Bharat Malhotra
Bharat Malhotra अभी cricketcountry.com की हिंदी टीम का हिस्सा हैं. भारत के पास डिजिटल मीडिया में करीब 17 साल का अनुभव है. साल 2008 में आ ...Read More
Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - January 23, 2026 10:20 AM IST

ढाका: अमीनुल इस्लाम बुलबुल बांग्लादेश क्रिकेट में हमेशा एक खास शख्सियत रहे हैं क्योंकि देश के पहले टेस्ट शतकवीर के रूप में उन्होंने 25 साल पहले भारत के खिलाफ बांग्लादेश के पदार्पण टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल की थी.
यह एक ऐसा पहला मौका था जिसे वह हमेशा संजोकर रखते, लेकिन गुरुवार को यह साफ हो गया कि एक और ‘पहला’ बात हमेशा के लिए प्रशंसकों के चहेते ‘बुलबुल भाई’ के नाम जुड़ने जा रहा है जो एक ऐसा कलंक कि इसे चाहकर भी आसानी से मिटाया नहीं जा सकेगा.
वह बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के ऐसे पहले अध्यक्ष बनने जा रहे हैं जिनके कार्यकाल में राष्ट्रीय टीम सरकार के सख्त रुख के कारण किसी आईसीसी वैश्विक टूर्नामेंट से हट सकती है. सरकार के सलाहकार आसिफ नजरुल ने सुरक्षा चिंताओं को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया है.
इस सख्त फैसले की कीमत बीसीबी को करीब 325 करोड़ बांग्लादेश टका (लगभग 27 मिलियन अमेरिकी डॉलर) चुकानी पड़ सकती है. भारतीय रुपये में यह करीब 243 करोड़ रुपये बनती है. जो उसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सालाना राजस्व से मिलती है. इसके अलावा प्रसारण अधिकारों और प्रायोजन से होने वाली आय का नुकसान भी जोड़ दिया जाए तो मौजूदा वित्त वर्ष में कुल आय में करीब 60 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा की गिरावट आ सकती है.
इसका संयुक्त असर यह भी हो सकता है कि भारत अगस्त–सितंबर में बांग्लादेश का दौरा नहीं करे जबकि उस सीरीज के टीवी प्रसारण अधिकार कम-से-कम अन्य देशों के साथ होने वाले 10 द्विपक्षीय मुकाबलों के बराबर माने जाते हैं.
तीन सप्ताह बाद 12 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव होने हैं. एक स्थिर सरकार के गठन के बाद जमात समर्थक और आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल नजरुल भले ही हाशिये पर चले जाएं, लेकिन यह शर्मिंदगी बुलबुल के लिए लंबे समय तक एक कड़वा अनुभव बनी रहेगी.

पिछले तीन हफ्तों से बांग्लादेश क्रिकेट में हो रही घटनाओं पर सक्रिय रूप से नजर रख रहे बीसीबी के एक सूत्र ने कहा कि एक बार जब नजरुल ने अपना फैसला सुना दिया तो रुख में बदलाव का कोई रास्ता नहीं था. नजरुल सरकारी खेल सलाहकार होने के साथ कानूनी सलाहकार भी हैं.
सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘आज जब वे आसिफ नजरुल से मिले तो ज्यादातर सरकारी सलाहकार ने बात की और बुलबुल भाई ने कभी-कभी टिप्पणी की. खिलाड़ी ज्यादातर चुप रहे. सीनियर खिलाड़ियों को लगता है कि अगर तमीम इकबाल जैसे कद के किसी व्यक्ति का अपमान किया जा सकता है तो उन्हें और भी बड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है.’
बैठक के बाद बुलबुल निराश दिखे क्योंकि वह नजरुल को मना नहीं पाए थे. बुलबुल ने कहा, ‘इस स्थिति में जब हम देख रहे हैं कि बांग्लादेश शायद विश्व कप में नहीं जा पाएगा, या बांग्लादेश को अल्टीमेटम दिया गया है, फिर भी हम विश्व कप में खेलने की पूरी कोशिश करेंगे.’
लेकिन जिस किसी ने भी प्रेस कांफ्रेंस देखी है, वह जानता है कि पूर्व राष्ट्रीय कप्तान की बात में कोई भरोसा नहीं झलक रहा था.
बांग्लादेश क्रिकेट जगत में बुलबुल ने अपनी साख खो दी है क्योंकि कई लोगों को उम्मीद थी कि वह आईसीसी में अपने पुराने संपर्कों का इस्तेमाल करके कम से कम मैचों को श्रीलंका में स्थानांतरित करने की कोशिश करेंगे.
सूत्र ने कहा, ‘बुलबुल भाई बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड में वापस आने से पहले 10 साल तक आईसीसी के ‘गेम डेवलपमेंट’ अधिकारी थे. वह आईसीसी में सभी को जानते हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि आखिरी बोर्ड बैठक में उन्हें किनारे कर दिया गया. पाकिस्तान के औपचारिक समर्थन को छोड़कर, उनके पक्ष में कोई नहीं था. यहां तक कि श्रीलंका क्रिकेट ने भी उनका साथ नहीं दिया.’

लिटन दास जैसे खिलाड़ी के लिए यह अपने देश की अगुआई करने का जीवन में एक बार मिलने वाला मौका था. 32 की उम्र के करीब पहुंच चुके लिटन को नहीं पता कि दो साल बाद उनकी फॉर्म और फिटनेस उन्हें एक और टी20 विश्व कप खेलने का मौका देगी या नहीं. और सबसे अहम बात, अगर वह खिलाड़ी के रूप में उपलब्ध भी रहें तो क्या वह कप्तान बने रहेंगे?
सोशल मीडिया पर राय बंटी हुई है, लेकिन बांग्लादेश की बड़ी आबादी का मानना है कि नजरुल ने सही कदम उठाया है और मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने के मुद्दे को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए टीम को भारत भेजने से रोका जाना चाहिए था.
दिलचस्प बात यह है कि आगामी चुनावों के बाद सत्ता में आने की प्रबल दावेदार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने इस मुद्दे पर खुलकर कोई राय नहीं रखी है. माना जा रहा है कि जनता की भावना भारत यात्रा के खिलाफ है और पार्टी तटस्थ रुख बनाए रखना चाहती है.
इन सबके बीच सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों का होना है जो एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेलने का सुनहरा मौका गंवा रहे हैं.
यह भी पता चला है कि नजरुल और बुलबुल ने खिलाड़ियों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें मैच फीस का नुकसान नहीं होगा और जितने मैच बांग्लादेश टूर्नामेंट में खेल सकता था, उसी के हिसाब से भुगतान किया जाएगा.
लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रिकेटर भी अपने देश के संपन्न वर्ग का हिस्सा हैं और एक स्तर के बाद किसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को पैसा नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धा की भावना प्रेरित करती है.
एजेंसी- पीटीआई
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