भारतीय महिला टीम © Getty Images
भारतीय महिला टीम © Getty Images

सीनियर महिला क्रिकेट टीम के लिए मजबूत बैंच स्ट्रैंथ तैयार करने की कोशिश में बीसीसीआई भारत ए के अधिक दौरे शुरू करने की योजना बना रहा है। भारत ‘ए’  के अलावा अंडर-16 टीम के लिए घरेलू टूर्नामेंट को बढ़ाने की भी योजना है। फिलहाल अखिल भारतीय जूनियर टूर्नामेंट केवल अंडर-19 और अंडर-23 टीम के लिए होते हैं। प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डायना इडुल्जी महिला समिति का हिस्सा है जो बुधवार को होने वाली बैठक  में महिला क्रिकेट की आगे की राह पर फैसला करेगी।

समिति के अन्य सदस्य भारत की कप्तान मिताली राज और सीनियर तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी हैं जबकि बीसीसीआई के महाप्रबंधक (खेल विकास) रत्नाकर शेट्टी इसके को-ऑर्डिनेटर होंगे। बीसीसीआई अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘‘हम घरेलू ढांचे की समीक्षा के अलावा महिला भारत ए टीम के दौरों की योजना बना रहे हैं। महिला टीम की मजबूत बैंच स्ट्रैंथ तैयार करने के लिए इसकी जरूरत है। मिताली ने स्वयं महसूस किया है कि हमारे घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी अंतर है।’’ राष्ट्रीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय मैचों की कमी पर भी बैठक के दौरान चर्चा होने की उम्मीद है। [ये भी पढ़ें: एम एस धोनी ने क्यों कहा था कि अगर ‘एक पैर’ बचेगा तब भी खेलूंगा पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला]

अधिकारी ने कहा, ‘‘टीम को इस साल कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेलना है। इसलिए हम सभी सदस्य देशों को सीमित ओवरों की द्विपक्षीय श्रृंखला और त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भी प्रस्ताव भेज चुके हैं। फिलहाल हमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से सकारात्मक जवाब मिला है। भारत का अगला टूर्नामेंट संभवत: अगले साल आईसीसी वनडे चैंपियनशिप है और इसके कारण हम चाहते हैं कि टीम द्विपक्षीय श्रृंखला के साथ त्रिकोणीय श्रृंखला भी खेले। अधिक घरेलू प्रतियोगिताओं और ए दौरों से महिला आईपीएल के लिए पर्याप्त पूल तैयार करने में भी काफी मदद मिलेगी।’’

पूर्व भारतीय कप्तान शांता रंगास्वामी ने कहा कि महिलाओं के लिए भारत ए दौरों की लंबे समय से दरकार है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है कि हमारी ए टीम 15 साल पहले पाकिस्तान गई थी लेकिन उसके बाद से किसी दौरे का आयोजन नहीं हुआ। इसलिए अगर यह नियमित होता है तो टीम की स्थिति कुछ और होती। इससे हमारी उभरती हुई लड़कियों को जरूरी अनुभव मिलेगा।’’ रंगास्वामी ने साथ ही कहा कि महिला आईपीएल से देश में महिला क्रिकेट को बढ़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘पुरुष आईपीएल जब 2008 में शुरू हुआ था तो सभी को आशंकाएं थी। देखिये 10 साल में लीग कहां पहुंच गई। महिला आईपीएल की भी यही कहानी होगी। अगर ऑस्ट्रेलिया में बिग बैश हो सकती है तो भारत में आईपीएल क्यों नहीं।’’