फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन (FICA) द्वारा बांग्‍लादेश प्रीमियर लीग (BPL) में वित्‍तीय अनियमित्‍ताओं को उजागर किए जाने के एक दिन बाद इस मामले में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की सफाई भी सामने आ गई है. बीसीबी ने इन रिपोर्ट को बेबुनियाद करार दिया.

एफआईसीए ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पूरे विश्व की क्रिकेट लीगों में वित्तीय गड़बड़ियां हैं और कई खिलाड़ियों को वेतन भी नहीं मिला. इन सभी टी20 टूर्नामेंट में बीपीएल अकेली ऐसी लीग है जो आईसीसी के स्‍थायी सदस्‍य देश द्वारा चलाई जा रही है.

बीसीबी ने एक बयान में कहा, “बीसीबी ने नोटिस किया है कि फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन (एफआईसीए) ने आईसीसी के इवेंट में खिलाड़ियों के वेतन संबंधित और फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट के आयोजन के बारे में जो दावे किए हैं वो गलत और भ्रामक हैं.”

बयान के मुताबिक, “एफआईसीए ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में पुरुष वैश्विक रोजगार रिपोर्ट-2020 में बांग्लादेश प्रीमियर लीग को आईसीसी से मान्यता प्राप्त उन लीगों में रखा है जहां देर से भुगतान और भुगतान न करने की समस्या है.”

बीसीबी ने हालांकि इस दावे को गलत बताया है और कहा है कि 170 अनुबंधित खिलाड़ियों में सिर्फ चार खिलाड़ियों के साथ भुगतान संबंधी मुद्दा रहा है.

बयान में लिखा है, “इस मामले में बीसीबी साफ कर देना चाहती है कि भुगतान संबंधी मुद्दे सिर्फ चार लोगों के साथ हैं.. जिसमें तीन विदेशी खिलाड़ी और एक कोच, एक ही टीम के जिन्होंने 2018 में हुए लीग के छठे संस्करण में हिस्सा लिया था.”

“यह उस टूर्नामेंट में इकलौता मामला है जिसमें 170 स्थानीय और विदेशी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ अनुबंधित हैं.”

बीसीबी इस बात को सिरे से खारिज करती है कि आईसीसी टूर्नामेंट में खेलने वाले खिलाड़ियों को भुगतान नहीं किया गया है. बीसीबी ने इसे तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना बताया है. बीसीबी ने अपने इनसेंटिव सिस्टम का हवाला दिया है जिसमें खिलाड़ियों को आईसीसी टूर्नामेंट में उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए वेतन के अलावा अलग से अवॉर्ड दिया जाता है.