भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया पहला टेस्ट मैच पुणे की पिच पर खेला गया था  © Wikimedia Commons
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया पहला टेस्ट मैच पुणे की पिच पर खेला गया था © Wikimedia Commons

बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर के रूप में अनुभवी पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह का पद समीक्षा के दायरे में आ गया है क्योंकि आईसीसी ने कड़ी रिपोर्ट देते हुए उनके मार्गदर्शन में पुणे में बनी पिच को खराब करार दिया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुणे में खेला गया पहला टेस्ट तीन दिन के भीतर खत्म हो गया था जिसमें मेजबान टीम को शिकस्त का सामना करना पड़ा। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच नवंबर 2015 में हुए तीसरे नागपुर टेस्ट की पिच को भी आईसीसी मैच रैफरी जैफ क्रो ने खराब करार दिया था गौरतलब है कि वह पिच भी दलजीत के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी। वह टेस्ट भी तीन दिन में खत्म हुआ था और मेजबान टीम ने जीत दर्ज की थी।

आईसीसी के एक और कारण बताओ नोटिस पर निश्चित तौर पर प्रशासकों की समिति गौर करेगी और बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी को 14 दिन के भीतर इस नोटिस का जवाब देना होगा। बीसीसीआई के एक शीर्ष सूत्र ने पीटीआई से कहा, “यहां तक कि अगर टीम प्रबंधन के निर्देश भी थे तो भी दलजीत इसकी अनदेखी कर सकते थे। अगर क्यूरेटर झुकना नहीं चाहता तो कोई उसे दबाव में नहीं डाल सकता। लेकिन दलजीत का टीम प्रबंधन की मांग के आगे झुकने का इतिहास रहा है और वह लगातार मनमाफिक विकेट देते रहे हैं। बात सिर्फ इतनी है कि नागपुर और पुणे के विकेट उनके सहज रहने के लिए काफी खराब थे। सीओए इस मामले को देख सकती है।” दलजीत का पद निश्चित तौर पर खतरे में है क्योंकि 14 महीने में यह आईसीसी की दूसरी प्रतिकूल रेटिंग है। [ये भी पढ़ें: पुणे पिच को आईसीसी मैच रैफरी ने खराब रेटिंग दी]

टीम प्रबंधन और बीसीसीआई की ओर से कोई लिखित निर्देश नहीं दिया गया था और ऐसे में सारी जिम्मेदारी दलजीत पर आ जाती है जो पहले ही 79 बरस के हैं और पद पर इसलिए बरकरार रहे हैं क्योंकि लोढा समिति की सिफारिशों में चयनकर्ताओं के लिए 60 साल या प्रशासकों के लिए 70 साल की आयु सीमा की तरह क्यूरेटर के लिए कोई आयु सीमा तय नहीं की गई है।