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भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में लंबे समय के बाद इस्तेमाल किया जा रहा है डीआरएस।

बीसीसीआई ने भारत बनाम इंग्लैंड सीरीज में लंबे समय के बाद डीआरएस सिस्टम को लागू किया है लेकिन अब तक दोनों ही टीमें इसे समझने में नाकाम रही हैं। तीनों ही टेस्ट मैचों में विराट कोहली और एलियेस्टर कुक दोनों ने ही कई गलत रिव्यू लिए। अगर खिलाड़ियों को डीआरएस समझने में इतनी तकलीफ हो रही है तो जाहिर है शुरूआत में अंपायर्स को भी परेशानी होगी। इसे देखते हुए बीसीसीआई ने आईसीसी से एक निवेदन किया है कि वह भारतीय अंपायर्स को डीआरएस को समझने का मौका दें। बोर्ड चाहता है कि मैच के दौरान अंपायर्स के एक पैनल को थर्ड अंपायर के साथ बैठकर डीआरएस को पास से देखने का मौका दिया जाए। ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड मोहाली टेस्ट का फुल स्कोरकार्ड

बीसीसीआई के जनरल सेक्रेटरी एमवी श्रीधर ने कहा, “हम डीआरएस को पहली बार भारत में इस्तेमाल कर रहे हैं इसलिए हमने सोचा कि हमारे अंपायर, जो कि अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग करते हैं उन्हें इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए। ताकि आगे जब भी उन्हें मौका मिले वह इसका पूरा फायदा उठा सके।” बीसीसीआई हमेशा से डीआरएस के खिलाफ रहा था लेकिन इस सीरीज में यह भारतीय टीम के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। भारत ने पहली बार 2008 में इसका इस्तेमाल किया था लेकिन बोर्ड को इसकी सटीकता पर पूरा भरोसा नहीं था। वहीं भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी कहा था कि डीआरएस पर शत प्रतिशत विश्वास नहीं किया जा सकता, जैसे कोई अंपायर गलती करता है वैसे ही यह भी गलत हो सकता है। लेकिन भारत के टेस्ट कप्तान विराट कोहली का सोचना इससे काफी अलग है। ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड तीसरे टेस्ट के चौथे दिन का लाइव ब्लॉग हिंदी में

कोहला का कहना है कि डीआरएस की वजह से खेल पर काफी सकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “मैं इससे काफी खुश हूं। यह मैदान पर दिए हए फैसले को सही सिद्ध करता है। अगर आप अंपायर के फैसले को चुनौती देना चाहते हैं तो आप केवल उन्हें यह नहीं कहते कि वह गलत हैं बल्कि आपके पास विकल्प है फैसले को दोबारा से चेक करने का। यह खेल के लिए काफी सही चीज है।”