Before Test selection, Viru was sure he’d be the first Indian to score 300, Says VVS Laxman
Vvs laxman with Virender sehwag ( File Photo)© AFP

भारतीय टीम के पूर्व विस्‍फोटक बल्‍लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्‍तान के खिलाफ मुलतान में तिहरा शतक लगाया था। इसके साथ ही वो ऐसा करने वाले पहले भारतीय भी बन गए थे। सहवाग के अलावा करुण नायर दूसरे ऐसे भारतीय हैं जो टेस्‍ट में 300 रन की पारी खेल चुके हैं।

वीवीएस लक्ष्‍मण ने अपनी किताब ‘281 एंड बियोंड’ में कहा, “सहवाग ने मेरी 281 रन की पारी के बाद ही मेरे पास आकर ये घोषणा कर दी थी कि वो टेस्‍ट क्रिकेट में 300 रन बनाने वाला पहला भारतीय बनेगा।”

लक्ष्‍मण ने बताया 2001 में ऑस्‍ट्रेलिया के भारत दौरे के दौरान सहवाग ने 58 रन की पारी खेली। गेंदबाजी के दौरान भी उसने तीन विकेट निकाले थे। पुणे में मैच से एक रात पहले मैं, सहवाग और जहीर खान साथ डिनर करने गए थे। उस दौरान सहवाग ने मुझे कहा था, “लक्ष्‍मण भाई, आपके पास कोलकाता टेस्‍ट में तिहरा शतक बनाने का अच्‍छा मौका था, लेकिन आप चूक गए। अब आप देखते जाओ, भारत की तरफ से 300 रन बनाने वाला मैं पहला भारतीय बल्‍लेबाज बनूंगा।”

लक्ष्‍मण ने अपनी किताब में लिखा, “उस वक्‍त तक सहवाग ने एक भी टेस्‍ट नहीं खेला था। उसे ये भी नहीं पता था कि सिलेक्‍टर्स उसे टेस्‍ट टीम में जगह देने पर विचार करेंगे भी या नहीं। फिर भी उसने बेहद बड़ा दावा कर दिया था। कुछ समय के लिए मुझे लगा कि वीरू मजाक कर रहा है, लेकिन वो गंभीर था।”

तिहरा शतक लगाने के बाद वो मेरे पाया आया और कहने लगा कि मैंने आपसे कहा था कि मैं सबसे पहले ऐसा करूंगा। मेरे 281 के स्‍कोर को उसने जैसे ही पार किया, मैं काफी खुश हो गया था। जिस देश ने कई बड़े-बड़े बल्‍लेबाज दिए हों, वहां से एक भी तिहरा शतक नहीं बनना बड़ी बात थी। अपने करियर में तीन साल से भी कम समय में उसने ये रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था

लक्ष्‍मण ने कहा, “मैं ये जानना चाहता था कि उसमें सबसे पहले तिहरा शतक लगाने का आत्‍मविश्‍वास कहा से आया। मेरे सामने उसने ये दावा घमंड में नहीं किया था। ये उसकी खेल को लेकर समझ थी, जिसके कारण उसने ये कहा था।”

लक्ष्‍मण ने कहा, “नेट्स सेशन के दौरान भी मैंने वीरू को कभी ज्‍यादा तैयारी करते नहीं देखा। वो नेट्स में बल्‍लेबाजी करता था अाैर  अपने कोटे की कैच पकड़ने के बाद वो ड्रेसिंग रूम में चला जाता। वो न तो अपने कोटे से ज्‍यादा थ्रो डाउन की प्रैक्टिस करता था और न ही ज्‍यादा बल्‍लेबाजी करता। वीरू अक्‍सर हमें ज्‍यादा प्रैक्टिस करते देख हंसता था। उसका कहना था कि आपको मैच के दौरान ज्‍यादा से ज्‍यादा गेंद खेलनी चाहिए, न की नेट्स में।”