड़ा बयान, शेन वार्न को इशारों पर नचाते थे सचिन तेंदुलकर

मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर को भारत में क्रिकेट का भगवान माना जाता है. तेंदुलकर ने शतकों का शतक बनाया, जिसे आजतक कोई खिलाड़ी नहीं तोड़ पाया है. ऑस्‍ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली का मानना है कि तेंदुलकर का कई बार शेन वार्न से आमना-सामना हुआ. हर बार सचिन ही इस स्पिनर को इशारे पर नचाते हुए नजर आए.

सचिन तेंदुलकर और शेन वार्न जब खेला करते थे तो उनके बीच की जंग बहुचर्चित हुआ करती थी और अब आस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने स्वीकार किया इसमें अधिकतर भारतीय स्टार ही अव्वल साबित हुआ जिन्होंने उनके साथी गेंदबाज को कई बार अपने इशारों पर नचाया.

ब्रेट ली ने स्‍टॉर स्टार स्पोर्ट्स के कार्यक्रम में कहा, ‘‘तेंदुलकर कुछ अवसरों पर विकेट से आगे आकर वार्न को शार्ट पिच गेंद करने के लिये मजबूर करते थे. कुछ अवसरों पर वह बैकफुट पर जाकर गेंद का इंतजार करते और खूबसूरत शॉट खेलते थे.’’

‘‘शेन वार्न के साथ बहुत कम बल्लेबाज ऐसा कर सकते थे क्योंकि वह बेहद प्रतिभाशाली था लेकिन कई अवसरों पर सचिन तेंदुलकर ऐसा करता था. ’’

…12 मौकों में केवल 3 बार निकाला सचिन का विकेट 

ली ने कहा कि तेंदुलकर को आउट करने के लिये वार्न कई तरह के वैरीएशन भी अपनाते थे लेकिन भारतीय दिग्गज गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटते ही उसका सही अनुमान लगाने में माहिर थे और ऐसे में दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशान करने वाले वार्न उनके सामने नाकाम रहे.

ब्रेट ली ने कहा, ‘‘सचिन जिस तरह गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटते ही उसे समझ जाते थे और भिन्न तरह की गेंदों को खेलने के लिये भिन्न तकनीक का उपयोग करते थे वह लाजवाब था. वार्न कई बार हवा में गेंद को दिशा देने की कोशिश करता था तो कई बार नहीं. जब भी वह गेंद में वैरीएशन लाता था कि सचिन उसे समझ लेता था.’’

उन्होंने कहा, ‘‘वार्न ने दुनिया भर के अन्य बल्लेबाजों को परेशानी में डाला लेकिन सचिन अन्य बल्लेबाजों की तुलना में गेंद का सही अनुमान लगाता था. वार्न को इससे नफरत थी. वह वापस आकर कहता था कि उसने सचिन को आउट करने के लिये अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किये लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया. ’’

….जब पहली बार ली का ि‍शिकार बने सचिन

वार्न 12 टेस्ट मैचों में केवल तीन बार तेंदुलकर को आउट कर पाये थे. ली ने 2003 मेलबर्न में खेले गये ‘बाक्सिंग डे’ टेस्ट मैच का भी जिक्र किया जब उन्होंने पहली बार तेंदुलकर का सामना किया और पहली गेंद पर ही उन्हें विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के हाथों कैच कराया.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब 22 साल का था जब मुझे लिटिल मास्टर के खिलाफ खेलने का पहला अवसर मिला. मेरी गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर गयी और मुझे लगा कि मैंने अपना काम कर दिया. मुझे टेस्ट मैच की परवाह नहीं थी क्योंकि मैं सचिन तेंदुलकर को आउट करके बहुत खुश था.’’