अनुराग ठाकुर और आर.एम. लोढ़ा  © AFP
अनुराग ठाकुर और आर.एम. लोढ़ा © AFP

बीसीसीआई और लोढ़ा समिति के बीच चल रहे टकराव के संबंध में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तारीख 9 दिसंबर के लिए मुल्तबी कर दी है। गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई आज यानि कि सोमवार को होनी थी। लोढ़ा समिति ने कोर्ट से बीसीसीआई के सभी पदाधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने अंततः तारीख तो मुल्तबी करने का फैसला किया। गौरतलब है कि लोढ़ा समिति ने बीसीसीआई व उससे जुड़े स्टेट बोर्डस के ढांचों में आमूल- चूल बदलाव के लिए कई सारी गाइडलाइनें बनाई हैं। लेकिन इन गाइडलाइनों को लागू करने के लिए बीसीसीआई तैयार नहीं है।

ऐसे में बीसीसीआई को अपना तर्क रखने के लिए थोड़ा और समय मिलने से राहत जरूर मिली होगी। बीसीसीआई अपने राज्य संघों से पहले ही कह चुका है कि फैसला उसके खिलाफ जाता है तो ‘प्लान-बी’ लागू करने के खेल शुरू होंगे, जिसमें अपने-अपनों को शीर्ष पदों पर बिठाया जा सकता है। कोर्ट ने बीसीसीआई को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के निर्देश पहले ही दे दिए हैं, हालांकि बीसीसीआई ने इसे टालने की कोशिश की। इस वजह से उसे लोढ़ा समिति की नाराजगी भी झेलनी पड़ी है। कोर्ट के निर्देश के बाद अक्टूबर से अब तक बीसीसीआई ने तीन बैठक कर ली हैं, लेकिन उसके मुताबिक राज्य संघ अब भी बात मानने को तैयार नहीं हैं।

हाल ही में आर एल लोढ़ा समिति की बीसीसीआई के लिए की गयी सिफारिशों की प्रशंसा करते हुए टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने सुझाव दिया कि देश की अन्य खेल संस्थाओं के लिये भी इस तरह के प्रस्ताव होने चाहिए। आजाद ने कहा, “बीसीसीआई एक बिगड़ैल बच्चे की तरह है जो एक खिलौने से खेलने का आदी है और वह क्रिकेट है और वे इसे नहीं छोड़ना चाहते. वे लोढ़ा समिति की सिफारिशों का विरोध क्यों कर रहे हैं।” लोढ़ा समिति को उच्चतम न्यायालय ने नियुक्त किया था। समिति ने भारतीय क्रिकेट में आमूलचूल बदलावों की सिफारिश की है।