Cricket is probably one of the worst sports for mental health, says Suzie Bates
Suzie Bates © Getty Images

बाकी खेलों की तरह क्रिकेट में भी शारीरिक फिटनेस को काफी महत्व दिया जाता है। मौजूदा समय में विश्व की सभी क्रिकेट टीमों के फिटनेस पैमाने काफी सख्त हैं और लगभग सभी खिलाड़ी उन पर खरे उतरने के लिए कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं। हालांकि मानसिक स्वास्थय ऐसी चीज है जिसके बारे में क्रिकेट जगत में ज्यादा बात नहीं की जाती है। हाल ही में ये मुद्दा चर्चा में तब आया जब इंग्लैंड की विकेटकीपर बल्लेबाज साराह टेलर ने अपने मानसिक स्वास्थय के चलते टी20 विश्व कप से अपना नाम वापस ले लिया। न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम की कप्तान सूजी बेट्स ने भी हाल ही में बयान दिया है कि क्रिकेट मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से दुनिया का सबसे खराब खेल है।

न्यूजीलैंड की न्यूज वेबसाइट से बातचीत में बेट्स ने कहा, “मुझे लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से क्रिकेट शायद सबसे खराब खेल है।” बेट्स अब अपनी टीम के खिलाड़ियों की शारिरक फिटनेस के साथ साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना चाहती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि पहले महिला क्रिकेट में ये मामला इतना बड़ा नहीं था। आपके पास आपके काम से जुड़ी जिंदगी होती थी, निजी जिंदगी होती थी और फिर आप तीन या चार हफ्ते के दौरे पर जाते थे और वापस आकर उसी पुराने रूटीन में लग जाते थे। अब आपकी एक जिंदगी क्रिकेट से है और एक उससे अलग। साथ ही जब आप वापस आते है, तो क्रिकेट से दूर होने के लिए अपने काम और पढ़ाई में नहीं लौटते हैं। आप वापस आकर फिर से अभ्यास में लग जाते हैं।”

बेट्स ने माना कि पिछले कुछ सालों में महिला क्रिकेट काफी आगे बढ़ा है लेकिन इसके साथ खेल से जुड़ी चुनौतियां भी उतनी ज्यादा बढ़ गई हैं। कप्तान ने कहा, “क्रिकेट पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। आप थोड़ा खेलते हैं और फिर आदी हो जाते हैं जो कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमेशा अच्छा नहीं होता। मुझे पता है कि मेरे पहले साल में जब मैं इंग्लैंड में खेल रही थी तो मुझे वहां जाकर खेलना बहुत पसंद था। ये एक नया माहौल था, एकदम नया। मुझे याद है जब मैं घर वापस आई और सीजन की शुरुआत थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं सीजन के आखिर में हूं और मुझे फिर से शुरुआत करनी पड़ेगी। मुझे याद है पहले साथ मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा था।”

बेट्स ने आगे कहा, “पहले साल के बाद मैंने सीखा कि मुझे अपने बाकी समय को अच्छे से प्लान कर इस्तेमाल करना होगा और कभी कभी खुद को क्रिकेट से पूरी तरह से दूर रखना होगा। मुझे नहीं लगता कि मैं पूरी तरह से ऐसा कर पाई हूं लेकिन पिछले 18 महीनों में मैने फुलटाइम एथलीट होने की परेशानियों से निपटना सीखा है।”