डीडीसीए को तत्काल निलंबित करने की सिफारिश की गई है © Getty Images

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार गठित जांच समिति ने डीडीसीए को तत्काल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से निलंबित किए जाने की सिफारिश की है। समिति ने अपनी 247 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा है, “डीडीसीए पर लगे भ्रष्टाचार के व्यापक आरोपों को देखते हुए इसे बीसीसीआई से तत्काल निलंबित कर दिया जाना चाहिए।” सतर्कता विभाग के प्रधान सचिव चेतन सांघी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने रिपोर्ट के कुछ हिस्से पढ़कर सुनाए जिससे पता चला कि जांच समिति ने डीडीसीए की काफी गहराई से जांच की है। ALSO READ: वेस्टइंडीज बनाम ऑस्ट्रेलिया दूसरे टेस्ट का फुल स्कोरकार्ड

रिपोर्ट में अनेक मुद्दों को शामिल किया गया है, जिसमें फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के निर्माण में हुई कथित वित्तीय अनियमितता और आयु प्रमाण-पत्र फर्जीवाड़ा मामले की शिकायत शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के निर्माण के लिए 24 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया था, लेकिन अंतत: इसके बनने में 114 करोड़ रुपये लग गए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि डीडीसीए द्वारा निर्माण के लिए दिए गए अधिकांश ठेके बिना निविदा निकाले ही दे दिए गए और जिन कंपनियों को ठेके दिए गए उनमें से कई डीडीसीए के अधिकारियों और बोर्ड सदस्यों की ही थीं। ALSO READ: क्या से क्या बन गए ये क्रिकेटर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डीडीसीए ने कंपनी अधिनियम की धारा 211 का उल्लंघन किया है, जिसके तहत किसी गैर-लाभकारी कंपनी को अपना हिसाब-किताब सार्वजनिक करना अनिवार्य है। जांच समिति ने डीडीसीए में सुधार के लिए उचित कार्यवाही न करने के लिए बीसीसीआई की भी आलोचना की है और दिल्ली सरकार को डीडीसीए की कार्यप्रणाली को युक्तिसंगत बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने का अनुरोध करने का सुझाव दिया है। ALSO READ: इंग्लैंड बनाम साउथ अफ्रीका टेस्ट का फुल स्कोरकार्ड

उल्लेखनीय है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) स्पॉट फिक्सिंग एवं सट्टेबाजी मामले की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा समिति इस समय डीडीसीए की कार्यप्रणाली की भी निगरानी कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निलंबित कर दिए गए सांसद कीर्ति आजाद और पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी बिशन सिंह बेदी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर डीडीसीए भ्रष्टाचार मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा था, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने यह जांच समिति बिठा दी थी।
हैरानी की बात यह है कि जांच समिति की रिपोर्ट में डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का कोई जिक्र नहीं है, जबकि दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) जेटली पर डीडीसीए में हुए तमाम भ्रष्टाचारों को लेकर हमलावर रही है। जांच के दौरान दर्ज किए गए विभिन्न अधिकारियों के बयानों को रिपोर्ट में संलग्नक के तौर पर शामिल किया गया है, लेकिन उसमें भी कहीं जेटली का जिक्र नहीं है। ALSO READ: गुप्टिल की तूफानी पारी, 10 विकेट से जीता न्यूजीलैंड