डेविड वॉर्नर © Getty Images
डेविड वॉर्नर © Getty Images

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने शेफील्ड शील्ड के आने वाले सीजन के लिए कनकशन सब्स्टिट्यूट को अनुमति देने का निर्णय लिया है और इस नियम को वह अगले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी लागू कर सकती है। इस ऐतिहासिक निर्णय के मुताबिक जब खिलाड़ी बाउंसर लगने या अन्य कारण के चलते चोटिल हो जाएगा तो उसकी जगह आने वाले सब्सटीट्यूट खिलाड़ी को फील्डिंग ही नहीं बल्कि बैटिंग और बॉलिंग करने की भी इजाजत होगी।

पिछले हफ्ते की बात है जब ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज डेविड वॉर्नर एक प्रैक्टिस मैच के दौरान सिर में गेंद लगने से चोटिल हो गए थे। वॉर्नर ने इस दौरान जोश हेजलवुड की गेंद को पुल करने की कोशिश की थी और पूरी तरह से चूक गए थे, चोटिल होने के बाद उन्हें मैच से रिटायर होना पड़ा था। मौजूदा समय में जो सब्स्टिट्यूशन के नियम हैं उसके मुताबिक सब्स्टीट्यूट फील्डर को बल्लेबाजी और गेंदबाजी की इजाजत नहीं होती वो सिर्फ फील्डिंग ही कर सकता है।

अक्सर यह देखा जाता है कि जब टीम का कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाता है तो टीम को 10 खिलाड़ियों के साथ मैच खेलने पर मजबूर होना पड़ता है। भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए गॉल टेस्ट में इसी वजह से श्रीलंका को पहली पारी में 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा था और दूसरी पारी में 9 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा था। क्योंकि उनके दो बल्लेबाज चोटिल हो गए थे। [ये भी पढ़ें: श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज में दम दिखाएंगे ये भारतीय खिलाड़ी]

रिपोर्ट्स की मानें तो आईसीसी इस मामले में जल्दी ही जरूरी बदलाव करने जा रहा है। इस संबंध में उम्मीद की जा रही है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया जल्दी ही घोषणा कर सकता है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रवक्ता ने द टेलिग्राफ के हवाले से कहा, “क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ऐसे सब्स्टिट्यूट की हमेशा से पैरवी करता रहा है जो चोटिल खिलाड़ी की जगह लेते हुए बैटिंग और बॉलिंग कर सके और हमने इसे सफलतापूर्वक अपने दूसरे टूर्नामेंट में लागू किया है। हम इस नियम को इस सीजन में शेफील्ड शील्ड में लागू कर सकते हैं।”

इसका मतलब है कि भविष्य में सदस्य देश इस नियम का प्रयोग अपने यहां 1 अक्टूबर से प्रथम श्रेणी कंपटीशन में कर सकते हैं। पिछले साल मेटाडो कप में न्यू साउथ वेल्स के बल्लेबाज डेनियल ह्यूज के सिर में पीटर सिडल की गेंद लग गई थी तो उनकी जगह पर निक लारकिन खेले थे। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग इस संबंध में अपना समर्थन लंबे समय से देते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की चोटों को अपेक्स बॉडी को गंभीरता से लेना चाहिए। बहरहाल, आईसीसी ने पिछले साल शील्ड में इसे शामिल करने की अनुमति नहीं दी थी।

हाल ही में पाकिस्तान के क्रिकेटर जुबैर अहमद के सिर में चोट लग गई थी और उनकी मौत हो गई थी। कुछ ऐसे भी उदाहरण देखे गए हैं कि इसी अंदाज में फील्डरों की भी दर्दनाक मौतें हुई हैं। जिसमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर रमन लांबा भी शामिल हैं जिनकी फील्डिंग करते हुए शॉर्ट लेग में सिर में गेंद से मौत हो गई थी।