CWC 2019: Instead of criticising we should praise MS Dhoni  for his contribution, says Chetan Chauhan
MS Dhoni (File Photo) @ AFP

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की लगातार जारी आलोचना और उनके संन्यास की उठती मांगों के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी चेतन चौहान ने कहा कि इस चैम्पियन क्रिकेटर पर दबाव डालने के बजाय भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान का एहतराम करते हुए उन्हें खुद फैसला लेने दिया जाए।

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उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री और भारत के लिये 40 टेस्ट और सात वनडे मुकाबले खेल चुके चौहान ने कहा, ‘‘विश्व कप में अपेक्षानुरूप प्रदर्शन न कर पाने की वजह से धोनी की आलोचना करने वालों को यह नहीं भूलना चाहिये कि भारतीय क्रिकेट में धोनी का बेमिसाल योगदान रहा है। इसे अल्फाज में बयान करना मुश्किल है। यह सही है कि विश्वकप में धोनी का प्रदर्शन अपेक्षानुरूप नहीं रहा, मगर उन पर संन्यास लेने का दबाव डालने के बजाय यह निर्णय उन्हीं पर छोड़ देना चाहिये। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘धोनी ने भारत को क्रिकेट के सभी प्रारूप में चैम्पियन बनाया है। उनके ऐतिहासिक योगदान को भारतीय क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अल्फाज में लिखा जाएगा। ’’ इस सवाल पर कि क्या भारतीय टीम के पास इस वक्त धोनी का कोई विकल्प है, चौहान ने कहा ‘इतनी आसानी से दूसरा महेन्द्र सिंह धोनी पैदा नहीं होगा। उनके नजदीक पहुंचने के लिये दूसरे विकेटकीपर बल्लेबाजों को बहुत मेहनत करनी होगी।’

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विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में धोनी को सातवें नम्बर पर बल्लेबाजी करने के लिये भेजने के निर्णय को बड़ी चूक करार देते हुए पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि उस वक्त जैसे हालात थे, उनमें धोनी को पांचवें नम्बर पर उतारना चाहिये था। ‘‘तीन विकेट गिरने के बाद पांचवें नम्बर पर पारी को सम्भालने वाला बल्लेबाज चाहिये था। धोनी यह काम बखूबी कर सकते थे। उस स्थिति में हमारे पास नीचे के क्रम में रिषभ पंत या हार्दिक पांड्या में से एक आक्रामक बल्लेबाज बच जाता, जो आखिरी ओवरों में ताबड़तोड़ शॉट खेलकर मैच जिता सकता था। मगर ऐसा न होने के कारण 92 रन पर छह विकेट गिर गये और धोनी तथा रवीन्द्र जडेजा पर जबर्दस्त दबाव आ गया।’’

चौहान ने माना कि धोनी को निश्चित बल्लेबाजी क्रम नहीं मिला, ऐसे में अस्थिरता पैदा हुई। चौहान ने टीम के चयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘चौथे नम्बर पर अजिंक्य रहाणे या अंबाती रायडू जैसे लंबी पारी खेलने की क्षमता रखने एक बल्लेबाज की जरूरत थी। टीम इंडिया में चार और पांच नम्बर की बल्लेबाजी बेहद कमजोर थी। यह कमी सेमीफाइनल में उजागर हो गयी। ’’