बॉल ट्रेंकिंग से खुश नहीं हैं पूर्व कप्तान, कहा- अगर गेंद स्टंप पर लग रही है तो बल्लेबाज को एलबीडब्ल्यू आउट दें

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल (Ian Chappell) का कहना है कि एलबीडब्ल्यू से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाने की जरूरत है। इस दिग्गज खिलाड़ी का मानना है कि अगर गेंद विकेटों से टकरा रही है तो बल्लेबाज को आउट दिया जाना चाहिए फिर चाहे गेंद कहीं भी पिच हुई हो या फिर किसी भी लाइन पर बल्लेबाज से टकराई हो।

बता दें कि मौजूदा क्रिकेट में बॉल ट्रेंकिंग तकनीक के जरिए डीआरएस के तहत एलबीडब्ल्यू फैंसलों का रीव्यू किया जाता है। इस तकनीक में गेंदबाज के हाथ से छूटने के बाद डेड होने तक गेंद का पूरा पथ मापा जाता है और फिर उसे 3D में दिखाया जाता है। बल्लेबाज को एलबीडब्ल्यू आउट देने के लिए ट्रेकिंग में गेंद स्टंप की लाइन में पिच होनी चाहिए और इम्पैक्ट भी लाइन के अंदर ही होना चाहिए, इसके बाद चेक किया जाता है कि गेंद स्टंप पर लगती या नहीं। तीनों सिग्नल ग्रीन होने पर बल्लेबाज को आउट दिया जाता है। हालांकि चैपल इसे सही नहीं मानते हैं।

‘ईएसपीएनक्रिकइंफो’ पर अपने कॉलम में चैपल ने लिखा, ‘‘नए पगबाधा नियम इस तरह होने चाहिए: कोई भी गेंद अगर बल्ले से टकराए बिना अगर पहले पैड से टकराती है और अंपायर के नजरिए से अगर स्टंप से टकरा रही है तो आउट दिया जाना चाहिए, फिर भले की शॉट खेला गया हो या नहीं। भूल जाइए कि गेंद कहां पिच हुई और ये पैड से स्टंप की लाइन पर टकराई या नहीं। अगर गेंद स्टंप से टकरा रही है तो आउट दिया जाना चाहिए।’’

76 साल के चैपल ने कहा कि बल्लेबाज एलबीडब्ल्यू के नियमों में इस तरह का बदलाव किए जाने से खुश नहीं होंगे लेकिन इससे खेल निष्पक्ष होगा। उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर इस पर बल्लेबाज हाय-तौबा मचाएंगे लेकिन ये बदलाव खेल में काफी सकारात्मक चीजें लेकर आएगा। सबसे महत्वपूर्ण ये है कि खेल निष्पक्ष होगा। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर गेंदबाज नियमित रूप से स्टंप को निशाना बनाने को तैयार है तो बल्लेबाज को सिर्फ बल्ले से अपना विकेट बचाना चाहिए। पैड बल्लेबाज को चोट से बचाने के लिए हैं, आउट होने से बचाने के लिए नहीं। इससे दाएं हाथ के बल्लेबाज के लेग स्टंप के बाहर रिस्ट स्पिनर के गेंद पिच कराने से निपटने के लिए बल्लेबाजों को आक्रामक रुख अपनाने को बाध्य होना पड़ेगा।’’

उन्होंने सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया जिन्होंने भारत में 1997-98 की सीरीज के दौरान शेन वार्न की राउंड द विकेट गेंदबाजी की रणनीति का अच्छी तरह सामना किया था। चैपल ने कहा, ‘‘1997-98 में चेन्नई में राउंड द विकेट गेंदबाजी कर रहे शेन वार्न के खिलाफ सचिन तेंदुलकर का आक्रामक और सफल रवैया या फिर लेग स्टंप के बाहर पिच होकर स्टंप की तरफ आ रही गेंद पर बल्लेबाज का पैर मारना। आप क्या देखना पसंद करेंगे?’’

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा नियम लेग साइड के बाहर पिच होने वाली गेंदों के खिलाफ पैड से खेलने को प्रोत्साहित करते हैं जबकि यह बदलाव उन्हें अपने बल्ले का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य करेगा। ये बदलाव स्टंप को निशाना बनाने वाले गेंदबाजों को फायदा देगा और आफ साइट में अधिक लोगों के साथ लेग साइड के बाहर नकारात्मक गेंदबाजी की जरूरत को कम करेगा।’’

गेंद को चमकाने के नए तरीके ढूंढे कप्तान

चैपल ने साथ ही कहा कि कप्तानों को गेंद पर काम करने के एक तरीके पर सहमति बनानी होगी जिससे कि स्विंग गेंदबाजी को प्रोत्साहन मिले। कयास लगाए जा रहे हैं कि कोविड-19 के बाद खेल शुरू होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद लार की जगह कृत्रिम पदार्थ के इस्तेमाल की स्वीकृति देने पर विचार कर रहा है। चैपल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कप्तानों को लार के बिना गेंद को चमकाने का तरीका ढूंढना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘गेंद से छेड़छाड़ हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है, अतीत में मैंने सुझाव दिया था कि प्रशासक अंतरराष्ट्रीय कप्तानों से कहें कि वे प्राकृतिक पदार्थों के इस्तेमाल की सूची तैयार करेंगे जिनके बारे में गेंदबाजों को लगता है कि इससे गेंद को स्विंग कराने में मदद मिलेगी। इस सूची में से प्रशासकों को एक तरीका चुनना चाहिए जिसे वैध बनाया जाए और अन्य सभी तरीकों के लिए अवैध के रूप में सजा दी जानी चाहिए।’’