अर्जुन राणातुंगा © AFP
अर्जुन राणातुंगा © AFP

श्रीलंका को 1996 में वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले पूर्व कप्तान अर्जुन राणातुंगा ने टीम इंडिया के फैंस पर विवादित बयान दिया है। तीसरे वनडे में श्रीलंका के फैंस ने मैदान पर प्लास्टिक की बोतलें फेंकी थी जिस पर राणातुंगा ने नसीहत देते हुए कहा कि श्रीलंकाई लोग भारतीय फैंस की तरह बर्ताव करना बंद करें। एक कार्यक्रम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राणातुंगा ने कहा, ‘इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होना चाहिए। श्रीलंकाई लोग क्रिकेट से प्यार करते हैं और जब टीम हारती है तो वो उदास होते हैं। हमने श्रीलंका के क्रिकेट के लिए कई बलिदान दिए हैं। हमारी टीम का हर खिलाड़ी मानसिक रूप से उदास है, ऐसे में मैं सभी श्रीलंकाई क्रिकेट फैंस से निवेदन करता हूं कि वो भारतीय फैंस की तरह हरकत ना करें। हमारा इतिहास शानदार रहा है। इस तरह का बर्ताव हमारी परंपरा और इतिहास को शोभा नहीं देता।’

श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन राणातुंगा का ये बयान शर्मनाक है। माना कि भारत में भी दर्शकों ने इस तरह की हरकत की है लेकिन श्रीलंका के दर्शकों को नसीहत देने के लिए भारतीय दर्शकों पर सवाल उठाना कितना जायज है। सिर्फ भारतीय क्रिकेट प्रेमी नहीं दुनिया के दूसरे देशों के फैंस ने भी मैदान पर इस तरह की हरकत की है लेकिन अर्जुन राणातुंगा का सिर्फ भारतीय फैंस का नाम लेना सरासर गलत है। अर्जुन राणातुंगा अपनी संस्कृति और इतिहास को शानदार बता रहे हैं और दूसरी ओर भारतीय दर्शकों पर सवाल खड़े कर क्या वो हिंदुस्तान की संस्कृति का अपमान नहीं कर रहे? एम एस धोनी ने क्यों कहा था कि अगर ‘एक पैर’ बचेगा तब भी खेलूंगा पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला

तीसरे वनडे में क्या हुआ था?

भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे तीसरे वनडे में श्रीलंकाई दर्शकों ने स्टेडियम में जमर हंगामा किया था। अपनी टीम की हार तय दिखते ही प्रशंसकों ने स्टेडियम में हंगामा करना शुरू कर दिया और स्टेडियम में जमकर खाली बोतलें फेंकने लगे। हालात इतने खराब हो गए और अंपायरों को मैच रोकना पड़ा। जब मैच रोका गया तो भारत का स्कोर 44 ओवर में 210/4 था और भारत को जीतने के लिए सिर्फ 8 रन चाहिए थे जबकि टीम के 6 विकेट बचे थे। मैच को लगभग आधे घंटे से भी ज्यादा देर तक रोका गया। हालांकि इस दौरान स्टेडियम को लगभग खाली कराने के बाद ही दोबारा मैच शुरू हो सका।