भारतीय युवा सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) क्रिकेट से दूर रहकर बेहद निराश हैं। भारत के लिए शानदार टेस्ट डेब्यू करने के बाद शॉ पहले इंजरी और फिर प्रतिबंधित दवा सेवन मामले में लगे बैन के चलते क्रिकेट के मैदान से दूर रहे। और जब उन पर लगा बैन खत्म हुआ तो कोरोना वायरस महामारी की वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर ब्रेक लग गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में शॉ ने कहा, “टीम इंडिया में वापसी के बाद मुझे लगता था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। जाहिर तौर पर कोविड-19 ने मेरा मूमेंटम तोड़ दिया लेकिन आपको ऐसे हालात में अपने देश का साथ देना होता है। हमें एक साथ आना होगा और स्वीकार करना होगा कि ये महामारी यहां है। आपको घर पर रहना होगा।”

अगर सब तय शेड्यूल के हिसाब से होता तो शॉ फिलहाल दिल्ली कैपिटल्स के लिए इंडियन प्रीमियर लीग में खेल रहे होते। उन्होंने कहा, “हां, मैं आईपीएल खेल रहा होता अगर सबकुछ ठीक होता। मैं उन पलों को याद कर रहा हूं, जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।”

शॉ ने आगे कहा, “मैं क्रिकेट को मिस करता हूं और इस देश के क्रिकेट कल्चर को मिस करता हूं। हालांकि, हमें संघर्ष कर रहे लोगों के बारे में सोचना चाहिए और इस महामारी से लड़ना चाहिए। डॉक्टर, नर्स, सरकारी अधिकारी और पुलिस को सलाम।”

अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 विश्व कप जिताने और वेस्टइंडीज में किए शानदार टेस्ट डेब्यू करने के बाद शॉ का करियर सफलता की राह से भटक गया। इस बारे में शॉ ने कहा, “हां, अंडर-19 विश्व कप जीतना और फिर डेब्यू टेस्ट में शतक लगाना मेरे करियर के बड़े पल थे लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं भटक गया।”

उन्होंने कहा, “डोपिंग और बाकी चीजें मेरे नियंत्रण में थी लेकिन एड़ी में लगी चोट मेरे नियंत्रण में नहीं थी। मैं समझ गया हूं कि मैं सभी लोगों को हर समय खुश नहीं रख सकता। हालांकि आलोचना जीवन का हिस्सा है। मेरा विचार है इससे सकारात्मक आलोचना लेकर सुधार करते रहने का है।”

शॉ ने आगे कहा, “2019 उतना अच्छा नहीं था लेकिन हर चीज में कुछ ना कुछ सकारात्मक होता है। मैं इन सबका जवाब अपने बल्ले से देना चाहता हूं। मुश्किल समय आपके चरित्र की परीक्षा लेता है। मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरे पास मेरे पिता और करीबी दोस्त और मेरी मैनेजमेंट एजेंसी है जिन्होंने मुश्किल समय में मेरा साथ दिया।”