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IPL 2022: खराब अंपायरिंग के बावजूद, खिलाड़ियों को सवाल उठाने का चांस नहीं, उन्हें बनाए रखनी है गरिमा

IPL हो या कोई और टूर्नामेंट खिलाड़ियों के पास अंपायर से बहस करने का कोई मौका नहीं है. उन्हें तय नियमों के मुताबिक बस अपना सर्वश्रेष्ठ देने चाहिए. अंपायर के खराब निर्णयों पर उनका बस नहीं है,

Edited By : India.com Staff |May 03, 2022, 07:51 PM IST

Published On May 03, 2022, 07:51 PM IST

Last UpdatedMay 03, 2022, 07:51 PM IST

इंडियन प्रीमियर लीग अपनी रफ्तार और रोमांच के साथ आगे बढ़ रही है. इस दौरान यहां कुछ शानदार क्रिकेट देखने को मिल रही है और कुछ बेहद खराब. कई सारे खिलाड़ी बहुत शानदार खेल रहे हैं, जबकि कुछ के लिए यहां बुरा दौर जारी है. इस बीच टूर्नामेंट में अगर अंपायरिंग पर ध्यान दिया जाए तो यहां मैदान और टेलीविजन पर कुछ बेहद शानदार निर्णय भी हुए और समानरूप से सचमुच कुछ बहुत ही खराब निर्णय भी रहे, जिन्होंने खेल को प्रभावित किया, जिनसे टीमों का भाग्य प्रभावित हुआ है. इस पर टीमों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया भी देखी गई. किसी ने हल्के फुल्के अंदाज में सवाल किया तो किसी ने इस पर तीखा विरोध भी दिखाया. लेकिन संदेश साफ है कि अंपायर की गलती पर मुस्कुराओ और इसे सहन करो और खेल में बने रहो.

खराब अंपायरिंग का पहला मामला हमें दिल्ली कैपिटल्स (DC) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के मैच की याद दिलाता है, जब 22 अप्रैल को दिल्ली 222 रनों की विशाल चुनौती का पीछा कर रही थी और काफी पिछड़ी हुई दिख रही थी, क्योंकि अंतिम ओवर में उसे जीत के लिए 36 रन की दरकार थी.

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लेकिन उनके वेस्टइंडीज के बल्लेबाज रोवमैन पॉवेल (Rovman Powell) के पास कोई और प्लान था और उन्होंने ओबेड मैकॉय (Obed McCoy) को ओवर की पहली 3 गेंदों पर 3 छक्के जड़ दिए. दिल्ली को यहां से शानदार जीत की उम्मीद जगने लगी. लेकिन तीसरी बॉल ने सबकुछ बदलकर रख दिया. दिल्ली कैपिटल्स का डगआउट इस बात से गुस्सा हो गया कि यह फुलटॉस गेंद कमर से ऊपर थी और इसे नो बॉल क्यों नहीं दिया जा रहा. जब अंपायर ने ऐसा नहीं किया तो उसके कप्तान रिषभ पंत उत्तेजित हो गए और आवेश में आकर मैदान के किनारे तक पहुंचकर अपने बल्लेबाजों को वापस बुलाने लगे.

हालांकि बल्लेबाजों ने ऐसा नहीं किया तो पंत ने टीम के सहायक कोच प्रवीण आमरे (Pravin Amre) को मैदान पर भेज दिया कि वह अंपायर से इसे नो बॉल करार न देने की वजह पूछें और इसे जांचने के लिए तीसरे अंपायर को दें.

इस पूरे मसले का जो लब्बोलुबाव निकला वह यह था कि पंत पर पूरी मैच फीस का 100 फीसदी जुर्माना ठोक दिया गया, आमरे के साथ भी ऐसा ही किया गया और उन पर एक मैच का बैन भी ठोका गया और शार्दुल ठाकुर भी तब भड़के दिख रहे थे उनकी भी 50 फीसदी मैच फीस काट ली गई.

नो बॉल इसके बावजूद नहीं दी गई थी. और तो और पॉवेल ने अपनी लय गंवा दी और DC यह मैच हार गई. इसमें संदेह नहीं कि वह गेंद नो बॉल की सीमा के आसपास थी और अंपायर किसी भी चीज को जांचने के लिए तीसरे अंपायर को रेफर कर सकते हैं. वे अकसर साफ रन आउट को और तो और क्लीन छक्कों को भी जांचने के लिए थर्ड अंपायर के पास भेजते हैं.

यह भी निश्चित रूप से ऐसा ही केस था, जिसे जांचने के लिए टीवी अंपयायर के पास भेजा जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया.  इसके बाद पंत कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ भी एक नोबॉल के मौके पर अंपायरिंग से खुश नहीं थे. हालांकि वहा एक निर्णय़ उनके पक्ष में भी गया था.

इसके बाद सोमवार को राजस्थान रॉयल्स (RR) और कोलकाता (KKR) के बीच खेले गए मैच में भी ऐसी स्थिति देखी. जब मैच के अंतिम क्षणों में नीतिश राणा (Nitish Rana) और रिंकू सिंह (Rinku Singh) लगातार प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदों पर उछलकूद करते हुए ऑफ स्टंप से बहुत बाहर जा रहे थे. कृष्णा समझदारी से गेंद को और बाहर फेंक रहे थे. लेकिन उनकी कई गेंदों को नो बॉल करार दिया गया. इससे संजू सैमसन निराश थे. सैमसन के अनुसार वे गेंदें नो बॉल करार देने के आसपास भी नहीं थीं.

एक मौके पर तो सैमसन ने रेफरल (DRS) का भी इस्तेमाल कर लिया लेकिन वह अंपायर के निर्णय को बदल नहीं पाए.

इससे एक साधारण सीख यह मिलती है कि अंपायर से बहस करने का कोई मौका नहीं है. ऐसे में तय नियमों के मुताबिक बस अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें, उम्मीद है कि आईपीएल टूर्नामेंट कमेटी भी अंपायरिंग के कुछ बेहद साधारण निर्णयों पर अपना ध्यान खींचेगी और इन पर सख्त फैसला करेगी. लेकिन खिलाड़ियों को यह सबक लेना चाहिए कि उन्हें अंपायरिंग के साथ बने रहना ही चाहिए. अंपायर से बहस करके उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला.

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