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डे-नाइट टेस्ट में क्यूरेेेेटर दलजीत सिंह ने पिच पर अधिक घास रखने की दी सलाह, ओस की भूमिका अहम

भारत और बांग्लादेश के बीच 22 नवंबर से खेला जाएगा डे-नाइट टेस्ट मैच

Edited By : Press Trust of India |Oct 30, 2019, 04:46 PM IST

Published On Oct 30, 2019, 04:46 PM IST

Last UpdatedOct 30, 2019, 04:46 PM IST

Eden-Gardens

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व मुख्य क्यूरेटर दलजीत सिंह (Daljit Singh) ने अगले महीने भारत में होने वाले पहले डे-नाइट टेस्ट मैच के दौरान विकेट पर अधिक घास रखने और ओस से बचने के लिए आउटफील्ड पर कम घास रखने की सलाह दी है।

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बीसीसीआई और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ईडन गार्डन्स में 22 नवंबर से शुरू होने वाले टेस्ट मैच को Pink Ball से खेलने पर सहमति जताई है।   इस डे-नाइट टेस्ट मैच की तैयारियों में हालांकि बहुत कम समय बचा है।

बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) को हालांकि गुलाबी गेंद से मैचों के आयोजन का अनुभव है।

ओस होगी चिंता का विषय’

भारतीय क्रिकेट में 22 साल तक सेवा देने के बाद बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर पद से पिछले महीने सेवानिवृत होने वाले दलजीत ने कहा, ‘ओस मुख्य चिंता होगी।   इसमें कोई संदेह नहीं।   उन्हें समझना होगा कि आप इससे बच नहीं सकते हो। ’

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उन्होंने कहा, ‘इससे बचाव के लिए आउटफील्ड में घास कम रखनी होगी और पिच पर आम घास से अधिक लंबी घास रखनी पड़ेगी।   आउटफील्ड में जितनी अधिक घास होगी, ओस की परेशानी उतनी ज्यादा होगी।  ’

डेढ़ बजे शुरू होगा मैच

इस मैच के दोपहर बाद एक बजकर 30 मिनट से शुरू होने की संभावना है और खेल रात आठ बजकर 30 मिनट तक चल सकता है।   दलजीत का मानना है कि गुलाबी गेंद की चमक लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पिच पर अधिक घास रखनी होगी।   उन्होंने और उनकी टीम ने 2016 में दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट के दौरान ऐसा किया था जब मैच ग्रेटर नोएडा में दूधिया रोशनी में खेले गए थे।

पिंक बॉल जल्दी गंदी हो जाती है, पिच पर अधिक घास रखनी होगी’

उन्होंने कहा, ‘गुलाबी गेंद जल्दी गंदी हो जाती है और इसलिए उन्हें पिच पर अधिक घास रखनी होगी।   आपको याद होगा जबकि एडिलेड में (2017 में) पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया था तो उन्होंने पिच पर 11 मिमी घास रखी थी।   आपको इतनी घास को तैयार करना होगा।   आप मैच के एक दिन पहले इसे नहीं काट सकते या फिर पिच धीमी खेलेगी।  ’

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दलजीत ने कहा, ‘(दलीप ट्रॉफी मैचों के दौरान) ओस एक मसला था, गेंद वास्तव में गंदी हो जाती थी।   पिच पर सात मिमी घास थी जबकि अमूमन घास 2। 5 से चार मिमी लंबी होती है।   घास लंबी होने का मतलब है कि गेंद बहुत अधिक सीम करेगी।  ’

आउटफील्ड की घास पर पानी न डालने की सलाह

एक अन्य क्यूरेटर ने गोपनीयता की शर्त पर मैच से दो तीन दिन पहले से आउटफील्ड की घास पर पानी न डालने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, ‘ओस मसला होगा लेकिन तब बहुत अधिक ठंड नहीं रहेगी।   सुपरसोपर्स के अलावा ओस से निबटने में उपयोगी रसायनों का उपयोग किया जा सकता है।   आउटफील्ड में काफी घास काटनी होगी।   मैच से दो दिन पहले पानी डालना बंद करना होगा क्योंकि इससे नमी बन जाएगी।  ’

उन्होंने कहा, ‘आउटफील्ड में हम अमूमन सात से आठ मिमी घास रखते हैं लेकिन दिन रात्रि टेस्ट मैच के लिए यह छह मिमी रखी जा सकती है।   इससे आप ओस का प्रभाव कम कर सकते हैं लेकिन आप प्राकृतिक परिस्थितियों से पूरी तरह नहीं निबट सकते हो। ’

 

 

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