Ashish Nehra: If I could, I would change the afternoon in Johannesburg during 2003 World Cup final
नेहरा ने 2003 वनडे विश्व के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया था © Getty Images

यदि आप स्प्रिंट नहीं लगा सकते तो दौड़ें, दौड़ नहीं सकते तो जॉगिंग करे और वह भी नहीं कर सकते तो पैदल तो चल ही सकते हैं लेकिन कुछ ना कुछ जरूर करते रहें। ये कहना है भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा का जो जल्दी ही क्रिकेट को अलविदा कहने जा रहे हैं। अपने बीस साल के करियर में 163 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके नेहरा ने 12 बार आपरेशन के बावजूद ऊर्जा नहीं खोई। वह सच में जिंदादिली की जीती जागती मिसाल हैं। नेहरा अपने करियर से काफी खुश हैं लेकिन उन्हें 2003 विश्व कप फाइनल हारने का दुख आज भी है। अपने आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘यह सफर शानदार रहा, एक ही मलाल रहा है। अगर मुझे इन 20 साल में कुछ बदलना हो तो जोहान्सबर्ग में 2003 विश्व कप फाइनल का दिन बदलना चाहूंगा लेकिन यह सब किस्मत की बात है।”

दिल्ली के सोनेट क्लब से क्रिकेट के सफर का आगाज करने वाले नेहरा ने कहा, ‘‘कोटला पर मेरे पहले रणजी मैच के दौरान दिल्ली टीम में दिवंगत रमन लांबा, अजय शर्मा, अतुल वासन और रॉबिन सिंह जूनियर थे। रमन भैया और अजय भैया को देखकर मैने गेंदबाजी सीखी थी। मैं अपने पहले रणजी मैच में तीसरे गेंदबाज के रूप में उतरा था और दोनों पारियों में अजय जडेजा को शून्य पर आउट किया था।’’ उन्होंने कहा ,‘‘मेरी नजर में अजय जडेजा और महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट की समझ के मामले में जीनियस हैं।’’

बीसीसीआई के पूर्व महाप्रबंधक एमवी श्रीधर का निधन
बीसीसीआई के पूर्व महाप्रबंधक एमवी श्रीधर का निधन

जॉन राइट के दौर में उम्दा प्रदर्शन करने वाले नेहरा ने ग्रेग चैपल के कोच रहते खराब दौर देखा और फिर गैरी कर्स्टन के दौर में वापसी की तथा आखिर में रवि शास्त्री कोच रहे। नेहरा ने कहा ,‘‘मैने 2005 में दो सीरीजों के अलावा ग्रेग चैपल के साथ ज्यादा नहीं खेला। मुझे पहली सीरिज से ही मालूम था कि ग्रेग के अंडर में ये बिरयानी खिचड़ी बनने वाली है।’’ भारत को दूसरा विश्व कप जिताने वाले गैरी कर्स्टन की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘गैरी बेहतरीन कोच थे, वह एमएस के साथ मैदान पर रणनीति को लेकर बात करते लेकिन कभी एम एस के काम में दखल नहीं देते थे। मेरा वैसे अभी भी मानना है कि चैपल जूनियर्स के लिये अच्छे कोच साबित होते।’’

विराट कोहली के लिये उन्होंने शास्त्री को आदर्श कोच बताया। उन्होंने कहा ,‘‘विराट ऐसे मुकाम पर है कि उसे ज्ञान नहीं सहयोग की जरूरत है जो रवि उसे दे रहा है। रवि के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यदि कोई खिलाड़ी खराब दौर से जूझ रहा है तो वह उसके साथ खड़ा होता है। वह नेट पर भी अच्छा नहीं खेल पा रहा हो तो भी वह उसे भरोसा दिलाएगा कि वह ब्रायन लारा जैसा बल्लेबाज है। बाहरी व्यक्ति को यह अजीब लग सकता है लेकिन क्रिकेट को समझने वाले जानते हैं कि यह मैन मैनेजमेंट है।’’

विराट कोहली ने एबी डीविलियर्स को पीछे छोड़ा, फिर से बने नंबर 1 वनडे बल्लेबाज
विराट कोहली ने एबी डीविलियर्स को पीछे छोड़ा, फिर से बने नंबर 1 वनडे बल्लेबाज

यह पूछने पर कि क्या वह भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच बनना चाहेंगे, नेहरा जी ने कहा ,‘‘कोचिंग और कमेंट्री करना चाहूंगा लेकिन भारतीय टीम की बात कर रहे हैं तो 2019 विश्व कप तक तो ऐसा कोई इरादा नहीं। फिर देखते हैं कि क्या होता है। आखिर में उन्होंने कहा, “मेरे 20 साल काफी रोमांचक रहे हैं। मैं बहुत जज्बाती नहीं हूं। अगले 20 साल का मुझे इंतजार है। उम्मीद है कि यह भी उतने ही रोमांचक होंगे जितने पिछले 20 साल रहे हैं जब मैने 1997 में दिल्ली के लिए खेलना शुरू किया था।’’