‘Crying on the couch’: How Aussie skipper Tim Paine fought his mental demons
टिम पेन (Getty Image)

ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम के कप्तान टिम पेन ने खुलासा किया है कि उन्हें क्रिकेट खेलना पसंद नहीं था। अपने करियर के ज्यादातर समय इंजरी से जूझने की वजह से पेन ने अपना आत्मविश्वास खो दिया था और अपने सोफे पर बैठकर रोया करते थे।

35 साल के पेन को स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर पर एक साल का बैन लगाए जाने के बाद साल 2018 में टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया था। पेन की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल एशेज रीटेन की थी, जिसके बाद उनकी काफी प्रशंसा हुई।

हालांकि पेन के करियर की शुरुआत बेहद मुश्किल थी। साल 2010 में बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने के बाद पेन की उंगली में गंभीर चोट लगी। जिसके बाद उन्हें सात सर्जरी करवानी पड़ी और पेन दो सीजन तक मैदान से दूर रहे।

इस अंतराल के दौरान पेन बेहद निराश और परेशान रहे। उस समय के बारे में पेन ने कहा, “मैं ऐसे स्तर पर पहुंच गया था जहां मैं चोट लगने से डरने लगा था और मुझे नहीं पता था कि मैं क्या करूंगा।”

उन्होंने कहा, “गेंद को देखने की बजाय मैं चोट लगने के बारे में सोचने लगा था। जब आप ऐसा करते हैं तो खेल मुश्किल हो जाता है। काफी समय तक मैं रन नहीं बना पाया था। मैं खाना नहीं खा पा रहा था, सो नहीं पा रहा था, मैं मैच से पहले इतना ज्यादा नर्वस रहता था। मेरे साथ रहना मुश्किल हो गया था।”

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हालांकि इस मुश्किल समय में भी उन्होंने क्रिकेट के लिए अपना प्यार नहीं खोया था लेकिन खेल में खुद हिस्सा लेने की बात पेन को नापसंद थी। उन्होंने कहा, “मैं दुनिया में कही और जाना चाहता था क्योंकि मुझे यकीन हो गया था कि मैं असफल हो जाउंगा। मुझे नहीं लगता कि किसी और को पता था कि मैं संघर्ष कर रहा था, ना ही मेरे दोस्तों को ना ही मेरी पत्नी को।”

तस्मानिया के क्रिकेटर ने कहा, “मुझे ऐसे दिन याद हैं जब मैं घर पर बैठा रहता था, वो काम पर होती थी और मैं सोफे पर बैठकर रोता रहता था। ये अजीब और दर्दनाक था, इसे बयान करना मुश्किल है लेकिन मुझे लग रहा था कि मैं कितने सारे लोगों को निराश कर रहा हूं।”

पेन ने बताया कि उस मुश्किल समय में क्रिकेट तस्मानिया के खेल मनोवैज्ञानिक ने उनकी मदद की थी। उन्होंने कहा, “ये पहला मौका था जब मैंने किसी को बताया कि मेरे साथ क्या हो रहा है लेकिन मुझे याद है कि उस कमरे से बाहर निकलते ही मुझे अच्छा लगा था। मैंने किसी को अपने मन की बात बताई, चीजों को ठीक करने की ओर पहला कदम था ये बात स्वीकार करना कि मुझे मदद की जरूरत है।”

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साल 2017-18 की एशेज सीरीज पर पेन को फिर से मौका मिला लेकिन उनके मन की अशांति फिर लौट आई। उन्होंने कहा, “मैं बेहद अच्छा महसूस कर रहा था और फिर अचानक ये सोचने लगा कि ये सही नहीं है। मुझे लाखों लोगों के सामने बल्लेबाजी करनी होगी और तीन-चार दिन के बाद मैंने सोचा कि मैं ये नहीं करना चाहता।”

पेन ने आगे कहा, “मैंने फिर से कुछ लोगों से बात की और अपना मन हल्का किया और मैंने सोचा कि मैं मौके का पूरा फायदा उठाउंगा और मजा करूंगा।”

इंग्लैंड टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज सारा टेलर और ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल उन कुछ खिलाड़ियों में से हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत पर खुलकर बात की। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर काफी गंभीर है। और इसी वजह से मैक्सवेल, निक मैडिसन और विल पुकोवस्की को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के निपटने के लिए जरूरी ब्रेक दिया गया था।