Akhilesh Tripathi
पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2013 मेंआर्यन टीवी (पटना) से हुई, फिर ईनाडु डिजीटल (ईटीवी हैदराबाद) में लगभग ...Read More
Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - December 25, 2025 4:14 PM IST

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के मौके पर पूरा देश आज उन्हें याद कर रहा है. भारत- पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने की दिशा में अटल विहारी वाजपेयी ने क्रिकेट के जरिए एक अहम कदम बढ़ाया था. साल 2004 में उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने पाकिस्तान का दौरा किया था और भारतीय टीम ने पाकिस्तान को उसकी सरजमीं पर वनडे और टेस्ट सीरीज में धूल चटाई थी.
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास आजादी के बाद से लगातार जारी है. साल 1990 के बाद दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध भी बंद थे, ऐसे में साल 2004 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी ने क्रिकेट के माध्यम से दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने को लेकर कदम उठाया. 14 साल बाद भारतीय टीम साल 2004 में सौरव गांगुली की कप्तानी में पांच वनडे और तीन टेस्ट की सीरीज खेलने पाकिस्तान रवाना हुई.
अटल विहारी वाजपेयी ने भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे से पहले खिलाड़ियों से मुलाकात की थी और उनका हौसला बढ़ाया था. वाजपेयी ने खिलाड़ियों को गिफ्ट में बल्ला भेंट किया. इस बल्ले पर लिखा था, ‘खेल ही नहीं, दिल भी जीतिए, शुभकामनाएं. हालांकि वाजपेयी के इस फैसले को लेकर सवाल भी उठाए गए थे.
सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने पाकिस्तान में धमाकेदार प्रदर्शन किया. भारतीय टीम में सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज के अलावा पठान ब्रदर्स भी शामिल थे. भारतीय टीम ने पाकिस्तान में वनडे सीरीज पर 3-2 से कब्जा किया, वहीं टेस्ट सीरीज को भी टीम इंडिया ने 2-1 से अपने नाम किया. मुल्तान में खेले गए टेस्ट मैच में वीरेंद्र सहवाग ने 309 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी. इस जीत ने भारतीय फैंस को खुशी से झूमा दिया था.
अब भी लगभग 13 साल से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली गई है. पाकिस्तान की टीम आखिरी बार साल 2023 में वनडे विश्व कप में हिस्सा लेने भारत आई थी, मगर चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम के पाकिस्तान जाने से इनकार करे के बाद अब दोनों देश आईसीसी टूर्नामेंट में तटस्थ स्थल पर खेलते हैं. भारत- पाकिस्तान के संबंध आज भी बेहतर नहीं है, मगर वाजपेयी ने जो प्रयास किया, उसे लेकर आज भी उन्हें याद किया जाता है.
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