मोहम्मद अजहरुद्दीन © PTI
मोहम्मद अजहरुद्दीन © PTI

साल 2017 जनवरी में हैदराबाद क्रिकेट असोसिएशन का चुनाव लड़ने से मोहम्मद अजहरुद्दीन को इंकार कर दिया गया था। इसको लेकर अजहरुद्दीन ने महसूस किया था कि उनके साथ धोखा हुआ है खासतौर पर तब जब उन्हें बीसीसीआई की लीगल सेल ने चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी। खबरें थीं कि बीसीसीआई ने हैदराबाद क्रिकेट असोसिएशन को नोटिस भेजा था जिसमें उन्होंने जिक्र किया था कि अजहरुद्दीन को लेकर कोई रोक नहीं हैं और वह एचसीए में अपना पर्चा दाखिल कर सकते हैं।

एचसीए की एड-हॉक कमिटी के चेयरमेन प्रकाश चंद जैन ने बीसीसीआई को एक ई-मेल भेजा था जिसमें उन्होंने अजहरुद्दीन की चुनाव लड़ने की वरीयता पर जांच की थी। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर जैन ने अंतिम ई-मेल बीसीसीआई को 10 जनवरी 2017 को भेजा था। अजहरुद्दीन ने एचसीए को लोढ़ा समिति की सिफारिशों का पालन न करने का आरोप लगाया था। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में जैन ने कहा, “इस मुद्दे पर मैंने बीसीसीआई को तीन मेल लिखे थे। लेकिन बीसीसीआई अधिकारियों ने जवाब देने की जहमत नहीं उठाई। यहां तक कि आरओ ने भी बीसीसीआई को लिखा था। मुझे पता नहीं है कि उन्हें जवाब मिला कि नहीं। अगर उन्हें जवाब मिला होता तो हमें बताया जाता।”

बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव सीके खन्ना ने कहा, “इस मुद्दे पर प्रशासकों की समिति (सीओए) और पदाधिकारी से बातचीत हुई थी जहां ये बताया गया था कि बीसीसीआई की लीगल टीम ने ने अजहर को क्लीन चिट दे दी है। इस मुद्दे को जनरल बॉडी के पास पहुंचा दिया गया है। सीओए ने बीसीसीआई को मोहम्मद अजहरुद्दीन की बकाया राशि का भुगतान जल्दी करने का कहा है।

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इस मुद्दे पर बातचीत करते हुए एक शीर्ष बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, “उनका पक्ष लेने का य न लेने का सवाल नहीं है। उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं हैं और आप उन्हें उनकी बकाया राशि देने के लिए कानूनी रूप से नहीं रोक सकते, खासकर तब जब लीगल विभाग और बोर्ड ने उन्हें मंजूरी दे दी है।”