कोरोनावायरस (Coronavirus) देखतेे ही देखते विकराल रूप लेता जा रहा है। 21 दिन के लॉकडाउन का आधा वक्‍त अब बीत भी चुका है। हर कोई अपने घर में कैद है, जिसके चलते भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी प्रैक्टिस भी नहीं कर पा रहे हैं। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा (Ashish Nehra) का मानना है कि लगातार तीन महीने से ज्यादा समय तक नहीं दौड़ना तेज गेंदबाजों की फिटनेस में बाधा बन सकता है.

नेहरा ने कहा, “बल्‍लेबाज योग और ट्रेनिंग से खुद को फिट बनाये रख सकते हैं लेकिन तेज गेंदबाजों के लिये सिर्फ इन सबसे काम नहीं चलेगा और उन्हें जल्द ही दौड़ना शुरू करना होगा. देश में अभी तक कोरोनावायरस के चलते 3,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं जबकि 70 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी हैं.

नेहरा ने पीटीआई से कहा, ‘‘चलिये कुछ परिस्थितियां देखते हैं, जैसे कि अगर लॉकडाउन 15 अप्रैल को खत्म हो जाता है तो सामाजिक जीवन के सामान्य होने में काफी समय लगेगा. ’’

‘‘अगर आप मुझे पूछोगे तो मुझे जुलाई से पहले किसी भी क्रिकेट गतिविधि की उम्मीद नहीं दिखती. इसलिये शुरूआत होने से पहले यह लंबा ब्रेक है तो तेज गेंदबाजों के लिये फिट रहना सबसे बड़ी चुनौती होगी.’’

भारतीय टीम के पूर्व फिजियो जॉन ग्लोस्टर की तरह नेहरा को भी लगता है कि ज्यादातर क्रिकेटरों के लिये जगह की कमी समस्या है और तेज गेंदबाजों के साथ यह ज्यादा परेशानी भरा है.

आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के गेंदबाजी कोच रह चुके नेहरा ने कहा, ‘‘तेज गेंदबाजों के लिये दौड़ने के लिये जगह की कमी होती है. लेकिन इन हालातों से बचा नहीं जा सकता. इसलिये जिसके पास भी 15 मीटर से 20 मीटर तक का बगीचा है, उन्हें एक हफ्ते में तीन बार इस पर दौड़ना (शटल रन करना) चाहिए जब तक वे मैदान पर ट्रेनिंग के लिये वापसी नहीं कर लेते. ’’

नेहरा ने कहा, ‘‘किसी को भी चोट लग सकती है. जिस तेज गेंदबाज ने कम ट्रेनिंग की होगी वह ज्यादा ट्रेनिंग वाले की तुलना में ज्यादा फिट हो सकता है. खेल में ऐसा ही है. लेकिन हां, मुझे उम्मीद है कि अगर लॉकडाउन समाप्त होता है तो उनके पास ट्रेनिंग के लिये मैदान होंगे.’’