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मुंबई के 'विवियन रिचर्ड्स' का निधन, सचिन तेंदुलकर ने उनके बल्ले से लगाया था पहला शतक

प्रतिभा के बावजूद गुरव कभी सीनियर स्तर तक नहीं पहुंच पाए, उन्होंने अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर क्रिकेट खेला और साथ ही आचरेकर के ‘ससानियन क्रिकेट क्लब’ और ‘कामत मेमोरियल’ का भी प्रतिनिधित्व किया.

Edited By : Akhilesh Tripathi |Apr 01, 2026, 09:16 PM IST

Published On Apr 01, 2026, 09:16 PM IST

Last UpdatedApr 01, 2026, 09:16 PM IST

Anil Gurav

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Anil Gurav Passes away: द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच दिवंगत रमाकांत आचरेकर के शुरुआती शिष्यों में से एक और अपनी बल्लेबाजी के कारण दोस्तों के बीच ‘मुंबई के विवियन रिचर्ड्स’ के नाम से मशहूर पूर्व क्रिकेटर अनिल गुरव का निधन हो गया. आचरेकर के सबसे बेहतरीन शिष्यों में से एक माने जाने वाले गुरव कभी क्लब स्तरीय क्रिकेट से आगे बढ़कर मुंबई टीम में जगह नहीं बना पाए, मंगलवार को मुंबई के नालासोपारा स्थित उनके आवास पर उन्होंने आखिरी सांस ली.

गुरव शारदाश्रम विद्यामंदिर में दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली से कुछ साल सीनियर थे, कहा जाता है कि कोच आचरेकर आगे चलकर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों बल्लेबाजों को गुरव को नेट पर बल्लेबाजी करते हुए देखने के लिए ले जाया करते थे.

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आचरेकर के सबसे पसंदीदा शिष्यों में से एक थे अनिल गुरव

मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के अनुभवी क्यूरेटर और पार्षद नदीम मेमन ने याद करते हुए कहा, आचरेकर सर सचिन और दूसरों को नेट पर गुरव की बल्लेबाजी देखने के लिए कहते थे, वह एक ऐसे खिलाड़ी थे जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता था. उन्होंने कहा, वह आचरेकर सर के सबसे पसंदीदा शिष्यों में से एक थे.

मुंबई का विवियन रिचर्ड्स कहा जाता था

प्रतिभा के बावजूद गुरव कभी सीनियर स्तर तक नहीं पहुंच पाए, उन्होंने अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर क्रिकेट खेला और साथ ही आचरेकर के ‘ससानियन क्रिकेट क्लब’ और ‘कामत मेमोरियल’ का भी प्रतिनिधित्व किया. मेमन ने कहा, ‘उनके दोस्त उन्हें ‘मुंबई का विवियन रिचर्ड्स’ सिर्फ इसलिए नहीं कहते थे कि उनका स्क्वायर कट विवियन जैसा लगता था बल्कि इसलिए भी कि वह लेग साइड पर भी उतने ही बेहतरीन बल्लेबाज थे.

सचिन तेंदुलकर ने उनके बल्ले से जड़ा था पहला शतक

यह भी माना जाता है कि गुरव ने अपने स्कूली दिनों में सचिन तेंदुलकर को अपना बल्ला दिया था जिससे इस महान बल्लेबाज ने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में अपना पहला शतक बनाया.

कहा जाता है कि गुरव के भाई अजित कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल थे जिसके कारण उनके परिवार को पुलिस की तरफ से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जहां एक ओर उनका क्रिकेट करियर कभी परवान नहीं चढ़ पाया वहीं दूसरी ओर गुरव को शराब पीने की लत लग गई और वह धीरे-धीरे इस खेल से दूर होते चले गए.

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