पाकिस्तान के सबसे बड़े फैन 'चाचा क्रिकेट' अब मैदान पर नहीं दिखेंगे, संन्यास का किया ऐलान
चाचा क्रिकेट ने पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास को अपनी आंखों के सामने बनते और बदलते देखा है. 1986 में शारजाह में जावेद मियांदाद का भारत के खिलाफ आखिरी गेंद पर लगाया गया वो मशहूर छक्का आज भी उनकी सबसे पसंदीदा याद है.
Published On May 30, 2026, 04:31 PM IST
Last UpdatedMay 30, 2026, 04:31 PM IST
Chacha Cricket
हरा कुर्ता, सफेद टोपी और हाथ में पाकिस्तान का झंडा ,यह सिर्फ एक शख्स की पहचान नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास का एक यादगार चेहरा बन चुका है. जिसे पकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल पाएंगे , क्रिकेट जगत के सबसे मशहूर और समर्पित फैंस में से एक हैं पाकिस्तान के ‘चाचा क्रिकेट’ (अब्दुल जलील). पाकिस्तान के सबसे जबरदस्त फैन ‘चाचा क्रिकेट’ ने आखिरकार स्टेडियम से विदाई लेने का फैसला कर लिया है, एक ऐसा दर्शक जिसने पाकिस्तान क्रिकेट को दिल से सपोर्ट किया.
क्रिकेट ही नहीं कोई भी खेल बिना दर्शको के अधूरा रहता है और उस पर ऐसा सच्चा फैन मिल जाये तो सोने पर सुहागा के समान होता है. 77 साल के ‘चाचा क्रिकेट’ उन्ही में से एक है. अगले हफ्ते लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में होने वाली पाकिस्तान बनाम ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज के बाद घरेलू मैदानों पर वह अब टीम को चीयर करते नहीं दिखेंगे.
1968 से शुरू हुआ था सफर
चाचा क्रिकेट का खेल से रिश्ता आज का नहीं, बल्कि करीब 6 दशकों पुराना है. जो 1968-69 में लाहौर में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एक टेस्ट मैच से शुरू हुआ था. UAE में नौकरी के बावजूद वो क्रिकेट को देखना नहीं भूले थे. उनकी लोकप्रियता को देखते हुए 1996 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने उन्हें टीम का आधिकारिक शुभंकर घोषित कर दिया , इसके दो साल बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और खुद को पूरी तरह क्रिकेट के नाम कर दिया.
500 मैचों का सपना पूरा, खुलेगा क्रिकेट म्यूजियम
चाचा का एक सपना था कि वो 500 इंटरनेशनल क्रिकेट को लाइव बैठकर अपनी टीम का सपोर्ट करे हालांकि उनका यह जादुई आकड़ा जब पार हो चुका है तो वह सियालकोट में एक म्यूज़ियम खोलने की तैयारी में है जिसमें क्रिकेट जगत की सारी पुरानी यादों को संजोकर रखेंगे जो वह सालों से कमा कर रखे हैं.
जावेद मियांदाद का छक्का है सबसे पसंदीदा याद
चाचा क्रिकेट ने पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास को अपनी आंखों के सामने बनते और बदलते देखा है. 1986 में शारजाह में जावेद मियांदाद का भारत के खिलाफ आखिरी गेंद पर लगाया गया वो मशहूर छक्का आज भी उनकी सबसे पसंदीदा याद है. 1999 के वर्ल्ड कप से लेकर दुनिया के लगभग हर बड़े टूर्नामेंट में उन्होंने पाकिस्तान टीम का हौसला बढ़ाया.
कुछ जख्म जो आज भी तकलीफ देते हैं
2011 मोहाली की हार भारत के खिलाफ वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में मिली शिकस्त का दर्द , और 2024 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मिली निराशाजनक हार जिसने उन्हें काफी परेशान किया.
हालांकि, हाल के सालों में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है, लेकिन चाचा क्रिकेट का नजरिया नहीं बदला , उनका कहना है, “कभी खुशी, कभी गम… कभी तुम, कभी हम. खेल में ऐसा होता है. क्रिकेट चाचा की यही सकारात्मक सोच उन्हें एक साधारण प्रशंसक से उठाकर क्रिकेट इतिहास का एक अमर किरदार बनाती है.